भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता हुआ है. भारतीय उपभोक्ताओं के लिहाज से देखें तो ये समझौता काफी अहम है. इस समझौते के लागू होने के बाद 90 फीसदी मेडिकल, सर्जिकल और ऑप्टिकल इक्विपमेंट ड्यूटी फ्री हो जाएंगे. जिससे स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हो जाएंगी. जहां तक खाने पीने की चीजों की बात है तो ऑलिव ऑयल और वेजिटेबल ऑयल समेत दूसरे तेलों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म हो जाएगी. ब्रेड, पेस्ट्री,बिस्किट, चॉकलेट और पेट फूड जैसे प्रोसेज्ड फूड पर टैरिफ पूरी तरह खत्म कर दी गई है. फ्रूट जूस और अन-अल्कोहलिक बीयर के आयात पर टैरिफ को शून्य कर दिया गया है. कृषि उत्पादों पर से लगने वाली टैरिफ पूरी तरह हटा दी गई है या कम कर दी गई है.. जिससे लोगों को सस्ती दरों पर ये चीजें मिलेंगी. किवी और पीयर्स जैसे फलों पर ड्यूटी 33 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है.. पर्ल, महंगे पत्थर और मेटल्स पर टैरिफ 22.5 से घटाकर शून्य कर दी गई है.समझौते के अमल में आने के बाद कुछ चुनिंदा लग्जरी गाड़ियां सस्ती हो जाएगी. क्योंकि इंपोर्ट ड्यूटी 110 प्रतिशत के घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है. ऑटो पार्ट्स पर से अगले कुछ सालों में ट्यूटी पूरी तर खत्म कर दी जाएगी. सवाल उठता कि इस डील से भारत को क्या मिलेगा? इसका जवाब ये है कि भारत के 99 फीसदी सामान की यूरोपियन बाजारों में एंट्री मिल जाएगी, जिससे भारतीय व्यापार और उद्योग में विकास की जबर्दस्त संभावना है. कुल 75 बिलियन डॉलर यानी 6 लाख 41 हजार करोड़ के एक्सपोर्ट को नई गति मिलेगी. इनमें 33 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट सीधे श्रम सेक्टर जैसे कपड़ा, लेदर, मरीन प्रोडक्ट, रत्न और ज्वेलरी से जुड़ा हुआ है. इससे कामगारों, महिलाओं, युवाओं और छोटे उद्योगों का सशक्तिकरण होगा. इस समझौते से ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारी तेजी आने की उम्मीद है. ना सिर्फ महंगी विदेशी गाड़ियां भारत आएंगी. बल्कि मेक इन इंडिया के तरह बनी गाड़ियां और पार्ट्स को यूरोपीय बाजार मिलेंगे.इस तरह, भारत के कृषि सेक्टर में भी बड़ा बदलाव आएगा. कृषि उत्पादों, चाय, कॉफी, मसाले, फल और सब्जियां के साथ साथ प्रोसेस्ड फूड यूरोपीय बाजारों में जाएंगे.. जिससे ना सिर्फ कॉम्पिटिशन को बढ़ावा मिलेगा.. बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी.
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