Skip to playerSkip to main content
  • 17 hours ago
#dailymotion#admd#india#crimefiles
Transcript
00:00अर्वान, बोला थाना टीवी बंद करो, आपा पढ़ रही हैं ना?
00:18जो कि केवल विष अमरत के पहाड से ही प्राप्त किया जासे हैं
00:22लेकिन रादी परी, हम तो विष्क अमरत ले आये थे पहाड से
00:28अर्मान, भी बंद करो
00:30अबब बीज थोड़ी दे रहाँ
00:32आप देखरें ना?
00:34अबब बढ़ रही है अभी चलो, परण बंद करो
00:37साबाश
00:38अबब बढ़ एक्जाम करें अपकी?
00:41अच्छे गाइबू
00:42अच्छे गाइबू
00:43अबब बुकल साइंस
00:44और लिंदी
00:45अबब बंद लगाएब करना
00:47सुनी आप कपड़े बदल लीजे
00:49मैं खाना लगा देते हूं
00:51रजिया
00:53मेरे खाना भी लगादो
00:54मुझे किसी आम से बार जाना है
00:56अभी?
00:57हाँ आप किसे से मिलना है?
00:58किसे मिलना है?
00:59मैं जाना है
01:00मैं और सी आनताला
01:00थ्रशन भी है
01:02कुछ कामनते की बाद करना चारता है
01:07सुनी, तेर मत भी जाएबू
01:09आना, आल्ला आ रपिस
01:10आला ंआ
01:21किसी को पता नहीं था
01:22कि आखरी बार था
01:23जॉबसल अपने खर से निकल दहा था
01:53कि अम्मी मैं सोने जा रही हूं सुपह पांच बजे का अलारम लगा रही हूं अगर मेरी आख न खुले न तो आप उठा देना
02:06कि कि क्या हो आम्मी पतना शबना मेरी अभू को कब से फोन लगा रही हूं पोन नहीं उठा रहे हूं
02:21अब इसको देखे खुछ कर लेंगे अभू कोई आप इना परिशान मतो हुआ हालो पुलीस मैं ओफिस से आ रहा था मैं रास्ते में देखा कि अचानक एक आदमी पड़ावा है मैं उसके सामने गया मैं देखा कि वह मारा पड़ावा था मुझे कुछ समझ में नहीं आया औ
02:51लेकिन इसमें कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे इसकी पहचान हो सकता है वो सकता है फोनी सी आदमी का है जी फोन लोग्ड है अगर कॉलर ने फिर से फोन किया तो पता चले गए आदमी कौन है
03:04कि अगगे श्रूआ अगे अगे शनला मुझे पड़ने पड़ने बैठे अब खुआ अपको आगा है नहीं यहीं
03:34साब कोई रजी है
03:36कि अपसर कहा है आप
03:44मैं रात से फोन प्राइ करे हूं और फोन ही नहीं उठा रहे हैं
03:46मैं पुलिस सब इस्प्रेक्टर संतोष बोलनों मिलन नगर थाने से
03:49पुलिस
03:51यह यह अफसल कहा है आपकी पती का एक्सिडेंट हो गया
03:55बस आप शुपिटल आजाए जाए
03:57क्या
03:59आप
04:01आप
04:05आप
04:07आप
04:11आप
04:13आप
04:15आप
04:17आप
04:19मैं
04:21आप
04:23आप
04:25आप
04:27आप
04:29आपके शोहर जवर्पुर वाइपास रोट पर क्या कर रहे था
04:31मुझे नहीं पता सब
04:33कर शाम में
04:35अफजल कर रहे
04:37काना काया और
04:39फिर बात जले गए
04:41पस इतना ही कागी
04:43आपके जानता नहीं
04:45अजनभी है
04:47अजनद की बात करना चाहता है
04:49हमने अभी हिट अंड रंका क्रेस्ट रेस्टर किया है
04:51यह कुछ समान है उनका
04:53जो उनकी बोड़ी से बात
04:57इन्ना लिल्लाह वा इन्ना इलह है राजियू
05:01आपके
05:03आपके
05:05आपके
05:07आपके
05:09आप
05:11आप
05:13आप
05:15आप
05:17आप
05:19आप
05:21आप
05:23आप
05:25आप
05:27आपके
05:29आपको कभी भी किसी चीज़ को जरूरत हो
05:33तो मुझे फोन खेजिए
05:35कि
05:45किसके दिल में क्या है
05:47कौन अपने दिल में आपके लिए बैर रखे हुए है
05:49यह कोई नहीं कह सकता है
05:51एक रात में परिवार जड़ गया
05:53रोड एक्सिडेंट में अफजल शेक की
05:55अन दे स्पॉर्ट मौत हो गई
05:57लेकिन उसकी बीवी रजिया शेक को यह शक था
05:59कि उसे मारा गया है
06:01यह सिर्फ एक वहम सिर्फ एक रोड एक्सिडेंट था
06:03या फिर एक मॉड़
06:05साहब
06:07अफसल उसरा जिस अजनवी आदमी से मिलने गए थी
06:09उसने चाहन बुचकर उने कुछल दिया
06:11लेकिन अभी तो एक्सिडेंट ही लग रहा है
06:13पोस्ट मार्टम में कुछ आया नहीं
06:15जहां एक्सिडेंट हुआ
06:17वहां से इस्टी भी नहीं था
06:19नहीं कुछ बताया नहीं
06:21आपका कहना है वह अजनवी था
06:23पहली बार मिलना आपके पती के
06:25कॉल लिकॉर्स में भी कुछ नहीं मिलना
06:27तो भला अजनवी ऐसा क्यों करेंगा
06:29साब यह आप पता लगाई
06:31मेरी पती की
06:33किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी
06:35तो कोई मर्डर क्यों करेंगा
06:37जरा सोची इस बारे में
06:39कतलना से ही
06:41एक्सिडन तो है
06:43और मैं चालती हूं कि यह जिस किसी ने भी किया
06:45उसे कड़ी से कड़ी से
06:47सजा मिले
06:49कुछ
06:51कुछ
06:53कुछ
06:55कुछ
06:57कुछ
06:59कुछ
07:03अपने पर कहर तूटने के बावजूद
07:11रजिया में एक जुनून था
07:13कि अफजल का गुनेगार पकला जाए
07:15और उसे सजा हो
07:17पर पुलिस इंवेस्टिगेशन टीम
07:19मुझरिम के बारे में कुछ भी पता नहीं कर पाई थी
07:23लेकिन रजिया ने हार नहीं मानी
07:25पूरे छे महीने वो पुलिस टेशन के चक्कर काटती रही दलीले करती रही और फिर एक दिन
07:35साब, साब वो अफसल के?
07:37नहीं मिलना वो आदमी जिसने आपके पती का एक्सिदेंट के
07:40इसका मतलब अफसल को और मुझको किसी को भी इंसाफ नहीं मिलेगा
07:44आपसे गुजारिश है, आप हमारो और अपना पग जाया ना करे
07:47केस क्लोस कर दिया हमने
07:49क्लोस किये जाते, ऐसे केस इस सिर्फ आखड़े बनकर रह जाते
07:57लेकिन, क्या आक्रोश क्लोस किया जा सकता है
08:01राजिया के मन में एक आक्रोश था、 एक अधूरापन था
08:03कम से कम राजिया से तो आगे नहीं हो पा रहा
08:06और फिर अफजल को खोने के पूरे तीन साल के बाद एक ऐसा वाक्या हुआ जिससे इस क्लोज केस की तक्दीर फिर से खुल देए
08:14चेर्स
08:18तचिन सचिन होगा लेकिन अपना विराड किसी अलग मिट्टी का बना हुआ भाई
08:232016 में किया था कांड ना किया था
08:28यह अपना जबलपूर बाइपास उड़ा दिया तक तुने सच में किसी को ओड़ा कर मार डाला क्या कर रहा है भाई तीरे बोल लेकिन तू इसे कैसे किसी हजनभी को प्रवचन मत ने उने सोपारी लिए एक लाख रुपए की बात हुई थी
08:47यह ने पीस जार दिया अस्ति अजार वी बाकिये उसके पास उपना मू मत खोल देना किसी के सामने साले समझा नहीं यह मुझे क्या करना
08:56
08:58
09:01
09:03
09:05
09:07
09:11
09:15
09:16
09:16
09:17यह दो लोग बाहर गये देखा तो नहीं
09:20यह जानता है हुआ है कि जानने लगी
09:22तो
09:25कुछ जानने लगा
09:26
09:27
09:30है इंफर्मेशन कितने सही था ख़बरी एकान कभी धोखा नहीं देते साब
09:34वो बंदा पक्का सुपारी की बात करता था
09:36तोने आगे कुछ कि इस बंदे को ढूंडने की कोशिश को, कियाना साब, पुरा आफ़ता रोज चील की तरह ठेके पर अज़े रखी मैंने, तेकिन उदोनों बंदे पिर आई ही नहीं, तोन से गयं के लिए कान करता है, पुलिस के लिए, पुलिस का खबरियों, तो नहीं को�
10:06लाला ने भी तक कोई फोन नहीं किया, नहीं किया साथ, उसकेच अर्टिस के साथ बैठका स्केच बनवा सकता है, इसे तो नहीं देखा, जो बंदा डिंग हाग राता उसका चेहरा तो नहीं देख पाया, लेकिन हाँ, यह दुबारा ठकरा जाए ना, विवार की बंटी जर
10:36लात आख जा रहा होंगा, तक कोई लोजर रिपोर्ट फाइल होंगा, एक काम करो, तोमर असमा, दो हजार सोला में जबल पूर वाइपास लोड जितने भी एक्सेंट केसिस होएं, सब की फाइल मंगा,
10:44खबरी द्वारा दी गई इस टिप ने एक होज की शुरुवात की
11:01उस अनसुलजे एक्सिरेंट केस फाइल की खोज जिसकी क्लोजर रपोर्ट पीन साल पहले ही फाइल हो चुकी थी
11:08परहाल नियती इस केस को दुबारा खोलने पर तुली थी
11:12पंगश की टिप से मैच होते हुए दो केसे मेले हैं पहला केस एक अग्यात औरत का है वो जबलबुर बाइबास रोड के पास मर्य हुए मिली थी लेकिन उसके पैचान हो पाई
11:22दूसरे केस में पैचान हो पाई सर कोई अफजल शेख था टू वीलर पर हिट इन रन का केस अजिस्टर हुआ था पर कभी सॉल्व नहीं हुआ फ्लोजर रिपोर्ट फाइल की गई
11:30कुछ और इक बासर इस अफजल की पत्नी रजिया शेख ने स्टेट्मेंट दिया है कि अफजल उस रात को किसी अजनभी से मिलने के लिए जा रहा था उसने का सर कि उसे भी शक है कि एक्सेंट का केस नहीं है इसने मुर्डर किया उसके पती का लगता है यह वही केस है इस �
12:00आपका भी टिपन रेडिया लेजा अए रस्टों अप्डराशी को आपका शुटान ने में कुछ नहीं कुछ नहीं ख़ुदी ऑपो चलिए हाप लोग जाए आप लोग जा यह आप लुग अटा कि अ
12:12
12:14
12:17रजिया शेख अगर यही है ना जी हूँ तुम को रहा हूँ आप को रहा हूँ
12:22सर मैं रजिया का शोहर सदाक हूँ
12:29क्या वाथ है तो अफजल शेख
12:34जीब अफजल मेरे पहले शोहर थे
12:41तीन साल पहले एक्सिरेंट में उनकी मौत हो गए
12:47कुछ पता चला किसने किया था आप अब बच्चे को स्कूल छोड़ने जा रहे है अब बताएंगे भी कि क्या पता चला तरहसल एक टिप मिलिया आप अफजल का एक्सिडेंट नहीं था जैद उसका मर्ड़र था
13:02मुझे पता था मुझे पता था मैं कहती रही है मार डाला है किसी ने अफजल को उस रात हर रोज की तरह दुकान से गर लोटें खाना खाया और निकल गए
13:20किसी बडशक उस अजनभी पर जिससे अफजल उसरात मिलने गए ते शाद आप आप करते क्या है
13:37सर वो मेरी स्टेशनर की दुकान है आप दोनों कैसे मिले हम पड़ूसी थे अफजल की बहुत और मेरी बीवी फातिमा सालव होने के बाद हुम दोनों अक्यले हो गए
13:50और पिछले साल हमें शादी कर लिए एफ आयर में आपकी बेटी का भी जिखर है शबनभी तब वो दस्वी में थी अभी कहां कॉलेज गई है
14:01शबनम हमारे शादी के खिलाफ थी तो उसने घर चोड़ दिया खुद से रहती है पहने रोका था शबनम को शादा आपने भी रूखने की कोशिच की दिए शबनम ने नहीं सुनी हमारी अभी का रटी हो जीप यहीं जबलपूर में एक प्राइविट ओफिस में अकाउंट
14:31शबनम यह सब क्या है बता नहीं की आजा पर की जीए शबनम शेख अफदल शेख की बेटी कि हूच की पुछ किया है उसने तुमारे साथ नहीं ऐसा कुछ है हम सबार याभू का एकसीडेंट केस फिर से उपन कर रहे हैं
15:01हमें शक है कि उनका एक्सिर्ट नहीं हुआ था, कतल हुआ था
15:03कतल?
15:06हाँ शब्नम
15:06लेकिन इस वक्त हमें ये भी शक हो रहा है
15:09कि तुम कुछ जानती हो जो हमें बतानी रही
15:11कुछ तो छुपारीगा
15:13पुझे कुछ नहीं पता, मैं कुछ छुपानी रही हूँ
15:16मुझे बस तुनकर शॉक होगी
15:19तेकिन हमारे बताने के पहले से तुम हमें शॉक लग नहीं थी
15:21शबनम, प्लीज
15:23तुम हैंप कर सकती हैं
15:24तुम नहीं चाहोगी
15:26तुम्हारे अभू का कातिल पकड़ा जाए
15:28पताओगी नहीं किस पर शॉक है
15:30मुझे कैसे किसी पर शक हो सकता है
15:32सच में मुझे कुछ नहीं बता हूँ
15:35तेन सावल में काफी डेवल्मेंट हुई है शेक परिवाल
15:40जी सर लड़की जरूर कुछ छुपा रही है सर
15:43और ये शादब भी
15:44बोडी लेंगे से काफी नर्वास लग रहा था
15:47रजिया भी सर काफी कोशिश करी थी नॉमल रहने की
15:49लेकिन साफ दिख रहा था अंदर कुछ चल रहा है
15:51इस मुझे का तगड़ा माटिव दिख रहा है
15:53रजिया और शादब को अर्सित है फियर रहा होगा
15:56अफजल दास्ते का कांटा था
15:58इस ट्रैंगल के तीनों एंगल के डिटेल्स निकलो
16:00रजिया शादाग और वो पहला शाहर
16:03मरहूम अफजल शेट
16:04साफ
16:05तीन साल पहले हुआ एक एक्सिडेंट केस
16:07अब मर्डर केस मालूम हो रहा था
16:09जैसा कि उस वक्त रजिया को लग रहा था
16:11लेकिन उस वक्त नियाय की गुहार लगाने वाली पीड़ित की पत्नी इस वक्त संदिक्द मालूम हो रही थी
16:17अब सवाल यह उठ रहा था कि क्या घर की दीवारों में दीमक काफी पहले से लगी हुई थी
16:21और किसी अपने ने ही अफजल के खिलाफ अपने दिल में बेर पाल रखा था
16:26सर आवासमा जया ख़बर आपका शक सही निकला सर रजिया और शादाब का अफ़ेर अफजल की मौत के काफी पहले से चल रहा था
16:33अफजल के जाने के बाद ही इनका निकाह हुआ लेकिन उसके पहले शादाब की पहली बेगम फातिमा ने तलाग दे दिया शादाब को तभी खिल टुक गई थी
16:42अभी कहा है फातिमा वो अपने जबलपूर की नहीं थी वो तो लौट दे अपने माई के शादाब की पहली बीवी फातिमा को ट्रेस कर लिया है बुलाया उसे है
16:52सर मैं अफजल शेक के दुकान पर गया था अब वो दुकान उसका कारीगर चलाता है मंगेश
16:57साभी दुकान अफजल भाई की खुद की नहीं थी उन्होंने एक सेट से लीस पर ली थी अब मैं पहले से उनके नीचे काम कर रहा है
17:03लेकिन उनके जाने के बाद रजिय भावी को दुकान नहीं चलाने थी तो उनसे मैंने ले ली
17:07अफजल शेके काफी करीब रहा होगे तो मंगेश उसकी किसी के साथ कोई दुश्मनी थी क्या
17:11साभ दुश्मनी करने वा निभाने के लिए पुरसद भी तो लगती है ना
17:14और अफजल भाई तो हमेशे से अपने काम में मघन रहते थे और जो भी वक्त मिलता वो अपने बच्चों के साथ बिताते
17:19इस बात की पूरी संभाव ना है कि अफजल का मर्डर हुआ है कुछ तो हुआ होगा पता होता कुछ तो तीन साल से चुपनी बैठता साथ
17:26क्या कि अफजल के दिल में बच्काण� ने हैं बच्चों के मांगे लिए नहीं है
17:35लोयत अउक्ति सब्साइब है साम और वाल्यों को कहना है उन्होंने अफजल उरीया की पिच कभी को जगड़ा होते नीं देगा ना कभी सुना
17:41सारे जगड़े चीख-चीख के कहां आते हैं, वार खामोशी से भी किया जाता है, मुझे लगता है अफदल और रजिया के रिष्टे को समझने के लिए हमें पहले शादाब और इसकी बीवी फातिमा को समझना जरूरी है, बलवाओ तेनों को
17:52जब तक हम बच्चे के लिए कोशिश कर रहे थे, शादा पुछ से बहुत प्यार करता थे, लेकिन जैसे जैसे डॉक्टर जवाब देते गए,
18:23जब शादा बदल गया, कैं यू कहिये कि उसने अपने असली चहरा दिखाना शेरू करति यह डॉक्तर ने इन दौरव ले श्पेशियलिस्ट का नंबर दिय है, इस डॉक्टर का नाम भी पहले बाले दॉक्टर ना उस डॉक्ठर का नाम भी किसीन civic eh नहीं दिया
18:42सबी दूसरे डॉक्टर का नाम ही देना है और हम पानी के तरा पैसा बहार है लेकिन हमको बच्चा को नहीं देना है
18:47अल्ला ना करे अभी अभी अभी हमारी हुमरी क्या है हाँ आप ऐसे उम्मेद मत कोई है हम और एक बार कोशिश करेंगे नहीं
18:56आज के बाद इसकर में बच्चे का जिकर तक में एक बार और कोशिश कर हार का मुझ नहीं देखना चाहता हुआ खुदा के वास्ते मुझे थोड़ा सुकून देता बस एक तो बच्चा नहीं होने का टेंशन था और दूसरी तरफ मेरा बिजनेस भी डाउन था काफी डाउन �
19:26पाथिमा तुम मेरे घर जाओ और शबनम का हमबग चेक करो मुझे शादाब से जरूरी बात करने हैं तो क्या क्या कहना आपको इन दौर के डॉक्टर से एक पर बात जूने कर लेते तो शादाब देखे पाथिमा कितनी कोशिश ने कर रहे हैं अगर अल्ला में आप पैसला
19:56दूनिया इधर के उधर हो जाए लेकिन आतिमा मानी बन पाइए या अल्ला तुम नहीं यह बात यह बात यह बात फातिमा को बता ही है बता ही है खुमा फिडा कर अगर अगर अगर अगर वह कुद को मेरी गुनेगार सब्जेंगे
20:26सब्सक्राइब करता है ताकि मुझ से कुछ उमीद न रखे क्योंकि आप कोई दवा पाटीमा को मा बना नहीं सकती है मैं कभी आप नहीं बढ़ाऊंगा यह यह दर्द जलाद दिन खाथा है इससे का हूँ है
20:53क्या करूँ मैं
20:55रोहिए मैं
20:57रोहिए मैं
20:59चुपो जाइए
21:01उस दिन हमारे बीच एक एक गड़ी एक दोर गंद गए दोस्ती और हम दर्दी के परे उसके बाद क्या हुआ हम मिलने लगे पहले पहले बहुले के बाहर और तुम्हें बना कब लगी
21:29कर तुम्हें बना कब लगी
21:31कभी नहीं
21:33मैं तो रजिया को पनी आपा समझती थी
21:35पकड़े कैसे दे
21:37अफजल ने
21:39हमें रगी हाथ पकड़ लिए
21:41अफजल
21:43आपाज
21:45यल्दी आगए
21:47आपाज
21:49यल्दी आगए
21:51अफजल
21:53अफजल
21:55आपाज जल्दी आगए
21:57देर हो गए
21:59लेकिन तुम कहां से कहां पहुंच के रजिया
22:03अफजल
22:05अफजल
22:07अफजल
22:09आपाज जल्दी आगए
22:11देर हो गए
22:13तुम कहां से कहां पहुंच के रजिया
22:15अफजल आप
22:17अफजल आप
22:19क्याप बोल रहे हैं
22:21मेरी कुछ समझ के नहीं
22:23शादा को कॉन विला
22:25और पुलाओ से
22:27आदा कॉन लेकिन क्यू
22:29क्यों
22:31रजिया ये सवाल अपने आप से पूछो
22:33क्यों शादा आपको फोन कर
22:35और पुलाओ से हाँ
22:41ये कब हुआ
22:43क्यू हुआ कहां हुआ कैसे कैसे हुआ
22:45कुछ नहीं जानना मुझे
22:47बस तुम दोनो पान खोल कर सुनो
22:49आज के बात
22:51अजब नहीं
22:52ये कानी अभी इसी वक्ता हो जानी चाहिए
22:55अंदर बच्चे हैं मेरे
22:57बड़े हो रहे हैं
22:59अगर उन्हें कुछ पता चल गया
23:01या किसी ने कुछ पता दिया ना
23:03तो कसम को उदा कि
23:05ठीक नहीं होगा
23:07तुम दोनों ने अपना रिष्टा तो तोड़ा नहीं
23:13और अवजल को मार दिया
23:15साब
23:17शादावर मुझे पता था
23:19आप यही सोचे के
23:21साब यकीन करे या ना करे
23:25मैं अवजल को कभी दोका नहीं देना चाहती थी
23:27ये डायलोग हफते में कम से कम
23:29दो बार तो हम सुनते हैं राजी है
23:31कतल का प्लान कैसे बनाया वो बताओ
23:33साब कोई प्लान नहीं बना
23:35अवजल ने मुझे घर में बंद करके रखा थी
23:39एक तरीके से ये मेरी लिए अच्छा ही था
23:43मैंने शादाव से पुरी तरह बातचीत बंद कर दी
23:45शादाव ने भी कोई कोशिश नहीं कि अवजल के हमें अकड़ लेने के पाथ
23:51मैंने वो शादाव ने पुसरे के तरफ बुड़कर भी नहीं देखा
23:53एक बार अवजल तमारी नजरों के सामने से इस दुनिया से दूर क्या हुआ
23:59तो में रजिया फिर से पास आ गए एक हो गए हम एक जरूर हुए सर पर अवजल को मार कर नहीं
24:05मैं भर आप अवजल जैसे अच्छे इंसान का खतल क्यूं करता है वो बहुत ही अच्छा इंसान था से और आप ही बताइए
24:12कौन आदमी अपनी बीवी और पडूसी की ऐसी हरकत बरदास करता है उसने इना सिर्फ खुद की और अपने घर की इज़त का सोचा बलकि उसने मेरे खांदान के इज़त का भी सोचा
24:20इसलिए सब ने दिल में उसके लिए बड़ी इज़त है
24:24अफजल के इंतकाल को एक हफ़ता भी नहीं हुआ कि रजी और शादब का फैर फिर से शुरू हो कि और इस बार मैंने दोनों को रंगे हाथों पाना उसी दिन में अपने माई की चली गए और हम दोनों का तलाग हो गया तुम्हें लगता है कि शादब ने अफजल को मरवाय
24:54अफजल शादाब और रज्या के बारे में पुलिस ने हर मुम्किन हर चोटी से चोटी जानकारी हासिल पर कहीं भी वो कड़ी नहीं मिल पा रही थी जो शादाब और रज्या को अफजल के कतो टो एक खबरी के टिपसे एक अंसुल जे एक्सिदेंट केस को फिर से खूला ग
25:24तो कि यह में कि अच्छी कि अच्छी कि अच्छी का यारे आप लुग कॉए अ कि यारे अ पुले स्देशन मैंने किया क्या आए जालो स अंदर
25:52साथ एक बार तो बताईए कि मैंटर क्या है मैंटर मुर्डर कर तीन साल पहले हुए जबलपूर बाइपास रोड़ पर गारी से कोचिल का माड़ा अब मारा तुम्हारे दोस्ति जो एक मेना पहले मस्तानी बार में डिंगे हां करा नाम बोल उसका बोल खामोश रहेगा तो ख
26:22तर बादूर नगर में तो शादब की स्टेशनरी की दुखाने यह दर्मेंदर का अफजल किस परिकस ने दी आ कसम ठाके कह रहा हूं मुझे कुछ नहीं मालूं धर्मेंदर मुझे आके कुछ नहीं बताया था दर्मेंदर इस वक कहा होगा घर पर होगा सब वोन में लास औ
26:52मैं सोच रहा था आप से आकर मिल लूँ हालो दर्मेंदर भाई हां सुन रहा हूं आजा मैं घर पर हुँ हूँ
27:04यहाँ जी अब अच्छे ने कितने परेशन लग रहे हैं
27:22कौन है आप लोगर ऐसे कैसे क्रेम रांच परमेंदर को बलाप प्रांथ दैस मिनिटें वो बाहर गये बोले रादबर गरनी याएंगे
27:37क्या हुआ उनों ने अगर टीन साल पहलों से कादबीका मुश्चिया कर दा तो तुम पीजले सीधे हमें पन करके बताऊ की तर्मेंदर अंडर निए यसी वापको गॉंटायड कर नहीं इस नमर पर आफ हमें पोन करके बता दीजे
27:52यह दर्मेंदर का फोटो करेंगा तर्विलेंस पाड़ने के पूरी कोश्चिकर एगा हम उसे भागने हैं दे सकते हैं शेयर की हर जगा सील करवाद हो
27:58की सारे थाने एपोर्ट और बस्टान पर हाय अलर्ट की रिक्वेस्ट भीच भीच देख देख देख देख देख धिए अब सर्विलेंस पाड़ने का फोटो कर दो कॉल कोट शेख दालबाए लगता है पुलिस और यह अवजल का केस फिर से खोल रहे हैं या उज्जा केस पत
28:28पांच लाक रुपए मेरे मुँ में ठूसो नहीं तो मेरा मुझ पुलिस वाले के सामने खुल जाएगा पक्वास मत करें तूर पैसे का पिंजाम करी और अगर नहीं हुआ ना तो पुलिस वाले के पास जाके मैं सब कुछ बूल दूगा
28:58अलो खलील बोल रहा हूँ आ क्या हो रहा खलील पुलीस अफ़ल का केस जुबारा कुल वा रही है धरमेंदर को उठाने के लिए उसके घर गई थी लेकिन वो बचके निकल गया यह कब हुआ और पुलिस वालों को धर्बेन के बारे हुँं कैसे पता चला यह कुछ नहीं प
29:28तुम्हें पता है के क्या करना है और धरमेंद को कहो कि अंडर ग्राउंड रहे जबता कुसे कहाना जाये बाहर ना लेकिन समझे
29:34सर, सर कॉल कोर्स के एसाब से इस धरमेंदर की फोन पर सबसे ज़्यादा बात है खलील इब्राइम के साथ हुए यह खलील ट्रेवल एजेंस से कमाले के है तुम्हें तुम्हें सर, आप अंगच, यह धरमेंदर जो एक चाय की टप्री पर काफी बैटता है और यह टप्री �
30:04अपका होगा, उठाए शाद आपको लगता है इस केस की सही क्लोजर रिपोर्ट बनाने का वक्त आ गया
30:10छे सल धरमेंदर मेरे अंग ड्राइवर था, फिर उसने दो साल पहले लोन से टेक्सी खरी दी, मेरी नौकरी छोड़ दी और अभी खुद का बिजनस चलाता है
30:19तो फिर वो तुम्हें बार-बार फोन क्यों लगाता रहता है? वो इसलिए कि वो अपना लोन नहीं चुका पा रहाता है
30:24उसे अपनी नौकरी वापस चीए? उससे ऐसी हजार वापस चाहिए थे
30:27जी? अफजल के माड़र के सुपारी कैसी हजार? बैलेंस
30:31कौन अफजल? क्यासा कतल? कौन सी सुपारी? और सर्ण ये सब आप मुझे क्यों बोल रहे हैं?
30:37सुपारी तुमने दी थी खलीज तुमने कहा दरमेंदर ने दो साल पहले नौकरी छोड़ दी थी
30:41अफजल का माड़ हुआ तीन साल पहली उस वक्त दरमेंदर तुम्हारी एजनसी में नौकरी करता था
30:45तब उसके पास गुद की गाड़ी भी नहीं थी
30:47उस हिसाफ से तो मर्डर में यूस कीगी गाड़ी तुम्हारी रही होगी
30:51नहीं नहीं मेडम ये ये साही नहीं है यही साही है और दरमेंदर तुम्हें बार-बार फोन उस बैलंस से सेजर के लिए करता था
30:58सर मुझे लगता है आप मुझे कोई और समझा ये अफ़ल कौन है मैं सच में इसे नहीं जानता
31:04देखिए आपने जो जो सवाल के मैंने उसका सही सही इमानदारी से जवाब देखिए अब इसके आगे मैं कुछ नहीं कहना चाहता
31:12तब अस इतना कहूंगा कि आप लोग मुझे पर बेवगुनियात इल्जाम लगा रहे हैं
31:16देखिए जाओ जाओ जाओ जाओ जाओ खलेल याद रखना कि घरमेंदर घर से भागा तुम नहीं भाग पाऊगे
31:32मैं चाय तक नहीं पीता साब मुझे कैसे पता कि चाय की टपरी पे कौन धरमेंदर आता है
31:44इस आदमी ने अफजल को अपनी गाड़ी के नीचे को चल दिया
31:47इस आदमी को मैंने अपने दुकान के आसपास देखा था चाय की टपरी पर जैसा आप बोल रहे हैं ना साब
32:02को को लिए को इसाब से दर्मेंदर शादा वर रजया की बीच वह फोन कनेक्शन नहीं इक वह बने जाए शाइद आप सज बोल रहे है
32:09अधा काल रिकार्स खाल इसका शादा अवर जी हव्ज़ इसके साथ दी कोई कॉंटक मेंड़ा है
32:15तो फिस दर्मेंदर को सुपारी किसमें दियो तो पर सुपारी तो दी गई है दर्मेंदर घर से भागा है और इसमें जुट बोलने की इंबत नहीं करेगी
32:22जब उसकी पड़ोसी से बात हो रही थी तो वह बोली सरुनी गाउं को बिलॉंग करता है
32:30पुरी फैमिली वहीं रची थी आठ साल पहले शिक्तों है इस दर्मेंदर के लिए तलास जारी है
32:34अमिश्या एक टीम लेकर सुरुनी गाउंजा देखे हैं यह अफजल शेकी मौत के फिराद है पिर गाउं में तनी किते हैं
32:45श्यादा मुछ से रहा नहीं जा रहा है उच्छे आपसे कुछ पूछना है
32:54क्या पूछना है
32:58क्या आपने अफजल को मरवाया है
33:01क्या तुम्हें वाकिये में से लगता है कि अफजल का कतल मैंने कर लाए
33:07मेरे आखों में आखें डालकर अपना सवाल पुछो रजी
33:11मेरी तरफ देखो
33:14क्या यह आँखें खुनी की लगती है
33:17अफजल की खुनी की
33:19मैंने किसी को सुपारिफ बाली नहीं थी रजी
33:22तक्दीर का लिखा जो होना था बस वो होता गया
33:25मेरे ब्यात का यकिन का
33:35यह जमीन जिसमें मैं खेती कर रहा हूं यह दरसल अफजल भाई की ही है
33:39पिछले पांच सालों से मैं ही इस जमीन पर खेती कर रहा हूं
33:41लेकिन उन्होंने खुश से मुझे कभी भी किराया जाना से बारे मैं नहीं पूचा
33:44अल्ला के बंदे थे हूं बहुत नेक
33:46अच्छा अफजल की गाउं में किसी के साथ को दुश्मनी है
33:48इस जमीन को लेकर या किसी और मसले को लेकर या पापददों वाली दुश्मनी है
33:53मैंनो तो उन्हें कभी उची आबाद में बात करते वे भी नहीं देखा
33:56अच्छे इस गाउं में अफजल का कोई दोस्त है कि है कोई खास
33:59जी हां
34:00माजीद
34:01माजीद
34:02बाबी आपको कभी भी किसी चीज़ को जरूरत हो
34:04तो मुझे फोन कीजिएगा
34:07कहां मिलेगा इस वक्त
34:08माजीद पाल्टी के रफ्तर में होगा
34:10केशो
34:11क्या यह
34:12कि जैन कितनी गलब है
34:20सुने
34:21जी कहिए
34:22माजीद से दिकिए
34:23हम एही हो
34:24आपको
34:25अफजल जैसा दोस्त नहीं था
34:27बहुत याद आती है सर
34:28साथी पढ़ाई की
34:29साथी बड़े हुए था
34:30यहां गाउं में अफजल का कैसी के साथ कोई जगड़ा
34:32कोई परानी दुश्मनी
34:34सर अभी तक तो आपको गाउं वालों से मालूम पढ़ी गया हो गई
34:36मेरा दोस्त बहुत शरीफ बंदा था
34:39लेकिन जबलपूर में कुछ हुआ हो तू और मुझे नहीं पता
34:42रजिया के बारे मैं जानते हो तू
34:43अब तल की मौत के बाद मैंने रजिया भावी को फोन किया था
34:46अलो
34:47असलाम अलेकों
34:48बालेकुम सलाम
34:49आप कॉन बोल रहे हैं
34:50जी मैं सदा बोल रहा हूं
34:52यह नमबर तो रजिया भावी कहा ना
34:53जी हां मैं रजिया के साहथ
34:55वो
34:56रजिया भावी ने शादी कर ली
34:58मैं आपको बाद में फोन करता हूं
35:00बस मलाल इस बाद का है
35:02कि ये फोन रजिया भावी के तरब से नहीं आया, पर ठीक है, अल्ला की यही मर्जी, चलो इसी बहाने का मुझे कम श्रबनम अर्मान को बाप का साया तो मिला थे, लेकिन बेटी श्रबनम रजिया और शादब के साथ नहीं रहा थी, इस बारे में तो मुझे मालू में नहीं,
35:32उसने कभी मुझे अपना नहीं मान, पर मेरे लिए वो आज भी दोस्त रहे थी, इस केस की इन्वेस्टिकेशन अभी अपनी मंजल से काफी दूर थी, अलाकि पुलिस जानती थी कि अफजल का कतल किस ने किया था, लेकिन वो ये जानने में अब तक नाकाम रही थी कि अफ�
36:02मचने वाली थी, या फिर कोई सुराग, पुलिस तक, शर्मम अच्छा किया जो तुम खुद अपना बेयान लेकाने के लिए, यकीन मान, छोटी थी छोटी जानकारी भी तुमारे अब्बू के कातलों को पकड़ने में हमारी पहुर मरत करें, अब्बू ने अम्मी और शा�
36:32अब्बू को ऐसे रोते हुए मैंने कभी नहीं देखा था, वो इतना प्यार करते थे अम्मी से, और अम्मी ने क्या किया, पहले अफैर, फिर अब्बू के मौत के बाद, शाद आप से शादी, अम्मी और शाद आपको खुश देखा,
37:02और उनके खुशी मुझसे देखी नहीं जाती थी, क्यूंकि मुझे लगता है, उन्होंने ही अब्बू को अटा है अपने रस्ते से, तुम्हें लगता है कि, मैं यकिन के साथ तो नहीं कह सकती, ये मेरी सोच है, लेकिन अब्बू की मौत की सच्छा है, मैं नहीं जानती,
37:32पर आले बोल, सुपारी किसने दी, मेरे मालिक हलील इबराहिम ले, अफदल शेक नाम इसको, गाड़ी से उडाना, एक्सिडेंट लगना चाहिए, एडवांस बीस हजर, बाकी के असी हजर काम अनके देखी,
38:02मैं उससे मिलने, वह उसके दुकान पर गया था, दर्जी के दुकान पर, मंगेश, दुकान सवालना में खाना का कि आता हूँ, अफदल भई, अब सलाव, सलाव, सलाव, माप कीजिए मैंने आपको बचाना नहीं, जी दरसल मेरा नाम बाला है, आपकी कारी-गरी की बहुत �
38:32मैं बैट के बाद करेंगे, भाई सब क्या है कि वो मैं भी खाना खाने घर जा रहा है, उसके बाद एक अरजन डेवरी है, शाम को मिले, शाम को तु मेरे चार छे मिटिंस हैं, लेट हो जाएगा, अंधेर, आत को दस मुझे मिलें गया, आत को दस मुझे बोट लेट ही हो ज
39:02आत को दस में अरत का आत को तेरा सेट खलील, अब ज़ल को क्यों बना चाहता था, उसकी अफजल से क्या दुश्मनी था?
39:30मुझे उसने कभी कुछ नहीं बताया, सर.
39:34मेरी अफदल से कोई दुश्मन ही नी थी.
39:36मैं तो उसे जानता भी नी था, सर.
39:40अपर अफदल को जानता नहीं था.
39:41तो मरवाया कहा, सर?
39:42मैं नहीं चाहता था, सर.
39:44ये कांड मुझे करवाया गया.
39:45मैं किसी ओने सुपा रही थी?
39:49नाम.
39:50नाम मौन!
39:52मेरे दोस्ते.
39:54कौन दोस्त?
39:55एक छोटे लवल का पॉलिटेशन है, सरो नी गांगा.
40:00मुझे से देगे.
40:13अब चल मेरा सबसे अच्छा दोस्त.
40:15शायद एक लाओ था.
40:17लंगोठी आया थे, सर.
40:19हम सब कुछ साथ में करते थे.
40:21हमने गाव में किराने की दुकान भी खोली.
40:23हमारा धंदा चल निकला.
40:25अब जल एक दिन बोला कि वो जबनेगी में कुछ पला करना चाहता है.
40:27तो 2011 में वो जबलपूर खली चला गया पार्टनर्शिक तोड़के.
40:31बिजनेस टूटा.
40:33लेकिन हमारी दोस्ती फिर भी कायम थी, सर.
40:35गावाले मिसाले दिया करते थे हमारी दोस्ती की.
40:37जबलपूर जाने के बाद भी हम लोग टच्मी तो थे.
40:39लेकिन पहले जैसे नहीं.
40:43वाकई अफजल मेरी हमाद था, सर.
40:44अगर अफजल तुमारी हमाद था, तो उसे मरवाया कि.
40:48रजे ने कहा था, तो उसे मरवाने कि.
40:51नहीं.
40:52लेक्शन है.
40:55चोक लग रहा तुझे.
40:56तो राजबीर सिंजी के खिलाब पंचेया तो चुना लग जाता है.
40:59पूरा गाउं राजबीर जी को वोट करेगा.
41:01तेरे अम्मी अब्बू, मेरे अम्मी अब्बू, सभी.
41:03मतलब तुझे सिर्फ एक वोट मिलेगा.
41:05वो भी तेरा.
41:05मतलब तेरा भी वोट नहीं मिलेगा मुझे.
41:08यह दोस्ती तेरे.
41:09अरे यार, तु देख ड्रामा कर रहा है खामका.
41:11अबसल, क्या जिन्दिगी में तुझे सिर्फ आगे बढ़ सकता है?
41:14मैंने, देखना, इस पूरे इलाके मेरे नाम का डंका बजेगा.
41:18इस करके दिखाऊंगा, यार.
41:20आँ, मैं दिखा लेना, यार.
41:21मैं पेल पर चाणने कोशिच कर रहा हूँ.
41:23तु डाली पकड़े गया, तो मैं गिरूँगा नहीं.
41:25देख माजिद, यार, मुझे इन सम्में मत कसीठ.
41:29और तुम एलेक्शन हाल गया.
41:30इसर, मुझे एलेक्शन हाने का कोई गम नहीं.
41:33लेकिन कुछ ऐसा हुआ, जिससे मेरा फ्यूज उलगे है.
41:37और माजिद, काम खा में दामात के वैसे भी जब्त करवा दी.
41:40और मैंने कहा था, कोई वोट करने वाला नहीं.
41:42यहां तरके मेरे करवालों ने भी राजिव जी को वोट दिया है.
41:44छोड़ना यारवा तुमैं अगली बार जीत जाओ.
41:47लेकिन ये बताबे कि तूने वोट दिया कि नहीं?
41:50लेकिन सही बताओं तो नहीं दिया.
41:54क्यों? तो नहीं दिया?
41:56यार बुरा मत मानना.
41:56पुरानी का हावत है.
42:00किसी गदे को अगर नदी किनारे छोड़ दिया जाए,
42:02तो पानी तो खुद की लेगे.
42:05लेकिन तभी घुडा निगूँ.
42:08खंजर रिक तरह चुप गए थी अपजल की बात मेरे दिल में.
42:10मेरे लिए इतना बायर, ये बात अठक गए थी मेरे जहन में.
42:14मैं इतना गुस्टा, इतनी नफरत कीज़स नहीं की थी.
42:17जितना मैं अपजल से करने लगा था.
42:20मुझे बदला चाहिए था सर.
42:21ये बदला तुमने एक लाख में खरीदा, पलील से.
42:24इसे पीस हजार में दिल वाया, धरमेंदर से.
42:28माजिद, जो दोस्त मुपर सच बोल दे, इसके दिल में बैर नहीं है.
42:32बैर अपजल के दिल में नहीं था.
42:35बैर तुमने पाल लगा थ, अपने दिल में.
42:37अपजल के लिए.
42:38माजिद सिद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्�
43:08ख़वरी पंकच को खास इजद बख्षी गई कि उसकी एक ब्लाइंड टिप के आधार पर पुलिस एक ऐसा केस क्रैक कर पाई जो तीन साल पहले अंसुलजा करार दे दिया गया था और उसकी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी गई थी
43:21खून का रिष्टा हो या फिर दोस्ती का सामने वाले के जजबात और पतिक्रिया को नजर अंदास करना महंगा पड़ सकता है

Recommended