- 17 hours ago
#admd#india#crimefiles
Category
🎥
Short filmTranscript
00:00अर्वान, बोला थाना टीवी बंद करो, आपा पढ़ रही हैं ना?
00:18जो कि केवल विष अमरत के पहाड से ही प्राप्त किया जासे हैं
00:22लेकिन रादी परी, हम तो विष्क अमरत ले आये थे पहाड से
00:28अर्मान, भी बंद करो
00:30अबब बीज थोड़ी दे रहाँ
00:32आप देखरें ना?
00:34अबब बढ़ रही है अभी, चलो, परण बंद करो
00:37साबाश
00:38शबन, बिटाए अजाम करें अपकी?
00:41अच्छे गाईबू
00:42अब लिए ना?
00:43ने अब बुकल साइंस, ये लिए
00:45लगं, बुब बन लगाए करना
00:47सुनी आप कपड़े बदल लीजे, मैं खाना लगा देख
00:51अब लगं अपको अब चाना अब लगा दो, मुझे किसी गाम से बाद जा आथ
00:56आप यहाँ, किसी मिलने जाना है?
00:59किसी मिलने जाना है?
01:00अशनु जानता ने आजना भी है, कुछ कामदन दे की बाद करना चाहता है
01:06सुनी
01:08तेर नत पीजाए
01:10अलाः आफिस
01:11किसी को पता नहीं था कि ये आखरी बार था जो अफसल अपने खर से निकल दा था
01:41कि अब कि अब कि अब कि अब कि मैं सोने जा रही हूं सुपह पांच बजे का अला अरम लगा रही हूं अगर मेरी आख न खुले ना तो आप उठा दे
02:06कि मैं अब अब हो अब में आख अब कर लेंगे अब अब इतना परेशान मत दो
02:26हलो पुलिस मैं ओफिस से आ रहा था मैं रास्ते में देखा कि अचानक एक आदमी पढ़ा हुआ है
02:42मैं उसके सामने गया मैं देखा कि वो मारा पढ़ा था मुझे कुछ समझ में नहीं आया और मैंने पुलिस को कॉल किया
02:48साव, हमने बट्वा चेक किया, लेकिन इसमें कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे इसकी पहचान हो सकता है, जी, फोन लोग्ड है, अगर कॉलर ने फिर से फोन किया, तो पता चले गए या आदमी कौन है,
03:04शेपन, शेपना मूठ पढ़ने, पढ़ने पट्चा अब को आगया है,
03:23नहीं यहीं?
03:34साहब कोई रजी है
03:36हालो अफसल, कहा है या
03:44मैं रात से फोन ट्राइ कर रहे हूं, और फोन ही नहीं उठा रहे हूं
03:46मैं पुलिस सब इस्प्रेक्टर संतोष बोलनों मिलन लगर थाने से
03:49पुलिस
03:51यह यह अफसल कहा है
03:54आपकी पती के अक्सिडेंट हो गया, बस आप होस्पिटल आजाए जाए
03:57क्या
04:12अफसल
04:14मेरी शोहर अफसल टेलर थे, अपनी दुकान है उथी
04:29अपके शोहर जवर्पुर वाइपास रोट पर क्या कर रहे थे?
04:31मुझे नहीं पता साव
04:33कर शाम में अफसल कर रहे
04:37काना खाया और फिर बात चले गए
04:42पस इतना ही कागी
04:44अज़ी आनता नहीं
04:45अजनभी है
04:46कुछ काम दंदे की बात करना चाहता है
04:48हमने अभी ही टन रंका क्रेश रेस्टर किया है
04:50ये कुछ समान है उनका
04:52जो उनकी बोड़ी से भाए
04:57इनना लिल्लाह वा इनना इलेह राजिवा
05:00अभाए
05:02अभाए
05:12अभाए
05:14अभाए
05:24अभाए
05:26अभाए
05:28अभाए
05:30आपको कभी भी किसी चीज़ को जरूरत
05:32हो
05:34तो मुझे फौन केजिए
05:36हुए
05:38किसके दिल में क्या है कौन अपने दिल में आपके लिए बैर रखे हुए है यह कोई नहीं कह सकता एक रात में परिवार जड़ गया एक रोड एक्सिडेंट में अफजल शेख की on the spot मौत हो गई लेकिन उसकी बीवी रजिया शेख को ये शक था कि उसे मारा गया है यह सिर्फ
06:08पर किसी ने कुछ देखा नहीं कुछ बताया नहीं आपका कहना है वो अजनभी था पहली बार मिलना आपके पती के कोल लिकॉर्ट में भी कुछ नहीं मिलना तो भला अजनभी ऐसा क्यूं करेंगा साफ यह आप वता लगाई है मेरी पती की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थ
06:38ज़रा सोचे इस बारे में कतलना से एक्सिजन तो है और मैं चालती हूं कि यह जिस किसी ने भी किया है उसे कड़ी से कड़ी से जा मिले है
07:08अपने पर कहर तूटने के बावजूद रजिया में एक जुनून था कि अफजल का गुनेगार पकला जाए और उसे सजा हो पर पुलिस इंवेस्टिगेशन टीम मुझरिम के बारे में कुछ भी पता नहीं कर पाई थी
07:22लेकिन रजिया ने हार नहीं मानी पूरे छे महीने वो पुलिस स्टेशन के चक्कर काटती रही दलीले करती रही और फिर एक दिन
07:32साब साब वो अफसल के नहीं मिलना वो आदमी जिसने आपके पती का एक्सिडेंट इसका मतलब अफसल को और मुझको किसी को भी इंसाफ नहीं मिलेगा आपसे गुजारिश है आप हमारो और अपना पक्त जाया ना करें केस क्लोज कर दिया हम नहीं
07:49अनसुल जे करार देकर कई केसिस क्लोज किये जाते हैं ऐसे केसिस सिर्फ आंकड़े बनकर रह जाते हैं लेकिन क्या आक्रोश क्लोज किया जा सकता है रजिया के मन में एक आक्रोश था एक अधूरा पन था है कम से कम रजिया से तो आगे बढ़ना नहीं हो पा रहा और फिर
08:19तिन होगा लेकिन अपना विराड किसे अलग मिट्टी का बना हुआ है दोजार सोले में किया था कांड
08:26नहीं अपना जबलपूर बाइपास
08:30तुने सच में किसी को ओड़ा कर मार डाला क्या कर रहा है भाई दीरे बोल लेकिन तु इसे कैसे किसी हजनभी को प्रवचन मत थे उने सोपारी एक लाख रुपए की बात हुई थी
08:47कि अले ने पीस हजार दिया अस्ति अजार अबी बाकिया उसके पास उतना मूमत खोल देना किसी के सामने साले समझा नहीं या मुझे क्या करना
08:58पंकल भाई अरे यह बबुए जाए रहा अरे बबुए पंडी शुरू हुए आपको तूपी पंकल भाई
09:11नाला यह दो लोग बहार गए देखा तो ने जानता है यह जानने लगा
09:22यह इंफर्मेशन कितने सही है खबरी एकान कभी धोखा नहीं देते साब को बंदा पक्का सुपारी की बात करता है तोने अगे कुछ की उस बंदे को ढूनने की कोशिश को कियाना साब पुरा हाफ्ता रोज चील की तरह ठेके पर नजे रखी मैंने लेकिन और दोनों बंदे �
09:52कण नहीं अपना काम नहीं अ काम करें लाला मैं नमबर ले और दोने यहां दो बारा देखे न उनकी फोटो करेंज उनका डीटेल निकाल और मुझे पता लाला ने भी ताक विपने कि नहीं किया सर्ण उसका चाट इसके बैट का च्छ बंदा देख जो बंदा डिंगा रा�
10:22जबलपूर बाइपास के पास 2016 में हम तब के केसिस भंगा लेंगे एकन पंका जी तुने जिनकी बाते सुनी उन्हें धूना जारी रहा है जी साफ
10:30कि अधिल जार गूम रहा है मतलब केस अंतुल जा रहा होगा को अधिल रिपोर्ट फाइल होगा एक काम करो तोम और आसमा दोजार सोला में जबलपूर बाइपास रोड जितने भी एक्सिंट केसिस होएं सब की फाइल मंगा
10:44खबरी द्वारा दी गई इस टिप ने एक खोज की शुरुवात की उस अंसुलचे एक्सिरेंट केस फाइल की खोज जिसकी क्लोजर रिपोर्ट पीन साल पहले ही फाइल हो चुकी थी परहाल नियती इस केस को दुबारा खोलने पर तो ली थी
11:12पंगश की टिप से मैच होते हुए दो केसे मेले हैं पहला केस एक अग्यात औरत का है वो जबलबुर बाइबास रोड के पास मर्यों ही मिली थी लेकिन उसके पैचान हो पाई दूसरी केस में पैचान हो पाई सर कोई अफजर शेक था टू वीलर पर हिट अन्यान का केस अ�
11:42किस ने मुर्डर किया उसके पती का लगता है वही केस इस तरह यह शेक को ट्रेस करो अर्वान रूख टिपन रख में अब लेट हो रहा है हाँ बेटा आया है चलो सुनिया आपका भी टिपन रेडिया लेजा है हाँ अधर सुनो अब बढ़ार से पितान ने ने ने कुछ न
12:12रजिया शेख अगर यही है ना जी हम तुम को रहा है आप को लेजिए
12:22सर मैं रजिया का शोहर सदक है क्या वाट है तो अफजल शेख
12:34जीब अफजल मेरे पहले शोहर थे
12:41तीन साल पहले एक्सिरेंट में उनकी मौत हो गए
12:45कुछ पता चले किसने किया था आप बच्चे को स्कूल छोड़ने जा रहे हैं
12:52आप बताएंगे भी कि क्या पता चला तर असल एक टिप मिलिया आप अफजल का एक्सिरेंट नहीं था जाद उसका मर्डर था
13:02मुझे पता था मुझे पता था मैं कहती रहें मार डाला है किसी ने अफजल को उस रात हर रोज की तरह दुकान से गर लोटें खाना खाया और निकल गए
13:20किसी पडशक उस अजनभी पर जिससे अफजल उस्रात मिलने गए थी
13:35शाद आप आप करते क्या है सर वो मेरी स्टेशनर की दुकान है आप दोनों कैसे मिले हम पड़ूसी थी अफजल की बहुत और मेरी बीवी फातिमा सालव होने के बाद हुम दोनों अकेले हो गए
13:50आप पिछले साल हमें शादी कर लिए एफायर में आपकी बेटी का भी जिखर है शबनभी तब वो दस्वी में थी अभी का कॉलेज गई है शबनम हमारे शादी के खिलाफ थी तो उसने घर चोड़ दिया खुद से रहती है एने रोका था शबनम को शदा आपने भी कोशि�
14:20मैं करें का अच्छा फुरका अड्रेस एड्रेस का मॉबाइल नम्बर लेकार शबनम का इडरेस आपजा अच्छागर, शबनम का इडरेस, अफिस अड्रेस, उसका मोबाइल नम्बर लेके जांए
14:32शबनम, यह सब क्या है?
14:35बताने ही लाजी
14:37जी
14:48शबनमशेख, अफजल शेख की बेटी
14:51मुझे वो शादा पसे थी
14:53क्यों?
14:55कुछ किया है उसने तुमारे साथ?
14:56नहीं, ऐसा कुछ नहीं है
14:58हम सबारी अभू का एक्सिडेंट केस फिर से ओपन कर रहे हैं
15:01हमें शक है कि उनका एक्सिडेंट नहीं हुआ था
15:02कतल हुआ था
15:03कतल?
15:06हाँ शबनमशेख, लेकिन इस वक्त हमें ये भी शक हो रहा है
15:09कि तुम कुछ जानती हो जो हमें बतानी रही
15:11कुछ तो छुपा रही है
15:13मुझे कुछ नहीं पता, मैं कुछ छुपा नहीं रही हूँ
15:16मुझे बस तुनकर शॉक होगी
15:19लेकिन हमारे बताने के पहले से तुम हमें शॉक लग नहीं थी
15:21शबनम प्लीज
15:23तुम हेल्फ कर सकती हो हमारे
15:25तुम नहीं चाहोगी
15:26तुम्हारे अबू का कातिल पकड़ा जाए
15:28बताओगी नहीं तुम्हें किस पर शक है
15:30मुझे कैसे किसी पर शक हो सकता है
15:32सच में मुझे कुछ नहीं पता हूँ
15:38तेन सावल में काफी डेवल्मेंट हुई है शेक परिवाब
15:40जी सर
15:41लड़की जरूर कुछ चुपा रही है सर
15:43और यह शादब भी
15:44बॉडिय लेंगे से काफी नर्वास लग रहा था
15:46रजिया भी सर
15:47काफी कोशिश करी थी नॉमल रहने की
15:49लेकिन साफ दिख रहा था अंदर कुछ चल रहा है
15:51इस मर्डर का तगड़ा माटिव दिख रहा है
15:53रजिया और शादाव को अर्सित है फियर रहा होगा
15:55अफजल रास्ते का कांटा था
15:57इस ट्रैंगल के तीनों एंगल के डिटेल्स निकलो
15:59रजिया शादाव और वो
16:01पहला शहर मरहूम अफजल शेक
16:03सब
16:05तीन साल पहले हुआ एक एक्सिरेंट केस
16:07अब मर्ड केस मालूम हो रहा था
16:09जैसा कि उस वक्त रजिया को लग रहा था
16:11लेकिन उस वक्त न्याय की गुहार लगाने वाली
16:13पीड़ित की पत्नी इस वक्त
16:15संदिग्द मालूम हो रही थी
16:17सवाल यह उठ रहा था कि क्या घर की दीवारों में
16:19दीमक काफी पहले से लगी हुई थी
16:21और क्या किसी अपने ने ही
16:23अफजल के खिलाफ अपने दिल में बैर पाल रखा
16:25सर
16:27अवासमा, क्या खाबर?
16:29आपका शक सही निकला सर
16:31अफजल की मौत के काफी पहले से चल रहा था
16:33अफजल के जाने के बाद ही इनका निकाह हुआ
16:35लेकिन उसके पहले
16:37शादाब की पहली बेगम फातिमा ने तलाग दी दिया शादाब को
16:40तब ही खिल टुक गई थी
16:41अभी कहा है फातिमा?
16:43वो अपने जबलपूर की नहीं थी
16:45वो तो लॉट दी अपने माई के
16:47शादाब में
16:49सर मैंने शादाब की पहली बीवी फातिमा को ट्रेस कर लिया है
16:51बुलाया उसे हैं
16:52सर मैं अफजल शेक के दुकान पर गया था
16:54अब वो दुकान उसका कारीगर चलाता है
16:56मंगेश
16:57साबी दुकान अफजल भाई की खुद की नहीं थी
16:59अन्होंने एक सेट से लीस पर ली थी
17:01अब मैं पहले से उनके नीचे काम कर ला था
17:03लेकिन उनके जाने के बाद रजिय भावी को दुकान नी चलाने थी
17:06तो उनसे मैंने ले ली
17:07अफजल शेके काफी करीब रहोगे तो मंगेश
17:09उसकी किसी के साथ कोई दुश्मनी थी क्या
17:11साब दुश्मनी करने वा निभाने के लिए फुरसदी तो लगती है ना
17:14और अफजल भाई तो हमेशे से अपने काम में मगन रहते थे
17:16और जो भी वक्त मिलता वो अपने बच्चों के साथ बिताते
17:19इस बात की पूरी संभाव ना है कि अफजल का मर्डर हुआ है
17:22कुछ तो हुआ होगा पता होता कुछ तो तीन साल से चुपनी बैठता साथ
17:26अफजल के दिल में बच्चों के लिए जगा थी
17:30बच्चों के मां के लिए नहीं कोई तो मजला हुआ होगा मिया बीवी के बीच में तो यह दरार आई
17:36सब महले वालों को कहना है उन्होंने अफजल और रजिया के बिच कभी कोई जगड़ा होते नहीं देखा
17:40ना कभी सुना सारे जगड़े चीफ चीफ चीफ के कहां आते हैंसी वार खामोशी से भी किये जाता है
17:45मुझे लगता अफजल और रजिया के रिष्टे को समझने के लिए हमें पहले शादाब और उसकी बीवी फातिमा को समझना जरूरी है
17:51बलवाओ तेनकों
17:53मुझे जरूरी हमारे घरवालों ने तेह की थी पहले दो साल जब तक हम बच्चे के लिए कोशिश कर रहे थे शादा पुछ से बहुत प्यार करता था
18:20लेकिन जैसे जैसे डॉक्टर जवाब देते गए शाद आप बदल गया
18:24क्या यू कहिए कि उसने अपना असली चहरा दिखाना शिरू करती है
18:32ये डॉक्टर ने इन दौर वाले स्पेशलिस्ट का नंबर दिया है
18:36ये इस डॉक्टर का नाम भी पेले बाले डॉक्टर ने दिया था
18:39और उस डॉक्टर का नाम भी किसी ना किसी ने दिया था
18:41सभी दूसरे डॉक्टर का नाम ही देना है
18:44और हम पानी के तरा पैसा बहार है लेकिन हमको बच्चा को नहीं देना है
18:47अभी अभी अभी हमारी उमरी क्या है हाँ आप ऐसे उमेद मत कोई है हम और एक बार कोशिश करेंगे नहीं आज के बाद इसकर में बच्चे का जिकर तक नहीं हो गोगा मैं एक बार और कोशिश कर हार का मौन नहीं देख रहा चाता हूँ खुदा के वास्ते मुझे थोड़ा
19:17अभी अभी अभी अभी अफेर श्रूगा उसके साथ शुलवाद दोस्ती से हम दर्दी से भी सर अब तुम मेरे घर जाओ और शबनम का हमबग चेक करो मुझे शादाव से जरूरी बात करने हैं
19:35अब तुम में अब तुम में आपको इंदोर के डॉक्तर से एक पर बात जूने कर लेते हूं जादा देखे अधिए पाथिमा कितनी कोशिशे करें अगर अला में इने चाहिए अधिशा कर चुके ए रजी हा जबल पूर के सबसे बड़े डॉक्तर डॉक्तर जोशी बजे ब
20:05यह फ़ पाथिमा को बताही है? बताही है कुमा फिला के जो साफ लफजों नहीं बताहिए कि हो कभी महा नहीं बन सकती हूं पर ही मत नहीं होती है उससे जाने के घुँप पार याभ बिख गुदा के वास्ति है कुछ्ट पर लोग दो आब बढ़को मेरी गुन्यकार संधि
20:35जब कोई दवा पाथी मा को मा बना नहीं सकती, मैं कभी पाप नहीं बनभाऊंगा
20:46यह दर्द जलाद दिन खाथा है, इससे का हुए, क्या करूँ मैं?
20:56रोहिम, रोहिम, चुपोचाइए
21:01उस दिन हमारे बीच एक, एक कड़ी, एक तोर बंद गए, दोस्ति और हम दर्दी के परे, उसके बाद क्या हुआ?
21:24हम मिलने लगे, पहले-पहले बहुले के बाहर, और तुम्हें बना कब लगी?
21:31कभी नहीं, मैं तो रजिया को पनी आपा समझती थी
21:36पकड़े कैसे दे?
21:38अफजल ने हमें रामकी हाथ पकड़ लिये
21:41हमें लागी हाथ पकड़ लिये
21:42हम लागी हाथ
21:48करवे
21:50कर दो
21:52कर दो
21:56हम आप
21:59अफसर आपाज जल्दी आगे देरो गए तुम कहां से कहां पहुच के दिए अफसल आप क्या भोल रहे हैं मेरी कुछ समझ में नहीं आगा
22:22अजय को फोन लो और पुलाओ यहां अधाप को लेकिन क्यों यूंद्या यह सवाल अपने आप से कुछो चुक्त साधा आपको फोन कर और पुलाओ से हां
22:36यह कब हुआ, क्यों हुआ, कहां हुआ, कैसे कैसे हुआ, कुछ नहीं जानना मुझे, बस तुम दो लो कान खोल कर सुनो, आज के बाद जब नहीं, यह कहानी अभी इसी वक्त हो जानी चाहिए, अंदर बच्चे हैं मेरे, बढ़े हो रहे हैं, अगर उन्हें कुछ बता चल गय
23:06ठीक नहीं होगा, तुम दोनों ने अपना रिष्टा तो तोड़ा नहीं, और अवजल को मारते हैं, साब, शादावर मुझे पता था, आप यही सोचेंगे, साब आप यकिन करे या ना करे, मैं अवजल को कभी दोका नहीं देना चाहती थी, यह डायलोग हफते में कम से कम �
23:36अवजल ने मुझे घर में बंद करके रखा थे, एक तरीके से यह मेरी लिए अच्छा ही था, मैंने शादाव से पुरी तरह बातचीत बंद कर दी, शादाव में भी कोई कोशिश नहीं कि, अवजल के हमें पकड़ लेने के पाद, मैंने वो शादाव ने दुसरे के तरफ �
24:06मैं भर आप अवजल जैसे अच्छे इंसान का खतल क्यों करता है, वो बहुत ही अच्छा इंसान था से, और आप ही बताइए, कौन आदमी अपनी बीवी और पड़ोसी कि ऐसी हरकत बरदास करता है, उसने नहीं सिर्फ खुद की और अपनी घर की इज़त का सोचा, बलकि उ
24:36का तलाग हो गया, तुम्हें लगता है कि शादाब ने अफसल को मरवाया, नहीं, मुझे नहीं लगता है शादाब इतना गिर सकता, लेकिन वो कहते हैं न, प्यार में इंसान अंधा हो जाता है, क्या पता इंसानित भी अंधी हो जाती होगा, अफसल शादाब और रजिया क
25:06कि खबरी के टिप से एक अंसलजे अक्सिडेंट केस को फिर से खोला गया, लेकिन पुलिस के हाथ कुछ नहीं लग रहा था, क्या ये अंसलजा केस अंसलजा ही रहने वाला था, या फिर पुलिस के हाथ कोई ऐसा सुराग लगने वाला था, जो इस केस को नहीं दिशा देता
25:36कुलिस्टेशन, मैंने किया किया है, जालो सेंदर, सार एक बार तो बताईए कि मैंटर किया है, मैंटर मुर्डर का, तीन साल पहले हुए, जबलपूर बाइपास रोड़ पा, गारी से कोचिलकान मार डाला, और मारा तुम्हारे दोस्ति, जो एक मेना पहले मस्तानी बार में �
26:06के हा कराते है ऑगे, जो नाम बोल सका, और आपले, uh, पह Sachin बॉटोर नगर में तो शाज़ाप की स्टेशनरी तो
26:34और बोल अभी के अभी, तो उसको मिलने सके घर पर आ रहा हूँ
26:36हलो, आसनील, बोल, क्या हुआ
26:45दर्मिन भाई, वो बस ऐसे ही फोन किया था, कहां हो आप
26:49घर परी हूँ, क्या हो बोलना
26:51नहीं, वो बस, मैं सोच रहा था, आप से आकर मिल लूँ
26:55हलो, दर्मिन भाई, हाँ, सुन रहा हूँ
27:01आजे, मैं घर परी हूँ
27:04यहो आजी, अब अच्छे ने कितने परेशन लग रहे हैं
27:25जी, कौन है आप लोकर रहे से कैसे
27:30क्रेम रांच, घरमेंदर को बोला, पुरांथ
27:33दैस मिनिटे वो बाहर गये, बोले रादबर गरनी याएंगे
27:37क्या हुआ है, क्या किया उन्होंने
27:39मुर्डर
27:40क्या?
27:41पीन साल पहले उसने एक आदमी का मुर्डर किया था
27:43वो अगर तुम्हे फोन करता है, तो तुम सीधे-सीधे हमें फोन करके बताओगी, समझे हैं?
27:47सर, घरमेंदर अंदर नहीं है, जैसे वह आपको कांटाट करें, इस नमर पे आप हमें फोन करके बता दीजे
27:52यह दरमेंदर शहर चोड़ने की पुरी कोशिकर एगा, हम उसे भागने नहीं दे सकते हैं, शेयर की हर जगा सील करवादा हूँ
27:58इस नहीं भी तो, मैं सारे थाने एपोर्ट और बस्टान पर हाय अलर्ट की रिक्वेस्ट भीज़ देश देश लेती, अफसर यह दरमेंदर का फोटो के तो, जो कॉल कोट से तालवाँ
28:05इड़ा कर खलील भाई, लगता है पुलिस और अफजल का केस फिर से खोल रहे हैं, या, तुझे कैसा पता चला है?
28:26पुलिस मुझे अरेस्ट करने के लिए मेरे घर पर आई थी, बाल बचकर भागा हूँ मैं, लेकि तेरे बारे में पुलिस को कैसा पता चला है?
28:31मुझे नहीं मालूम है, लेकि बहतरी इसी मेहना खलील भाई, कि मुझे इस जहमिले से बार निकालो, पांच लाक रुपे मेरे मुझे ठूसो नहीं तो मेरा मुझ पुलिस वाले के सामने खुल जाएगा, पक्वास मत कर, तू ऐसा कुछ भी नी करेगा समझे, मैं ऐसा कर सक
29:01अलो, खलील बोल रहाँ, आ क्या हो रहाँ, खलील, पुलीस अफदल का केस दुबारा कुल वा रही है, धरमेंदर को ठाने के लिए उसके घर गई थी, लेकिन वो बच के निकल गया, ये कब हुआ, और पुलिस वालों को धरमें के बारे हम कैसे पता चला, उंगे कुछ नही
29:31शक्ता कुसे कहाना चाहे, बाहर ना लेगे, समझे, सर, सर, कॉल कोर्ट के एसाब से, इस धरमेंदर की फोन पर सबसे ज़्यादा बात है, खलील इब्लाइम के साथ हुई है, ये खलील ट्रेवल एजेंसे कमा लेक है, तरन तर्फा, सर, आप अंगच, ये धरमेंदर जो एक
30:01है कि शाद आपका इस धरमेंदर के साथ को एकनेक्शन हो सकता है, अपका हो, उठाए शाद आपको, लगता है इस केस की सही क्लोजर रिपोर्ट पनाने कवा आ गया है, छे सल धरमेंदर मेरें ड्राइवर था, फिर उसने दो साल पहले लोन से टेक्सी खरी दी, मेरी नौकर
30:31कौन अफजल, क्यासा कतल, कौन से सुफारी, और सर्ण, ये सब आप मुझे क्यों बोल रहे हैं, सुफारी तुमने दी थी खलीज, तुमने कहा दरमेंदर ने दो साल पहले नौकरी छोड़ दी थी, अफजल का माड़ गुआ तीन साल पहले, उस वक दरमेंदर तुमारे ए�
31:01ये अफजल कौन है, मैं सच में इसे नहीं जानता, देखिए, आपने जो जो सवाल के, मैंने उसका सही-सही इमानदारी से जवाब देखिए, अब इसके आगे मैं कुछ नहीं कहना चाहता, तब अस इतना कहूंगा, कि आप लोग मुझे पर बेवबुनियात इल्जाम लग
31:31तुम नहीं भाग पाओगे, बॉल, मैं चाय तक नहीं पीता साब, मुझे कैसे पता कि चाय की टपरी पर कौन धरमिंदर आता है, इस आदमी ने अफजल को अपनी गाड़ी के नीचे को चल दिया, इस आदमी को मैंने अपने दुकान के आसपास देखा था, चाय की टपरी �
32:01कोई तालोग नहीं साथ, तर कॉल रिकॉर्स के यसाप से घरमेंदर शादा वर रजया की बीच कोई फोन कनेक्शन नहीं है, एक ओल बेने, शाय दिया शादा शादा शादा शादा वर रजया अफजल किसी के साद भी कॉए कॉन्टक मेरा है, तो तो धरमेंदर को सुपरी क
32:31आठ साल पहले शिफ्ट लोगा है, तो धरमेंदर के लिए तलास जारी हो, अमिश्का, एक तीम लेकर सुरोनी गाँजा, देखते हैं, यह अफजल शेख की मौत के सुराद, फिर गाउं में तनी किते हैं, श्यादा, मुछ से रहा नहीं जा रहा है, उचे आपसे कुछ पू
33:01क्या तुम्हें वाकिये में से लगता है कि अफजल का कतल मैंने कर गाँ है, मेरे आखो में आखें डालकर अपना सवाल पुछो रजी, मेरी तरफ देखो, क्या या आँखें को खुनी की लगती है, अफजल के खुनी की, मैंने किसी को सुपारिफ बाली ले थी रजी, तक्�
33:31ये जमीन जिसमें मैं खेती कर रहा हूँ, ये दरसल अफजल भाई की ही है, पिछले पांच सालों से मैं ही इस जमीन पर खेती कर रहा हूँ, लेकिन उन्होंने खुछ से मुझे कभी भी किराया जाना से बारे मैंने पूचा, अल्ला के बंदे थे वो, बहुत नेक, अच्छ
34:01बाबी, आपको कभी भी किसी चीज़ को जरूरत हो, तो मुझे फोन कीजिएगा, कहां मिलेगा इस वक्त?
34:08माजीद पाल्ठी के रफ्ते में होगा,
34:38मेरा दोस्त बहुत शरीफ बंदा था, लेकिन जबलपूर में कुछ हुआ हो, तो मुझे नहीं पता, रजिया के बारे मैं जानते हो तूं, अब तल की मौत के बाद मैंने रजिया भावी को फोन किया था, अलो, असलाम अलेकों, बालेकों सलाम, आप कॉन बोल रहे हैं, अ�
35:08चलो इसी बहाने कम शर्बनम अर्मान को बाप का साया तो मिला है, लेकिन बेटी शर्बनम रजिया और शादब के साथ नहीं रहा थी, इस बारे में तो मुझे मालू में नहीं, कि अफजल ने आपको कभी रजिया और शादब के नाजाइज रिष्टे के बार में बता है, �
35:38रिष्टे केशन अभी अपनी मंजल से काफी दूर थी, हलाकि पुलिस जानती थी कि अफजल का कतल किस ने किया था, लेकिन वो ये जानने में अब तक नाकाम रही थी कि अफजल का कतल आخر किस शत्रंच का मोहरा था, अफजल का कतल आ अखर क्यो किया गया और इस कतल के पी�
36:08शर्मम अच्छा किया जो तुम खुद अपना बेयान लिखाने के लिए यकीन मान चोटी सी चोटी जानकारी भी तुम्हारे अब्बू के कातलों को पकड़ने में हमारी पहुर मरत करें अब्बू ने अम्मी और शादा आपको रंगया हाथों पकड़ा तुम कब हुआ क्यों
36:38अब्बू को एसे रोते हुए मैंने कभी नहीं देखा था आपि यहोड़ा करते अहीं और अम्मी ने क्या किक इफैर फिर अब्बू के मौत के बाद शादाप से शादी अम्मी और शादापको खुश आप और उनके खुशी मुझसे देखी नहीं चाहती या कि मुझा थी
37:08उन्होंने ही अब्बू को अटा है अपने रस्ते से
37:10तुम्हें लगता है कि
37:12मैं यकिन के साथ तो नहीं कह सकती
37:14ये मेरी सोच है
37:15लेकिन अब्बू की मौत की सचा है
37:18मैं नहीं जानती
37:19अब अंगज बोल
37:26साब आपको बंदा मिल गया
37:28यहां इमाम नगर के एक लौज में छुपके बैठा है
37:31उसके नज़र रख हमारे
37:32तहले बोल
37:42सुपारी किसने दी
37:43मेरे मालिक खलील इबराहिम ले
37:46अफदल शेक नाम है
37:51गाड़ी से उड़ा
37:53एक्सिडेंट लगना चाहिए
37:57एडवांस बीस हजर
37:59बाकी के असी हजर काम होने के दुकान पर गया था
38:05दर्जी के दुकान पर
38:07मंगेश दुकान से वालने में खाना खा कि आता हूँ
38:09अफजर भई
38:12अब सलाव
38:15सलाव
38:16मात कीजिए मैंने आपको बचारा नहीं है
38:18जी दरसल मेरा नाम बाला है आपकी कारीगरी की बहुत तारी इसलिए मिलने जाए वो क्या है ना कि मैं छोटा सा गार्मन का बिजनेस शीव करें और मुझे एक काबिल साथी की जरुरत है जो मेरे बिजनेस को समानगा
38:30कहीं पैट के बात करें के बाइस अब क्या है कि वो मैं भी खाना खाने घर जा रहा है उसके बाद एक अरजन डिवरी है वह शाम को मिले शाम को मेरे चार शे मिटिंस है लेट हो जाएगा अंधेर रात को दस बूजे मिलें गया अपको दस बूजे बोट लेट नहीं हो जा�
39:00तेरा स्रेट खलीड अबजल को क्यों मर बना चाहता था उसकी अबजल से क्या दुश्मनी था
39:30मुझे उसने कभी कुछ नहीं बताया, सर.
39:34मेरी अफजल से कोई दुश्मन ही नी थी.
39:36मैं तो उसे जानता भी नी था, सर.
39:40अबर अफजल को जानता नहीं था,
39:41तो मरवाया कर था, सर.
39:42मैं नहीं चाहता था, सर.
39:44ये कांड मुझे करवाया गया.
39:45मैं किसी ओने सुपारी था?
39:49ना.
39:50ना मौन!
39:52मेरे दोस्त नहीं.
39:54कौन दोस्त?
39:55एक छोटे लवल का पॉलिटेशन है,
39:56सरो नी गांगा.
40:00मुमाजिस से देगे.
40:13अब चल मेरा सबसे अच्छा दोस्त.
40:15शाय देखला होता.
40:17लंगोटिया है थे, सर.
40:19हम सब कुछ साथ में करते थे.
40:21हमने गाव में किराने की दुकान भी खोली.
40:23हमारा धंदा चल निकला.
40:25अब जल एक दिन बोला कि वो जिन्नेगी में कुछ पला करना चाहता है.
40:27तो 2011 में वो जबलपूर खली चला गया पार्टनर्शिक तोड़के.
40:31बिजनेश टूटा.
40:33लेकिन हमारी दोस्ती फिर भी कायम थी, सर.
40:35गावाले मिसाले दिया करते थे हमारी दोस्ती पी.
40:37जबलपूर जाने के बाद भी हम लोग टच्मी तो थे.
40:39लेकिन पहले जैसे नहीं.
40:43वाकई अफजल मेरी हमाद था, सर.
40:44अगर अफजल तुमारी हमाद था, तो उसे मरवाया कि.
40:48रजे नहीं कहा तो उसे मरवाने कि.
40:51नहीं.
40:52लेक्शन है.
40:55चोक लग रहा तुझे.
40:56तो राजबीर सिंजी के खिलाब पंचेया तो चुना लग जाता है.
40:59पूरा गाउं राजबीर जी को वोट करेगा.
41:01तेरे अम्मी अब्बू, मेरे अम्मी अब्बू, सभी.
41:03मतलब तुझे सिर्फ एक वोट मिलेगा.
41:05वो भी तेरा.
41:05मतलब तेरा भी वोट नहीं मिलेगा मुझे.
41:08नहीं दोस्ती तेरे.
41:09अरे यारा, तु देख ड्रामा कर रहा है खामका.
41:11अबसल, क्या जिन्दिगी में तुझे सिर्फ आगे बढ़ सकता है?
41:14मैंने, देखना, इस पूरे इलाके मेरे नाम का डंका बजेगा.
41:18इस करके दिखाऊंगा, यार.
41:20आँ, मैं दिखा लेना, यार.
41:21मैं पेल पर चाणने कोशिच कर रहा हूँ.
41:23तु डाली पकड़े गया, तो मैं गिरूँगा नहीं.
41:25देख माजिद, यार, मुझे इन सम्में मत कसीठ.
41:29और तुमे एलेक्शन हाग है.
41:30इसर, मुझे एलेक्शन हाने का कोई गम नहीं.
41:33लेकिन कुछ ऐसा हुआ, जिससे मेरा फ्यूज उलगे है.
41:37और माजिद, काम खामें दामात के वैसे भी जब्त करवा दी.
41:40और मैंने कहा था, कोई वोट करने वाला नहीं.
41:42यहां तर कि मेरे करवालों ने भी राजिव जी को वोट दिया है.
41:44छोड़ना यारवा तुमे अगली बार जीचाओ.
41:47लेकिन ये बताबे कि तूने वोट दिया कि नहीं?
41:50लेकिन तो नहीं दिया है.
41:54क्यों? तो नहीं दिया?
41:56यार बुरा मत मालना.
41:56एक पुरानी कहावत है.
42:00किसी गदे को अगर नदी किनारे छोड़ दिया जाए,
42:03तो पानी तो खुद की लेगा.
42:05लेकिन कभी घुडा निगा.
42:08खंजर रिक तरह चुप गए थी अपजल की बात मेरे दिल में.
42:10मेरे लिए इतना बायर, ये बात अठक गए थी मेरे जहन में.
42:14मैं इतना गुस्ता, इतनी नफरत कीज़स नहीं की थी.
42:17जितना मैं अपजल से टरने लगा था.
42:20मुझे बदला चाहिए था सर.
42:21ये बदला तुमने एक लाख में खरीदा पलीज से.
42:25इसे पीस हजार में दिल वाया, धरमेंदर्स.
42:28माझे, जो दोस्त मुपर सच बोल दे, इसके दिल में बैर नहीं हो.
42:32बैर अफजल के दिल में नहीं था.
42:34बैर तुमने पाल लगा था, अपने दिल में.
42:37अफजल के लिए.
42:38माजित सिद्गी को IPC की धारा 302 के तहद किरफतार कर लिया गया है
42:44साथी खलील इबराहिम और धरमेंदर कुमार को भी IPC की धारा 302 के तहद किरफतार किया गया है
42:51इस कतल की वज़ा से रज्या का परिवार बिखर गया था
42:56और फिर संभला तो पहले जैसा कभी न हो पाया
42:59एक बेटी ने अपने अजीज अब्बू को खोया जिसकी वो दुनिया में सबसे ज़ादा इज़त करती थी
43:05और दूसरी तरफ पुलिस के खबरी पंकच को खास इज़त बख्शी गई
43:10क्योंकि उसकी एक ब्लाइंड टिप के आधार पर पुलिस एक ऐसा केस क्रैक कर पाई
43:16जो तीन साल पहले अंसुलज़ा करार दे दिया गया था और उसकी क्लोजर रिपोर्ट फाइल करती गई थी
43:21खून का रिष्टा हो या फिर दोस्ती का सामने वाले के जजबात और प्रतिक्रिया को नजर अंदास करना महंगा पढ़ सकता है
43:29सालों से अंदर ये अंदर उबल रही रंजिश किसी एक हरकत या चंद शब्दों की वज़़ा से उमर पढ़ती है
43:35और उस नफरत के शिकार होने वाले को याद तक नहीं रहता है कि उसने किसी को ठेस पहुँचाई थी
43:40जैसा कि इस केस में अफजल शेक के साथ हुआ
43:43क्या अफजल के कतल की वज़़ा सिर्फ एक राजनेतिक मद्धेत था
43:47या फिर बच्पन से ही माजद ने अपने दिल में अफजल को एक प्रतिद्वन्दी जादा और दोस्त कम समझा
43:53शायद माजद को भी अंदाजा नहीं था कि उसके मन में क्या उमर रहा है
43:57लेकिन चुर्म करने की कोई भी वज़़ए उच्छत नहीं होती
44:00ऐसी किसी भी प्रतिक्रिया से सतर्क रहना चाहिए
44:03अगर मन में ऐसे ख्याल आते हैं या घर करने लगते हैं
44:07तो समझदारी से आगे बढ़ने में ही हमारी और हम से जुड़े लोगों की भलाई है
44:11अब मैं आनूप सोनी आपसे बिदा लेता हूँ
44:13फिर मलाकात होगी एक और नए केस के साथ और याद रखें
44:17क्राइम और आपके बीच में सिर्फ इतना फर्क है कि आप कितने सतर्क हैं
44:22सतर्क रहें सुरक्षित रहें
44:24जैहिल