00:00मीठे बच्चे, अपने स्वीट बाप को याद करो, तो तुम सतो प्रधान देवता बन जाएंगे. सारा मदार याद की यात्रा पर है.
00:10प्रश्ण
00:11जैसे बाप की कशिश बच्चों को होती है, वैसे किन बच्चों की कशिश सब को होगी?
00:19उत्तर
00:19जो फूल बने हैं, जैसे छोटे बच्चे फूल होते हैं, उन्हें विकारों का पता भी नहीं, तो वो सब को कशिश करते हैं, ऐसे तम बच्चे भी जब फूल अर्थात पवित्र बन जाएंगे, तो सब को कशिश होगी. तुम्हारे में विकारों का कोई भी काटा नहीं होना
00:492. इस विनाशी शरीर में आत्मा ही most valuable है. वही अमर अविनाशी है. इसलिए अविनाशी चीज से प्यार रखना है, देह का भान मिटा देना है.
01:043. वर्दान. अपने अनादी आदी स्वरूप की स्मृती से निर्बंधन बनने और बनाने वाले मरजीवा भव. जैसे बाप लोन लेता है, बंधन में नहीं आता, ऐसे आप मरजीवा जन्म वाले बच्चे शरीर के, संसकारों के, स्वभाव के बंधनों से मुक्त बनो. जब �
01:34स्थिती में स्थित होकर फिर नीचे आओ. अपने अनादी आदी स्वरूप की स्मृती में रहो, अवतरित हुई आत्मा समझ कर कर्म करो, तो और भी आपको फॉलो करेंगे. स्लोगन. याद की वृत्ती से वायु मंदल को पावर्फुल बनाना. यही मनसा सेवा है. अव्यक
02:04चाहे वो किसी संकल्प के रूप में हो, चाहे संबंध के रूप में हो, चाहे संपर्क के रूप में हो, चाहे अपनी कोई विशेषता की तरफ हो. कोई भी लगाव बंधन युक्त कर देगा. वो लगाव अशरीरी बनने नहीं देगा और वो विश्व कल्यानकारी भी बना
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