00:00भारत और यॉर्प के बीच आज दोस्ती के नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है
00:03ठारा साल से चली आ रही कोशिश काम्याब हो रही है
00:06भारत और यॉर्पी यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौता
00:09यानि FTA की गोश्टना होगी
00:11दुनिया इसे mother of all डील्स बता रही है
00:13और इस व्यापार समझौते के लिए भारत और यू के बीच
00:1518 साल यानि 2007 से बाच्ची चल रही थी जो आखिरकार रंग लाई है
00:20ये डील उस वक्त हो रही है जब टारिफ को लेकर भारत और अमेरिका के बीच तनातनी चल रही है
00:24अमेरिकी राश्पी लगातार टारिफ बढ़ाने के चितावनी दे रहे है
00:27एफटीय से भारत और श्रम कपड़ा और फुट्वेर जैसे इंडस्ट्री के लावा
00:33electronics, machinery और chemical industry को बड़ा बाजार मिल सकता है
00:37एफटीय से 200 करोड लोग का साजहा market तयार होगा
00:40जो दुनिया की 25 वीज़ी GDP कवर करेगा
00:42भारत की कपड़ा और चमड़े पर EU अभी 10 वीज़ी ड्यूटी लगाता है
00:46एफटीय के बाद ये ड्यूटी कम या फिर खत्म हो सकती है
00:49इसे यॉर्ट में भारते कपड़े जूते सस्ते होंगे और उनकी डिमान बढ़ेगे
01:10तो क्या ड्यूटी पुरी तरह से खत्म हो जाएगी या कम होगी क्या असार लग रहे है
01:14नहीं आप जानती है कि बाजार जो है वो मांग और आपूर्ती की सिध्धान से चलता है
01:19लेन और देन से चलता है इसमें दुनिया में जो उधर पुधल है उसमें भारत का जो सबसे बड़ा आर्थिक साज़ेदार है
01:25यॉरपीय संग जिसके अंदर 27 देश शामिल है वो भारत के साथ में टरिफ ड्यूटीज जो है वो कम करना चाहता है
01:30कालोबार बढ़ाना चाहता है क्योंकि बाजार की तलाश यॉरप को भी है और भारत को भी है
01:35भारत भी चाहता है कि भारत के अंदर तकनीक आए भारत के अंदर नया निवेश आए और भारत की उतपादों को यॉरप जिसके बाजार के अंदर और ज़्यादा एकसिस मिले
01:42यही वज़ा है कि जो 17-18 साल से कोशिश और कवायत चल रही थी उसका आज एक तरीके से कहा जा सकता है तो पर मोहर लग जाएगी अनाउंस्मेंट हो जाएगा
01:50जिस तरीके से आप भी इंगित कर रही थी कि कौन-कौन से वो उतपाद हैं जो कम हो सकते हैं जिनके पर टैरिफ ड्यूटीज कम हो जाएगी चरण बदर तरीके से ये चीज़े होनी हैं
01:58हम 136 अरब डॉलर के कारोबार को 200 अरब डॉलर का कारोबार बनाने के लक्ष की बात कर रहे हैं यह जो एफटीए है इसके बाद जो टैरिफ ड्यूटीज है वो कम हो जाएगी करीब 90 पर उतपाद ऐसे होंगे नहा जिनके ओपर टैरिफ ड्यूटीज बहुत कम हो जाएगी
02:28बादों को जादा एक्सेस मिल सकेगी साथी जो भारत के अंदर आने वाला आयात है खास पर मशीनरी का हो है जो हाई इंडस्ट्री टेक्नालोजी है एरोपलेंस के पार्ट है जिनको लेके भारत तो काफी ड्यूटीज देनी पड़ती है उनके एक्सेस के लिए भारत को आस
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