00:00जीलो की नगरी उदैपूर सिर्फ अपनी खुबसूरती के लिए ही नहीं बलकि अपनी कला और संस्कृती के लिए भी पहचानी जाती है
00:11ये जो आप धोलक पर परती थाप और छेनी हतोडी की आवाज सुन रहे हैं
00:17ये आवाज है उदैपूर के आयर इलाके की
00:20यहाँ पीडियों से चले आ रहे है बादियंत्र बनाने की कारखाने अब होली की स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है
00:27दीपक और राजु जैसे कारिगर जो इसकला की पाचबी पेड़ी हैं दिन रात एक करके धोलक, तबला और चंग को अंतिम रूप दे रहे हैं
00:36दीपक बताते हैं कि मशीनी दौर कितना भी हाइटिक क्यों न हो जाए, लेकिन हास से बनी धोलक की मिठास का कोई उमकाबला नहीं
00:47सागवान और शिसम की लकरी को तराशना, फिर उस पर खाल मढना और रसियों से उसे ऐसे कसना कि सुर एकदम सटीक निकले या काम किसी तपस्या से कम नहीं है
00:58यही वजा है कि उदैपूर के इन वादियंत्रों की गूंज अब सिर्फ मेवार तक सिमित नहीं रही
01:04जैपूर, जोधपूर, एहमदाबाद और इंदौर तक के संगीत प्रेमी यहीं से अपनी साथ मंगवाते हैं
01:34कि अवरबत बदलाव आया है रोबत क्या पदलाव आया यहीं से आज कर समय से कम बजाते हैं आज कर लोगों को टाइम नियुक्त है
01:45प्रश्वी पीडी है हां पाट्शी पीडी के हैंगर अब तो दिनली निस्टन का खाम कम और ज्यादा नियों होगा है
01:51foreign
02:05foreign
02:11foreign
02:29foreign
02:34foreign
02:38foreign
02:39सचान हैं बसंद पंचमी से शुरूप वया उलास होली तक ऐसे ही जारी रहे
02:44जब तक ऐसे हुनरमन हार्प मौझूद हैं हमारी लोक संस्रिति के सुर्फ कभी बेसूरे नहीं हो
02:51I'm going to go to some crazy, crazy stuff.
02:56I'm going to go to some crazy stuff.
02:58I'm going to go to some crazy stuff.
03:03I'm going to watch some crazy stuff.
03:08What do you mean?
03:10I'm going to go to some music.
03:15How many people are doing this?
03:17I'm going to get a little bit of the car, but I'm going to get a little bit of the car.
03:46but now it's going to be a time.
04:16It's going to be a time.
Comments