00:00अक्सर लोग सडकों पर घायल और बिमार जानवरों को देखकर उन्हें उसी हालत में छोड़ देते हैं
00:10लेकिन उरीसा के भुनेश्वर के रहने वाले तारा कान बहरा के साथ ऐसा नहीं है
00:14उनकी सुबह की शुरवात घायल गायों और बच्छणों के घावों पर दवा लगाने से होती है
00:20उन्हें जब किसी घायल ये बिमार जानवर की खबर मिलती है तो वे वहाँ पहुंच जाते हैं
00:26They do not just clean it, but they do not clean it but they do not clean it and clean it and they do not clean it.
00:33The last 23 years of ADESA has been working on the government for the civil rights to the government.
00:45The government needs to be more a need for money.
00:49ताराकान बहरा भुनेश्वर की एक प्राइवेट स्कूल में टीचर है
01:03उन्हें जितनी सेलरी मिलती है उसका करीब आधा हिस्सा पश्वों की इलाज और दाना पानी पर खर्च कर देते हैं
01:10घर में माता, पिता, पत्नी और एक बेटी भी है
01:12सभी को उनका काम अच्छा लगता है, लिहाजा सभी उनका सहीयोग भी करते हैं
01:17जब कभी फोन की घंटी बसती है, वो घर से निकल जाता है
01:26जानवरों की हमले के डर से मैं उसे रोकती हूँ, लेकिन वो रुकता नहीं है
01:31वो गाउं के वच्चों की मदद लेता है
01:34बात साल 2003 की है, जब तारा कान दस्वी में पढ़ते थे
01:39उन्होंने अपने घर के पास एक बीमार सांड को देखा
01:42अपने दोस्तों की मदद से उन्होंने उसे ठीक किया
01:45उसी समय उनके मन में गायों की सेवा का ख्याल आया
01:49जब बीमार गायों की बात आती है तो वो ना दिन देखते हैं और ना रात
01:53हर वक्त उसकी सेवा के लिए तयार रहते हैं
01:56सिर्फ गाय ही क्यों? कुट्ता, बंदर, चिडियों और दूसरे जानवरों की भी सेवा करते हैं
02:02जब भी ज़रूरत परती हैं ताराकांत की मदद करते हैं
02:11हम गायों के लिए एक सर्विस सेंटर खोलने की कोशिश कर रहे हैं
02:14जहां बिमार गायों की सेवा हो सकते हैं
02:16शहरी करण की वज़े से गायों की खाने के लिए घास भी कम परती जा रही है
02:22गायों के चड़ने के लिए जगा भी नहीं है
02:24ऐसे में ताराकांतिस इलाके में एक चारा गाह भी बनना चाते हैं
02:29ETV भारत के लिए Odisha के भूनेश्वर से भावानी शंकरदास की रिपोर्ट
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