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  • 5 hours ago
13 जनवरी को बिहार कैबिनेट ने ऐतिहासिक निर्णय लिया था. आइये आपको विस्तार से बताते हैं इंद्रपुरी जलाशय की पूरी कहानी.

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00:00इन्द पूरी जला से परियोजना है यह है शोन नदी पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण यह महत्वाकांची जल प्रबंधन, सीचाई एवं बार प्रबंधन की प्रियोजना है जिसके लागू होने से दक्षिन और मध्य विहार के करीब 8 जिले जिसमें बकसर, भोजपूर, र
00:30पानी का भाब में अगर बन जाता है तो सीचाई की छहमता करीब दोगून ही हो जाएगी अभी फिलहाल आठ लाक हेक्टेयर का सीचाई का सुभधा उपलब्ध है इसके बन जाने से करीब 18 लाक हेक्टेयर सीचाई का सुभधा हो पाएगा अब इन्द पूरी जलास है परि
01:00बन जाने के बाद 400 मेगावाट और इसके बाद बार से लोगों को निजात मिल जाएगा साथ ही दक्षिन और मध्य विहार के किसानों की आर्थी कि स्थिति में सुभार होगा और इस च्छत्र में के विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी जो बार हाता है बरसात के समय में समस
01:30करना सिचाय की सुधा तो होगी सार से साथी बार की समस्या से लोगों को मुक्ति मिलेगी और यह प्रियोजना 1972 से चला रहा आठका हुआ है यह 53 साल पूरानी साल अगर इसके प्रिश्चन मिलना था इसका बिवाद क्या था इसका बिवाद ए था कि बान सागर सम्झोता जो
02:00और दो हजार तक जब तक जार खंड और विहार का बटबारा हुआ था तब तक इसी भी बाद में फसा रहा हलाकि 1990 में ततकालिन मुख्यमंत्री डॉक्टर जगनाथ मिले का सिला नयास भी कर चुके थे जार खंड के गढ़वा जिले के कदवन और रोहतास के मतियमा गाउं
02:30मैं धन्यवाद देना चाहूंगा भारत के मानिये ग्रीह मंत्री अमित्साह जी का यहनोंने पिछले साल 25 जुलाई को जो पुर्वी छत्य परिशत की बैठक हुई थी इसमें बिहार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पता अधिकारियों को मुला करके एक निदान न
03:00पॉइंट 9 किलो मीटर लंबा और 45 मीटर उचा बांध बनना है उसके बाद इस पर कड़ी 1200 कोड का लागत आएगा इसके डिपी आर का जो है सो एदे दिया गया है और इसके बन जाने के बाद दक्षिन और मद्य भिहार के लोगों को काफी आर्शिक्सित में सुधार होगा
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