Skip to playerSkip to main content
🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:
https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021

📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021
➖➖➖➖➖➖
पूरा वीडियो : जब परिवार ही हो गुनहगार: रामायण-महाभारत से सीख || आचार्य प्रशांत (2025)
➖➖➖➖➖➖
#acharyaprashant
#आचार्यप्रशांत
#Draupadi
#Mahabharata
#IndianMythology
#WomenEmpowerment
#EpicHeroine

Category

📚
Learning
Transcript
00:00द्रापदी को कोई पांचो से प्रेम था, बोलो
00:02वो तो वहाँ पर सब को छोड़ छाड़ के करण को ठुकड़ा करके
00:07अरजुन के लिए आई थी
00:09सव आसमानों को और तीन जहानों को छोड़ के आई � तेरे लिए
00:12वो सब छोड़ छाड़ के वहाँ पर किसके लिए
00:15कर्ण ने तो आँख भेदी दी थी
00:17एक दम बीच में चिला के बोलती है
00:19नहीं भाईया तू हट
00:20अब देख़े यहाँ भी गड़ गड़ है
00:24कर्ण को भी क्यों हटा रही है द्रापदी
00:27ये सूत पुत्र है
00:29आ गई न जात बीच में
00:31और कर्ण को मिल गई होती है द्रापदी
00:33तो होता युद्ध
00:35अपना मस्तप
00:36और फिर वो प्रसन रही होंगी द्रापदी कि
00:40अर्जुन बढ़िया धनुर्धर तरुशेष्ट
00:42वो आके बोलती पांचो बाटलो
00:44आपको कैसा लगे
00:46आपका फेयर है
00:47और आप वहाँ घर जाए
00:49खाजें यह चार बड़े भाई है
00:51प्रेम से उपर
00:54यहां भी किसको रख दिया
00:55यहां पर भी फिर से उसने ही किया
00:58जिसने पहले भी प्रेम से उपर
01:00कुछ और रखा था किसने
01:01पुंती ने
01:03कुंति को प्रेम समझ में नहीं आया जीवन भर, ना अपना न द्रौपदी कर, अब पांचों ने मान भी ली, धर्मराज ने भी या धर्म मान लिया, अब धर्मराजों तुम तो मना करते कि ये क्या करवा रही हो, मा, अब महाभारत होगी न, होगी न, ये सब अध्यात्मिक स
01:33मेच मेटे जाता है
Be the first to comment
Add your comment

Recommended