00:00अरकादीश अब तुमें आना होगा सबा भरी हुई थी हसी हंकार अपमान की गून चार और फैल रही थी दुरोप्ती अकेली खड़ी थी ना कोई उसका साह देने वाला था ना कोई उसकी पीड़ा समझने वाला था जोड़न और उसके भाई उसकी मर्यादा रोंदने पे त�
00:30बस जही शन था जब इंसानी बरोसा तूट गा और इश्वर पर पूर्ण विश्वाजनमा अगली पल करीशन प्रगड़ हुए ना शरीर से बलकी किर्पा से बस तर भरते चलेगे और दरोपती की इज़त अशुन रही सबा चुपती हंकार जुक चुका था शीखर जब त
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