00:00ये हैं आर्चरी के कोच विनोध सैनी जो खुद अपने पैशन को तो पूरा नहीं कर पाए लेकिन आज कई प्रतिभाओं को उनके सपने पूरे करने में मदद कर रहे हैं
00:14विनोध तिरंदाजी खेल में राष्ट्रियस तर तक खेल चुके हैं लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति और महेंगे एक्विप्पेंट्स उनके खेल करियर की बाधा बने इस कारण उन्हें अपना पैशन छोड़ना पड़ा
00:27अपने खिलाडी के करियर को समाप्त कर अब विनोध कोच बनकर अपने सपने को जीवन्त रखने के लिए महनत कर रहे हैं
00:57पिर जैसे परफॉर्मेंस आने लगी गेम बैतर होने लगा आपको साब ने बहुत सपोर्ट किया उसके बाद मैंने अपना दूसरा धनुस लिए कंपा हूं फिर मैंने कंपाउंट स्टार्ट किया तो कि बहुत महेंगा गेम है चार ते पांच लाग क्यास पास सामारे एक �
01:27कोच विनोद सैनी बताते हैं कि 2015 में उन्होंने अपने आर्चरी खेल करियर की शुरुआत की उन्हें इस खेल से जुड़ाओं नहीं था लेकिन जैसे ही वह खेल से जुड़े उन्हें इसी में अपना भविश्य नजर आने लगा इसके बाद खिलाडी के तौर पर विनोद
01:57और कोच अपने करियर की शुरुआत की
02:27अपने नो से दसल का है लक्षयादा उस वो नेशनल चेंपियन भी रहा है उसका गोल्ड मेडल है अंडर नाइंड कैटी है अगर बच्छी कमर काफी कम है तो बच्छा मेंटली भी एक्टिव नहीं रहता इतना क्योंकि उसको अपने एंट्रस के हिसाब से गेम करने होते है
02:57विनोध के अंडर ट्रेनिंग ले चुके अब तक 45 खिलाडी अलग-अलग प्रतियों गिताओं में नैशनल लेवल पर प्रतिनिद्व कर चुके हैं कई खिलाडियों ने मेडल भी अपने नाम किया है तो कुछ खिलाडी अंतरास्ट्रिय स्तर पर भी पर्चम लहरा चुके ह
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