00:00प्रेम क्या है जब राधा ने क्रिष्ण से पूछा तुम मेरे क्यों नहीं होते हैं क्रिष्ण मुस्कुराए और बोले मैं तेरा हूँ पर इस संसार का हूँ क्योंकि तेरा प्रेम स्वार्थ नहीं समर्पण है
00:18राधा का प्रेम कभी पाने की जिद नहीं थी बलकि बस इतना था कि वो जहां भी रहें क्रिष्ण मुस्कुरादे रहें
00:29यही प्रेम है जिसमें अधिकार नहीं अपना बन है