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00:30आत्मा कहा जाती है नरक, स्वर्ग, मोक्ष, बंधक इनका असली रह सिग्या है तो गरुण इस सवाल पर विश्णु पर मुस्कुराते हैं और कहते हैं गरुण ये ज्ञान अतियंत गोपनिया है परन्तु जीवों के कल्यार के लिए मैं तुम्हें सब बताता हूँ विश्ण
01:00हो तो चारों तरफ अंधेरा और भैच चा जाता है यहीं नहीं जुत्य के बाद जो 13 दिनों की यात्रा होती है वही इसली परिक्षा है विश्णु कहते हैं कि गरुण आत्मा को यमलोग पहुँचने में 12 से 13 दिन लगते हैं और ये मार्ग प्रतिक जीव के कर्मों के अन�
01:30गरुण पूछते हैं कि प्रभू नरक क्या है विश्णु जवाब देते हैं नरक कोई अलग स्थान नहीं है ये वो स्थिती है जहां आत्मा अपने पापों का फल भोगती है गरुण पुराण में 28 नरकों का वणन है तामिस्त्रों जहां धोका देने वालों को दंड मिलता
02:00और सबसे महत्वपूर बात बताते हैं कि गरुण मोक्ष किसी विशेश जाती वर्ग या व्यक्ति का अधिकार नहीं है सतकर्म हरजीव के लिए द्वार खोल देते हैं मोक्ष का मार्ग तीन बातों में छिपा है जो व्यक्ति मानदारी से जीवन जीता है किसी का बुरा नह
02:30इसलिए आज भी मृत्य के पश्चुआत 13 दिनों तक इसका पार्ट किया जाता है ताकि आत्मा को सही दिशा मिले गरुण पुरान की ये कथा हमें सिर्फ एक ही बात सिखाती है मृत्यों अंत नहीं बलकि एक यात्रा है और उस यात्रा का मार्ग तैकरते हैं हमारे अपने क
03:00झाल झाल झाल
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