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Transcript
00:00यह काम पहालों के साथ लगातार होते ही जा रहा है।
00:03पेडों का कटना, एक के बाद एक वहाँ पर और रिजॉर्ट्स का बनना ये करना वो करना।
00:09पेडों को काट काटके परवतों को नंगा कर दिया गया है।
00:13चारों तरफ अरावली बचाओ के लगते नारे।
00:19तो जो चीज माइन से निकली है, चाहे वो रेथ हो, चाहे वो मिनरल हो, उससे विकास होता है, और वही हमें चाहिए, डेवलप्मेंट ही डेवलप्मेंट और वहां हम सब नाच रहे हैं, पैसा ही पैसा है, अगर आप विकास की और रुपए पैसे की बात करना चाहते हैं, तो
00:49तो GDP वादी जितने हैं जाकर उनको भी बता दीजिए ये जो तुम प्रक्रते के साथ कर रहे हो इसके बाद तुम GDP भी नहीं बचा पाओगे और पहाड सिर्फ पहाड नहीं होते हैं पहाड मैदानों की जान होते हैं भाई दोनों अर्थों में स्थूल अर्थ में भी सूक्ष
01:19शाष रहे हैं हमने जейसे अपने आधर्ष बना रखे हैं उन्हीं की हुज़ए से क्लाइमेट चेंज है उन्हीं की वज़एसे डिफारेश्टेशन है उन्हीं की वज़एसे प्रत्वी बिलकुल रसातल में जा रही है
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