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00:00जंगल के तीन लुटे रहे हैं एक का नामे तम्मा एक का नामे रज्जो और एक का नामे सत्तू तो ये तम्मा रज्जो सत्तू उस जंगल से जो भी निकलता है यात्री उसको क्या करना चाहते हैं लूटना चाहते हैं इनके तरीके लेगे ने लग लगे तम उसको बैठाता ह
00:30किसी दलदल में गिर जाए कहीं फस जाए जब वो फस गिर जाता है फस जाता है तो फिर उसको लूट लेता है
00:35सत का तरीका इन दोनों से अलग है वो कहता है कि मुझे ग्यान हो गया है मुझे लूटने वगरा में कोई रूची नहीं है
00:44आ मैं तुझे जंगल के बाहर छोड़ाओंगा बस रास्ते भर तु मेरी बात सुनता रहे और तारीफें करता रहे
00:51तो सत कहता है तु इन दोनों के चक्कर है पड़ मत ये तम्मा ये रज्जो नलाय के लुटेरे कहीं के मैं लुटेरा नहीं हूँ तु मेरे साथ है
00:59और वास्तों में अगर रुपए पैसे की दृष्टी से देखा जाए तो ये जो सत्तु है ये लूटता कुछ नहीं है ये यात्री को जंगल से बाहर छोड़ाता है लेकिन फिर भी चुपके से ये अपने लिए कुछ ले लेता है क्या ले लेता है प्रशन सा ये तीन गु�
01:29है �
01:42हो तुम्हें बियान होना था और हो क्या गए तुम्हें गणी हो गया गड़ाणशे टुम्हें सतो गुण में पतिश्थित करना नहीं होता अध्यात्म का उद्देशे होता है तुम्हें गुणातीत ले जाना तीनों सी आगे निकल जाओ
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