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00:30Kauravati सुप्रतिक अपनी समय का सबसे भयावा yudh hati माना जाता था भले ही Maha Bhāret में भगदत का उलेख बहुत कम मिलता है लेकिन उनकी वीर्टा की एक घटना इतनी महान है कि उसका वडन खुद वेद्यास ने विस्तार सिक्या है कौरवों और पांडवों का yudh şुरू होता है
01:00where did he come from?
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02:27अब समय आ गया है भगदत का अंत निकट है वो अर्जुन को एक रहस बताते हैं कि भगदत की आयू इतनी अधिक है कि जुर्यों के कारण उनकी पलकों का भार बढ़ गया है इसलिए वो हमेशा माती पर पट्टी बानते हैं ताकि पलके लड़ खडाए नहीं और उनकी दृ�
02:57भगदत की मस्तक पट्टी पर निशाना लगाते हैं पट्टी कट कर गड़ जाती है और अगले ही छड़ भगदत की भारी पलके जुक जाती है उनकी दृष्टी धुनली हो जाती है युद्धिभूमी ठहर जाती है अर्जुन अंतिम बार चलाते हैं और उसी छड़ महारत
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