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पावागढ़ महाकाली मंदिर का प्राचीन रहस्य | The Ancient Mystery of Pavagadh Mahakali Temple
भारत की पावन भूमि पर स्थित पावागढ़ महाकाली मंदिर एक ऐसा दिव्य शक्तिपीठ है, जहाँ आस्था, तंत्र, इतिहास और रहस्य एक साथ मिलते हैं। यह मंदिर गुजरात के पंचमहल ज़िले में पावागढ़ पर्वत की चोटी पर स्थित है और 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
इस वीडियो में आप जानेंगे राजा विक्रमादित्य और राक्षस कालसुर की कथा, माँ महाकाली का दिव्य प्राकट्य, तांत्रिक साधनाएँ, गुप्त गुफाएँ, अखंड दीपक, बदलता हुआ देवी स्वरूप और सदियों से जुड़े अलौकिक रहस्य।
यह कथा केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास और रहस्यमयी शक्ति का अनुभव है।
Pavagadh Mahakali Temple is one of the most powerful Shakti Peethas of India, located atop the Pavagadh hill in Gujarat. This ancient temple is deeply connected with mysticism, tantra, divine energy, and forgotten history.
In this video, explore the legendary tale of King Vikramaditya and demon Kalasur, the divine appearance of Goddess Mahakali, tantric rituals, secret caves, the eternal flame, and mysterious spiritual experiences reported by devotees.
This is not just a temple story—it is a journey into India’s ancient spiritual mysteries.

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Transcript
00:00भारत की भूमी प्राचीन मंदिरों, रहस्यमें शक्तियों और अलौकिक घटनाओं से भरपूर है
00:17इन्ही दिव्यस्थलों में से एक है पावागड महाकाली मंदिर जो गुजरात राज्य के पंचमहल जिले में स्थित है
00:26जह मंदिर न केवल धार्मिक द्रिश्टी से महत्वपूर्ण है बलकि इसका एतिहासिक और तांतरिक पक्ष भी इसे औरों से अलग बनाता है
00:36यह मंदिर पावागड परवत की चोटी पर लगभग 800 मीटर की उचाई पर स्थित है और 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है
00:47हर साल लाखों श्रद्धालू यहां आते हैं और देवी महाकाली की दिव्य उपस्थिती को महसूस करते हैं
00:56इस मंदिर से जुड़ी कथाएं, रहस्य, इतिहास और आध्यात्मिक घटनाएं न केवल श्रद्धा का केंद्र हैं, बलकि रहस्य प्रिय लोगों के लिए शोध का विशय भी हैं
01:07प्राचीन काल में पावागड शेत्र में राजा विक्रमादित्य का शासन था
01:12वह एक न्यायप्रिय पराक्रमी और अत्यंत धार्मिक शासक थे
01:18उनके शासन में प्रजा सुखी और समरिद्ध थी और लोग उन्हें देवतुल्य मानते थे
01:24लेकिन एक दिन उनके राज्ज में ऐसा संकट आया जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया
01:31उस समय एक राक्षस कालसुर जिसने घोर तपस्या के बाद अलौकिक शक्तिया प्राप्त कर ली थी
01:38पावागड और उसके आसपास के गावों पर आक्रमन करने लगा
01:42हर पूर्णिमा की रात वह गावों पर धावा बोलता
01:47फसलों को जलाता, महिलाओं और बच्चों को मारता और पूरे छेत्र में आतंग फैलाता
01:53उसकी शक्ति इतनी भयानत थी कि राज्य के सबसे शूरबीर योध्धा भी उसे हराने में असफर रहे
02:00भयभीत जनता राजा के पास पहुँची और रोरो कर विंती करने लगी
02:17तयार की और कालसुर को चुनोती दी लेकिन जब वे युद्ध में आमने सामने आये
02:23तो कालसुर ने ऐसी तांतरिक शक्ति का उप्योग किया कि पूरी सेना पलभर में पराजित हो गई
02:29राजा को समझ आ गया कि यह सिर्फ बल का युद्ध नहीं बल की आध्यात्मिक शक्ति का युद्ध है
02:36इसके बाद राजा ने पावागड परवत की चोटी पर जाकर कठोर तपस्या शुरू की
02:43उन्होंने 40 दिनों तक जल अन्न और किसी भी प्रकार के आराम का त्याग कर्मा महाकाली की आराधना की
02:51दिन रात केवल मा का ध्यान करते रहे
02:55उनकी भक्ति और तपस्या देख कर एक रात मा महाकाली स्वयं प्रकट हुई
03:00मा ने कहा राजन तुमने असाधारन भक्ती दिखाई है
03:05यह लो मेरी दी हुई यह तलवार इससे तुम उस राक्षस का अंट कर सकते हो
03:12पर ध्यान रखना यह तलवार केवल धर्म और सत्य के लिए ही प्रयोग होनी चाहिए
03:18आशिरवाद लेकर राजा विक्रमादित्य तलवार के साथ युध के लिए निकले
03:24जैसे ही कालसुर ने राजा को देखा वह आकाश में उर गया और गर्जना करते हुए बोला
03:31कोई मुझे नहीं हरा सकता मैं अमर हूँ लेकिन अब राजा अकेले नहीं थे
03:36उनके साथ मा महाकाली का आशिरवाद था
03:40उन्होंने दिवय तलवार से हमला किया जिससे कालसुर के सारे मायाजार तूटने लगे
03:47युध दिन रात चला
03:48जब अंतिम्क्षन आया, राक्षस ने अपनी सबसे शक्तिशाली शक्ती का प्रयोग किया, जिससे राजा घायल हो गए
03:56तभी आकाश में एक दिव्य प्रकाश फैला और मा महाकाली प्रकट हुई
04:02उन्होंने अपने त्रिशूल से कालसुर को भस्न कर दिया
04:06राक्षस ने चीखते हुए एक शमा मांगी, लेकिन मा ने कहा, जो निर्दोशों को सताता है, उसका यही अंध होता है
04:15और कालसुर की भस्न से वातावर्ण पवित्र हो गया
04:19युद्ध के बाद, राजा विक्रमादित्य ने मा के चर्णों में नमन किया
04:24मा ने उन्हें आशिरवाद दिया, जब तक इस परवत पर मेरी पूजा होती रहेगी, तुम्हारा नाम अमर रहेगा
04:32दभी से पावागड पर मा महाकाली की पूजा अनंतकाल से निरंतर होती आ रही है
04:38भक्त मानते हैं कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मा महाकाली के दर्शन करता है, उसे राजा विक्रमादित्य की दिव्य कूर्जा का अनुभव होता है
04:50कई साधकों ने रात में मंदिर के समीब एक दिव्य योध्धा की चाया देखी है, जो मा की रक्षा कर रहा होता है
04:58पौरानिक कथा अनुसार जब भगवान शिव माता सती के मृत शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे
05:06तब स्रिष्टी को संतुलन में लाने हेतु भगवान विश्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया
05:14जिन स्थानों पर उनके अंगिरे वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई
05:20माना जाता है कि पावागड में माता सती के दाहिने पैर का अंगिरा था और यही मा महाकाली की स्थापना हुई
05:28यहां मंदिर अन्य मंदिरों से अलग है
05:31यहां मा महाकाली की लाल रंग की प्रतिमा है जिनकी जीब बाहर निकली हुई है जो उनके उग्रस्वरूप को दर्शाती है
05:42माना जाता है कि यह स्वयम्भू मूर्ती है यानि प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई थी मनुष्य निर्मित नहीं
05:49यह स्थान प्राचीन काल से तांत्रिकों और साधकों की सिद्ध भूमी रहा है
05:55यहां रात के समय साधक विशेश साधनाए करते हैं
06:00मंदिर में एक विशाल घंटा लगा है जिसकी ध्वनी किलोमेटरों दूर तक सुनाई देती है
06:06मान्यता है कि इसकी ध्वनी से दुष्ट आत्माएं दूर होती है और मनों कामनाएं पूर्ण होती है
06:14यहां एक अखंड दीपक भी है जो हजारों वर्षों से बिना बुझा लगातार ज़र रहा है
06:21भक्त मानते हैं कि इसकी लौमे मा की दिव्यशक्ती समाहित है
06:27भक्तों के अनुभव बताते हैं कि मा की मूर्ती का स्वरूप दिन में बदलता रहता है
06:33सुभा कोमल और सौमय जबकी रात को उग्र और रौध्र रूप
06:38कई लोगों ने मा की आँखों में तेजस्विता और हल्चल तक महसूस की है
06:43पंद्रवी शताबदी में सुल्तान महमूद बेगडा ने इस शेतर पर आक्रमन किया था
06:50कहा जाता है कि युद्ध के समय देवी का आशिरवाद राजाओं और सैनिकों को मिला
06:56जिससे वे असाधारन बल से लड़े
06:59एक कथा के अनुसार एक अन्य राजा ने मा की उपेक्षा कर दी
07:04और स्वयं को सर्वशक्तिमान घोशित कर दिया
07:07मा ने क्रोधित होकर राज्य को शापित कर दिया
07:11बाद में मुगलों ने आक्रमन किया और पूरा नगर नश्ट हो गया
07:16आज भी मंदिर के आसपास खंडहर और अवशेश उस प्राचीन नगर की निशानिया है
07:22स्थानिय लोगों की मान्यता है कि मंदिर के पास एक गुप द्वार या गुफा है
07:29जो पाताल लोग से जुड़ी हुई बताई जाती है
07:32कहा जाता है कि जो भी इसमें प्रवेश करता है वह कभी वापस नहीं लोटता
07:39कई साधकों और योगियों ने उस गुफा को खोजने का प्रयास किया लेकिन सब विफल रहे
07:46माना जाता है कि यह मार्ग मा के दिव्य लोग या सिद्धों की रहस्य में दुनिया तक जाता है
07:52पावागड मंदिर एक तांतरिक शक्ती स्थल भी है
07:57अमावस्या की रात को विशेश तांतरिक अनुष्ठान होते हैं
08:02तांतरिक मानते हैं कि मा स्वयन प्रकट होकर साधकों को आशिरवाद देती है
08:08कई लोगों ने रात में अजीब आवाजें दिव्य प्रकाश और उर्जा का अचानक प्रवाह महसूस किया है
08:16कुछ भक्तों को ऐसा लगा कि कोई अद्रिश शक्ती उनकी रक्षा कर रही थी
08:22मंदिर के पास एक गुप जर्ना है जिसका जल्दिव्य गुनों से भरपूर माना जाता है
08:29यह जर्ना कभी सूफता नहीं और इसका पानी बीमारियों से मुक्ती दिलाता है
08:35वैज्यानिकों ने भी इसके पानी का परीक्षन किया है और उसमें मौजूद विशेश खनिच तत्वों को अध्भुत माना है
08:44लेकिन जर्ने का स्रोत आज भी रहस्य बना हुआ है
08:49मंदिर की दीवारों पर कुछ प्राचीन शिलालेक हैं जिन्हें आज तक कोई पूरी तरहे पड़ नहीं सका
08:57माना जाता है कि वे गुप तांत्रिक मंत्रों और साधनाओं से संबंधित है
09:02हर वर्ष नवरात्री में एक भव्यर अथ्यात्रा निकाली जाती है
09:08मा की मूर्ती को विशेश रत पर विराज मान किया जाता है और हजारों भक्त उसे खीचते हैं
09:17कहा जाता है कि रत के पहिये कभी कीचर में नहीं फंस्ते चाहे मौसम जैसा भी हो यह मा की दिव्य शक्ती मानी जाती है
09:25स्थानिय जनशृतियों के अनुसार पावागड के च्षेतर में गुप खजाने छिपे गुए हैं जिन्हें प्राचीन राजाओं या तांत्रिकों ने छिपाया था
09:35कुछ लोगों ने खुदाई की कोशिश की लेकिन रहस्यमय घटनाओं के कारण वे प्रयास असफर रहे
09:43मंदिर के पास कुछ विशेश प्रकार के पत्थर पाए जाते हैं जिनमें दिव्य उर्जा होती है
09:49कहा जाता है कि जो सच्चे मन से मा की उपासना करता है उसे ये पत्थर स्वत्र प्राप्त हो जाते हैं
09:58तांत्रिक इनका प्रयोग विशेश अनुष्ठानों में करते हैं
10:03पावागड महाकाली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है बलकि यह इतिहास, शक्ती, तंत्र, रहस्य और भक्ती का अध्भुत संगम है
10:13यहां हर भक्त को एक दिव्य अनुभव, एक अलौकिक पूर्जा और एक अतुल्य आत्मिक शान्ती मिलती है
10:21जो भी व्यक्ति सक्चे मनसे मा महाकाली का आहवान करता है, उसे उनकी क्रिपा अवश्य प्राप्थ होती है
10:29इस पावन स्थल का रहस्य जितना पुरातन है, उतना ही आज भी जीवन्त है
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