00:00कभी समुद्र किनारे खड़े होकर सोचा है कि लहरों के नीचे एक ऐसा पुल है जो भगवान श्री राम के युग का प्रमान देता है
00:21एक ऐसा सेतु जो भक्ति, विज्ञान और रहस्यत तीनों का संगम है आज हम बात करने जा रहे हैं राम सेतु की वो सेतु जो भारत और श्री लंका को जोड़ता है और जिसके पत्थर हजारों सालों से सागर के नीचे एक मौन इतिहास कह रहे हैं
00:42क्या यह केवल धार्मिक कथा है या फिर बास्तव में उस समय के लोगों के पास ऐसी तक्नीक थी जो आज भी इनसान को चौका देती है
00:53वालमिकी रामायन के युधदकांड में लिखा है कि जब भगवान श्री राम लंका पहुँचने के लिए समुद्र के किनारे आएं
01:02तो उन्होंने समुद्र देव से मार्ग देने की प्रार्थना की
01:06तीन दिन की तपस्या के बाद जब समुद्र मौन रहा
01:10तो श्री राम ने अपना धनुष उठाया और कहा
01:13अब अगर तु मार्ग नहीं देगा तो मैं तुझे सुखा दूँगा
01:17दरकर समुद्र देव प्रकट हुए और बोले
01:21प्रभूक मेरे अंदर असंख्य जीव बसते हैं
01:25जदि आप चाहें तो एक सेतु बना लीजिए
01:28मैं स्वयन उस सेतु को संभाल दूँगा
01:31फिर नल और नील जो गिश्व कर्मा के वन्शच थे
01:35उन्होंने समुद्र पर तैरने वाले प्त्थरों से
01:39सेतु निर्मान का कारिय संभाला
01:40कहा जाता है कि उन्होंने पांच ही दिनों में
01:45लगभग एक सौ योजन एक सौ तीस किलोमीटर लंबा पुल बना दिया
01:49कहानी में कहा गया है कि नल और नील जिन पत्थरों पर राम लिखते थे
01:54वो समुद्र में तैर जाते थे
01:57लेकिन आज का विज्ञान इसे कैसे देखता है
02:01कई वैज्ञानिकों ने इसे पमिस्ट स्टोन सिधान्त से जोड़ा
02:05यानी ज्वालामुखी के पत्थर जिन में हवा के छेद होते हैं
02:10जिससे वे पानी पर हलके रहते हैं
02:14लेकिन भारत के दक्षिनी तट पर ज्वालामुखी चटाने मिलना
02:18प्राकृतिक रूप से असंभव है
02:21तो सवाल उठता है क्या इन पत्थरों को
02:24किसी विशेश प्रक्रिया से चार्जड किया गया था
02:28या किसी साउंड फ्रेक्वेंसी से उर्जा दी गई थी
02:32जैसे मंत्रों की शक्ती
02:35रामायन में लिखा है
02:37नाम जबते ही पत्थर तैर गया
02:39क्या यह केवल भक्ती थी
02:42या कोई सोनेक वाइब्रेशन टेक्नोलोजी थी
02:45जो जल के उपर वस्तु को स्थिर रख सकती थी
02:481987 में नासा के उपग्रह लैंड साट ने
02:53एक तस्वीर ली जो पूरी दुनिया में फैल गई
02:56उस तस्वीर में भारत और श्रीलंका के बीच
03:00एक 30 किलोमिटर लंबी पत्थरों की श्रिंखला दिखाई दी
03:04जो पूरी तरह सीधी और सटीक पंक्ती में थी
03:07बाद में अमेरिकी वैग्यानिकों ने इसे आडम्स ब्रिच कहा
03:12लेकिन भारत में इसे सदासे राम सेतु कहा जाता है
03:16जियोलोजिकल सर्वे आफ इंडिया के अनुसार
03:20इन पत्थरों की उम्र लगभग 7000 साल है
03:23जबकि नीचे की रेट केवल 4000 साल पुरानी पाई गई
03:28इसका अर्थ है पहले पत्थर रखे गए
03:31फिर समय के साथ समुद्र ने उन्हें ढक लिया
03:35इतना सटीक कार्य हजारों साल पहले कैसे हुआ
03:39जब आज के इंजिनियर भी इतने स्थिर अलाइन्मेंट नहीं बना पाते
03:43रामायन में वर्णन है कि लाखों बानरों ने
03:47श्रीराम के नेत्रित्व में दिनरात काम किया
03:50कई पुरातत्व विदों का मानना है कि
03:53वानर्क शब्द वास्तव में वैन नार यानी
03:56वन में रहने वाले मानव जाती का संकेत हो सकता है
04:00जो इंजिनियरिंग में निपुन थे
04:03पांच दिनों में 100 किलोमीटर लंबा पुल बनाना
04:07मानव शक्ती से संभव नहीं लगता
04:10संभवत है उस समय मैगनेटिक अलाइनमेंट
04:13एनरजी लेविटेशन या साउंड बेस्ट बॉन्डिंग जैसी
04:17तकनीकों का उप्योग हुआ हो
04:20संस्कृत ग्रंथों में विमाना शस्त्रा और आस्त्रा विद्या जैसे विद्ध्यान मिलते हैं
04:26जो उस युग की अडवांस्ट अंडर्स्टैंडिंग को दर्शाते हैं
04:30शायद राम सेतु का निर्मान उसी डिवाइन साइन्स से हुआ हो
04:35जहां चेतना और उर्जा साथ काम करती थी
04:38भारत के नायट नाशनल इंस्टिट्यूट अफ ओशन टेकनोलोजी ने
04:43समद्र के अंदर सोनार और कार्बन डेटिंग तक्नीक से शोध किया
04:48उन्होंने पाया कि पत्थर कॉरल रीफ पर नहीं टिके हैं
04:52बलकि उनके नीचे कृत्रिन सैंग बेज है
04:55मतलब फाउंडेशन जानबूच कर बनाया गया था
05:00अनेक गोता खोरों ने बताया कि
05:02इन पत्थरों पर कुछ जगह एंशेंट कार्बिन जैसी आकरितिया भी दिखती है
05:08जो संकेत देती हैं कि ये प्राकृतिक नहीं
05:12बलकि हाथ से रखे गए थे
05:14तमिलनाडू के कुछ स्थानिय लोग आज भी मानते हैं
05:19कि उस छेत्र में अजीब चुम्बकिये तरंगे हैं
05:23जो कमपास और रेडियो सिगनल को प्रभावित करती हैं
05:27क्या ये वही एनरजी फीड है जो सेतु के निर्माण में सहायक थी
05:32राम सेतु हमें यह सिखाता है कि
05:35जब मनुष्य का उद्देश्य धर्म हो
05:38तो विज्ञान स्वयन उसका सहयोगी बन जाता है
05:41श्री राम के सेतु का निर्माण केबल तकनीक का नहीं
05:46बलकि चेतना का चमतकार था
05:48हर पत्थर पर राम नाम लिखा था
05:52यानि प्रत्येक कन को डिवाइन फ्रिक्वेंसी से एक्टिवेट किया गया था
05:56आज क्वांटम फिजिक्स यह कहती है
05:59कि हर शब्द और ध्वनी का एक वाइब्रेशन होता है
06:03जो उर्जा को प्रभावित करता है
06:06तो संभव है कि राम नाम की ध्वनी
06:10पत्थर के मोलेकिलर स्ट्राक्चर को हलका बना रही हो
06:14यही कारण है कि यह सेतु सिर्फ पत्थरों का धेट नहीं
06:19बलकि दिव्यता का मूर्त रूख है
06:21जब हम कहते हैं प्राचीन भारत में विज्जान था
06:25तो कई लोग इसे कलपना मानते हैं
06:29लेकिन राम सेतु हमें बताता है कि
06:32विज्ञान और अध्यात्म एक दूसरे के पूरक थे
06:36जहां आज के वैज्ञानिक उर्जा को खोजते हैं
06:41वहां उस युग के रिशी उसे प्राण कहते थे
06:43जहां हम फ्रिक्वेंसी मापते हैं
06:47वहां वे मंत्र उच्चारिक करते थे
06:49श्री राम का युग वह समय था
06:52जब चेतना तक्नीक से उपर थी
06:55और शायद इसी कारण उनका सेतु
06:58आज भी समुद्र की गहरायों में जीवित है
07:01राम सेतु के उपर से जब विमान गुजरता है
07:05तो नीचे दिखाई देने वाली पत्थरों की रेखा
07:09आज भी भारत की आत्मा को जखजोर देती है
07:12ये सेतु केवल समुद्र पार करने का मार्ग नहीं था
07:17बलकि यह विश्वास का पुल था
07:20जहां भक्ती ने भौतिक सीमाओ को लांग दिया
07:23शायद भगवान श्री राम ने ये संदेश देना चाहा कि
07:27जहां सत्य और धर्म साथ हो
07:30वहां समुद्र भी मार्ग दे देता है
07:33राम सेतु केवल इतिहास नहीं
07:37बलकि चेतना का जीवन्त प्रमान है
07:39यह हमें याद दिलाता है कि
07:42जब उद्देश पवित्र हो तो प्रकृती भी साथ देती है
07:47आज की दुनिया तकनीक खोज रही है
07:50लेकिन प्राचीन भारत उस चेतना को जान चुका था
07:54जो तकनीक को नियंत्रित करती है
07:57राम सेतु का रहस्य यही है
08:00कि यह सेतु इंटो से नहीं
08:03भक्ति और उर्जा से बना था
08:06अगर आप ऐसे और सनातन रहस्य जानना चाहते हैं
08:10तो जुड़े रहिए हमारे साथ
08:11अगर इस वीडियो ने आपके जीवन में कुछ मूल्य जोड़ा हो
Be the first to comment