00:00मुरली का सार
00:01संपूर पवितरता द्वारा रुछानी रोयल्टी और पसनेलिटी का अनुभव करते
00:07अपने मास्टर ग्यान सूरे स्वरूप को इमर्ज करो
00:11वर्दान
00:13साथी और साक्षीपन के अनुभव द्वारा
00:17सदा सफलता मूर्थ भव
00:19जो बच्चे सदा बाप के साथ रहते हैं, वो साक्षी स्वतह बन जाते हैं
00:26क्योंकि बाप स्वयम साक्षी होकर पाट बजाते हैं, तो उनके साथ रहने वाले भी साक्षी होकर पाट बजाएंगे
00:33और जिनका साथी स्वयम सर्वशक्ति मान बाप है, वे सफलता मूर्थ भी स्वतह बनी जाते हैं।
00:41भक्ति मार्ग में तो पुकारते हैं कि थोड़े समय का साथ का अनुभव करा दो, जहलक दिखा दो, लिकिन आप सर्व संबंधों से साथी हो गए, तो इसी खुशी और नशे में रहो कि पाना था सो पा लिया।
00:57स्लोगन व्यर्थ संकल्पों की निशानी है मन उदास और खुशी गायब।
01:04अव्यक्त इशारे अब संपन व कर्मातीत बनने की धुन लगाओ।
01:34खाओ पियो, सेवा करो, लेकिन नियारे पन को नहीं भूलो।
01:40ओम शान्ती।
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