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  • 3 months ago
भरतपुर की सुशीला ने रद्दी से एक इनोवेशन कर अपने और अपने जैसी कई महिलाओं के लिए रोजगार दिया. पढ़िए...

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00:00गर पर रखे पुराने अखबार जिसे लोग रद्दी समझ कर बीच देते हैं, उसी अखबार ने जालवार की एक साधारन ग्रामिर महिला की किस्मत बदलती।
00:13असनावर की शुशीला देवी ने नियूस पेपर की कतरनों को हत करगे पर बुन कर ऐसा इनोवेशन किया कि उनके बनाएं लैप्टॉप बैग, टोट बैग और शगुल लिफावे आज अमेरिका तक सप्लाई हो रहे हैं। यही नहीं, उनके इस प्रियोग ने पच्चास ग्
00:43मेरे हस्पेंड करीबन 17 साल पहले इस्पायर हो गए थे, मेरे उपर जुम्हेवारी थी पांच बच्चों की, चार बेटी, एक बेटा था मेरा, उनको पालने के लिए बड़ी समस्या और इती पढ़ाई लिखाए कैसे करा हूँ, इसलिए फिर दीरे मुझे पता चला कैसे �
01:13शुशीला देवी के लिए रोजगार शुरू करना आसान नहीं था, पैसे नहीं थे, संसाधन नहीं थे, और समाज का दबाव अलग, शुरुवात उन्होंने अकेली की, लिकिन धीरे-धीरे महिलाएं जुड़ती गई, सीखती गई और कमाती गई,
01:33सुशीला बताती हैं कि उन्होंने अकबार की पतली-पतली कत्रने काट कर उन्हें धागी के साथ हैंडलूम में इस्तमाल किया, फिर उसी से बनने लगे लैपटॉप बैग, टोट बैग, जुएलरी बैग, शेगुल निफाफे गिफ्ट बैग आ दी, फिर उन्होंने पेप
02:03लिए जाता है, यह हमारे जो निफेपर हैं लोग अपने पेपर पढ़के फेंग देते हैं, उस निफेपर से हमने कटिंग करके वीविंग किया पहले हैं हैं लूम में, उसके बाद हमने यह बनाए सगुन लिफापा है, जो हमें इसको तयार करते हैं, यह इसके कई प्रो�
02:33हमने इस्पेरिमेंट करते रहते हैं, हमने एक दिन सोचा कि जैसे कपड़ा तो हम बनाई रहे हैं, इसको क्यों नहीं हम बादे में पेपर डालके तयार किया जाए इसको, तो हमने वो किया, उसके बाद में हमें किसी ने कहा कि आप डाई करके भी बना सकते हो, हम इंडिको �
03:03उनके प्रोडक्ट की कीमत पच्चास से धाई हजार रुपे तक है, एक्जिबिशन में रोज दस से बीस हजार तक की सेल हो जाती है, सुशीला ने बताया कि जो कभी ताने मारते थे, आज उनके हुनर और हिम्मत की सराहना करते हैं, भरतपूर से ETV भारत के लिए श्यामव
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