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महाभारतकालीन लाक्षागृह के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा, देखें 'अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय'

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00:00ये काल का समसे अग्धुद रहस्य है
00:30ये समय की सबसे अविश्वस्निय पहेली है
00:35पांडवों का लाक्षा ग्रे तो नहीं गया
00:45पर जान बचाने सुरंग में दाखिल होने के बाद कहां निकले पांडव
00:49क्या संभवे सुरंग का दूसरा सिरा आज भी हजारों किलोमीटर दूर मौजूद है
00:59इतिहास ने जिस तत्य को नकारा क्या उस अकल्पनिय पहेली का जवाब भूगोल देगा
01:10नवस्कार में हूँ श्पीता सिंग और आप देख रहे हैं अद्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय लाक्षा ग्रे एक ऐसा महल
01:28जिसे दुर्योधन ने इस उद्देश से बनवाया था कि पांडवों को जला कर मार डाले
01:33ये लाक से बना हुआ महल था जो बेहजवलन शील था कहते हैं पांडवों को इसके बारे में पता चल गया
01:40और उन्होंने वहां से एक सुरंग खोद दी जिससे वो वहां से बचकर निकल गए
01:46जिस जगे पर महाभारत में उस महल के होने का उलेक है कहते हैं वो जगे वर्तमान का बागपत है
01:56वहां से एक सुरंग भी जाती है पर दूसरा सिरा कहां खुलता है ये कोई नहीं जान पाया
02:02आज हम आपको बताएंगे क्या लाक्षा ग्रिह की गुफा का दूसरा सिरा मिल गया है
02:09क्या मिल गया लाक्षा ग्रिह का दूसरा सिरा
02:22क्या मिल गया लाक्षा ग्रिह का वो हिस्सा जहां से जान बचा कर बाहर निकले थे पांडव
02:50अच्छा ग्रिये कि अब चोड़े थे तो हम इसमें बड़े वी आ तो इसमें दो तीन कम रेता हम जा सकते थे चले जाते थे
03:04क्या सुलच गई पांच अजाद साल कुरानी लाक्षा ग्रिए की पहिंद
03:13क्या पांडवों ने खोदी थी दुनिया की सबसे लंबी सुरा
03:17क्या लाक्षाग्री के दोनों छोर के बीच हजार किलोमीटर का फासला था
03:36क्या महाभारत का समसे बड़ा रहस्य अब सुलज गया है
03:41पांडवों को जला कर मारने की साजिश जिस लाक्षाग्री में रची गई
03:52उसके प्रत्यक्ष प्रमान तो आज भी मिलते हैं लेकिन जिस सुरंग में से जान बचा कर पांडव निकले
03:58उस सुरंग का पूरा सच आज तक सामने क्यों नहीं आया
04:02यहां का पुराता तविक उत्खनन खुदाई की और उस खुदाई में यहां पर बहु शांसकर्तिक विरासत के यानि की सभ्था के मानव सभ्था के प्रमाण
04:12यहां पर उसकी लेयर भी मिली है उसके बहुत सारे अच्छे पैटरन उस खुदाई में मिले हैं अवशकता है कि
04:25कि एसाई को जो खुदाई हुई है उसकी रिपोर्ट को जल्दी से जल्दी पब्लिश करे और पूरे विश्व को बताया कि यह वही स्थान है कि जिसका महाभारत में वर्ना वार्नवरत के तोर पे जिक्राया है
04:36आज हम आपको लेकर चलेंगे द्वापर्यूग के उस लाक्षाग्रे में जिसकी कहानी अद्भुत है
04:46आज हम आपको दिखाएंगे अद्भुत लाक्षाग्रे के वो साक्षिय जिनका इतिहास और विश्वस्निय है
04:58आज हम आपको सुनाएंगे उस लाक्षाग्रे की वो पूरी कहानी जिसके नव होने पर धर्म और अधर्म के बीच का युद्ध और कल्प्रिया ही रह जाता
05:12महाभारत के अनुसार पंड़वों ने दुर्योधन से पांच गाओं मांगे थे
05:22बर्नावा उन्हीं पांच गाओं में से एक था उस दौर में इसे व्याग्र प्रस्त कहते थे यानि जहां बाग्वों का वास हो
05:30इसी जगे पर वो लाक्षा ग्रिह भी था जहां पांड़वों को मार डालने की कोशिश हुई थी
05:36यहां के रहने वाले लोग शुरुआत से इस बात को कहते थे पर कभी शोध की कोशिश नहीं होते थी
05:43देश की राज्ठानी दिल्ली से 53 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश का बागपत
05:49और बागपत में मौझूद गाउं बर्नावा जिसे महाभारत में वर्नावत के नाम से पुकारा गया है
05:55वो गाउं जो महाभारत की सच्चाई के अद्भुत साक्षे दिखा रहा है
05:59वो गाउं जो महाभारत काल में बने लाग पे उस महल की कहानी बया कर रहा है
06:04जो गवाही देता है कौरवूं के शड्यंद्र की और पांडवूं के अविश्वस्नियप पलायन की
06:10पिछले दिनों हमारे यहां पे महाभारत कालीन पुरा उसेस मिले है
06:15यहां पर कई विश्य सग भी आ चुके हैं और उन्होंने यह बताया है कि यहां पर PGW पोट्री और OCP पोट्री है जो जिससे सुनस्चित होता है कि यहां पर महाबारत का लिन सब्याता है
06:27बड़े बड़े पताते थे कि यहां इसका नाम ही खंडवारी इसी लिए पड़ा हुआ था कि एक हंडवण था और इसमें यहीं पर गुफाने के लिए आगर इसी घट्टा है जिसी घट्टे को बुद्राम की कुटी भी बोलते हैं
06:40है और यहीं वो जगह है जहां कौरमों ने पंड़ों को जला कर मारने के लिए लगशा ग्रे का निर्मान किया था लगशा ग्रे यानिि लाक से बनी इमारत जो आसानी से जल जाती है
06:53स्थानिय लोग कहते हैं लाक्षा ग्रे के निशान आज भी मौझूद है
06:58जानकार बताते हैं कि ज्वलन शील लाक से बना होने के कारण अब भवन का आवशेश मिलना असंभव है
07:21लेकिन उसके टीले पर स्थित होने का वरणन था और यहां मिट्टी का टीला साक्षाथ था
07:27ASI की कुछ बोर्ड भी थे जो इस बात की तस्दीक कर रहे थे कि जिस लाक्षाग्रे का जिक्र महाभारत में मिलता है वो कभी मुम्किन है यहीं पर था
07:37सबसे पहले एक छोटा सा मड लंप जिसे हमने सिटी एक्सरे किया उस एक्सरे में कॉपर के रिमेंस हमें दिखाई दिये
07:45और कॉपर में नेल्स जो कॉपर के नेल लगाए गए थे जो लकडी में ठोकने के लिए उसके रिमेंस मिले क्योंकि मिट्टी तो डिकंपोज हो चुका लेकिन उसके रिमेंस मिले वो हमारे लिए एक बहुत इंसाइट देखे गया जिसके कारण बाकी चीजे हम लोग आइ�
08:15किंग यह एक्सपेरिमेंट था उसके बाद हमने मेडी सिटी में कई और सेंप्लिंग को सीटी स्कैन किया एक्सरे टेकनिक यूज किया 3D फोटोग्राफी हमने यूज किया पहली बार तो यह सारे टेकनलोजिकल जो एडवांसमेंट आये हैं और जो आर्कियोलजी में नहीं
08:45पहले से पता चल गया था और वो एक सुरंग के रास्ते से वहां से निकल गए थे हमारे सामने मिट्टी की एक कच्ची सुरंग थी मान्यता है कि इसी सुरंग का इस्तेमाल करके पांडव यहां से निकले थे
09:02लाख के महल के जलने के बाद जो गुफा बनाई गई जिस गुफा से निकल करके पांडवो ने और उनकी माता ने अपनी जान बचाई और बाद में फिर उन्होंने महाबारतियुद किया तो उस गुफा के भी एविडेंस यहां मिलते हैं
09:16यहां पर इस लाख कम अंडव टीले पर दो गुफाएं हैं दो सीरे हैं कोई यानि की टीले के नदी के किनारे होने की वज़ेसे कटान हुआ होगा तो दो सीरे इस गुफा के दिखते हैं
09:28हम आपको बताएंगे कि इस सुरंग का दूसरा सिरा कहां पर खुलता है
09:56लेकिन इस सुरंग के बारे में कहते हैं कि यहीं से होकर पांडव लाक्षाग्रे से जीवत बाहर निकले थे
10:02इसकी लंबाई इतनी मानी जाती है कि कोई अंजान अगर इसमें दाखिल हो जाए तो कभी बाहर नहीं निकल सकता यह माननेता है
10:10यही कारण था कि लोग कभी इसमें जाने की कोशिश भी नहीं करते हैं
10:15अब समय के साथ साथ सुरंग कई जगे धसने के कारण बंद भी हो गई है
10:20इस सुरंग का आकार इतना नहीं था कि उसमें खड़े होकर चलना संभब हो पाए
10:27हमने कोशिश की कि कुछ जुक कर आगे जाएं लेकिन मुश्किल से 100 फीट आगे बढ़ने में ही ऑक्सिजन की ऐसी कमी महसूस हुई कि आगे बढ़ना मुश्किल लगा
10:37कच्चे के नारूं के कारण ये डर भी बना हुआ था कि कहीं वो दिवारें कहीं ढह न जाएं लिहाजा हम बाहर आ गए बरनावा गाओं में लाक्षाग्रे कृष्णा और हिंडन नदी के संगम पर स्थित है दरसल ये पूरा इलाका मिट्टी के एक तीले पर बना हुआ है त
11:07हिंदू और मुस्लिम पक्षों में विवाद भी हुआ अदालत के दर्वाजे खट-खटाए गए और हिंदूों की पक्ष में फैसला आया और कभाई होने के बाद यह पाया कोड़ने इस बात के लिए कि यह वास्तों में कब्रिस्तान नहीं है और यह करीब 108 बी के जमीन है
11:37सब्सक्राइब के लिए कुछ जमीन यह बनी भाकी थी तो बनी भाकों भी के भी खिलाप यह गए मुकदमा लड़ा हमारे इसने हिंदू पक्षना जो है तो यह माना गया कि नहीं यह जमीन ही नहीं कि यह सौ फीट उचे और 30 एकर भूमी क्षेत्र फल में फैले टीले के र
12:07जहां पन्डवों को जलाने का प्रयास किया गया था।
12:37तक कई अलग-अलग विद्वानों ने उसके डेट्स किये हैं और दूसरी महत्वपुर्ण चीज ये है कि
12:44एपीक्स जो हमारे हैto jino की चर्चा है stork currently जिस तरह का life style वह लोग जी रहे थे
12:53जो रत की चर्चा है उस समय जो वेपन की चर्चा है उस समय की ज्ल Schritt है
12:59है उसकी पुस्ती उस ज्न की पुस्ती यहां के finding से साफ दिखाई देता है कि उस
13:06कि उस तरह के वेपन्स हमें मिले हैं, एंटीना सोर्ड मिला है, शील्ड मिला है, हैलमेट मिला है, चेरियेट मिला है, तो इस तरह की जो चीजे मिली हैं, जो हमारे एपिक्स में वर्णन है, उस से काफी मैच खाता है.
13:24बाहरत में पहली बार सिनोली से और तिलवाडा से दो इस्थानों से युद्रत मिले हैं, युद्रत मिलना एक बाहरतिये इतिहास और पुरातत्व के विशय के जानकारों के लिए पहला ऐसा एक आश्चरी जोने घटना थी, जिस समय युद्रत चलते थे तो एक आदमी ही उस
13:54कि महाभारत इन ही एरियाज के अंदर इसी छेतर के अंदर हुआ है, और यहीं पर उस सब्भेता के लोग और कोरव और पांडव आते जाते रहे हैं, उनहीं का प्राचीन कुरू जनपद है, उस कुरू जनपद के एविडेंसिस यहां पर प्रचुर मातरा में बागपत के �
14:24पांच पुत्र थे, लाक्षाग्रे में आग लगने पर पांडव द्रौपदी समेत सुरंग के रास्ते सक्षल बाहर निकल गए, लेकिन वो आदिवासी परिवार उसी में जल कर खाक हो गया, पांच लोगों की जले हुए शव मिले, तो हस्तिनापुर तक ये संदेश गया
14:54तो पता चला कि यहां लाक्षाग्रे से जुड़े निशान आज भी मौझूद है।
15:24है के सोर्षिज होते हैं, एक होते हैं लिटररी सोर्षिज, एक जोग्रफिकली और एक प्राचीन पुरा तात्यविक अव्षिज, तो हम देखते हैं कि माहबाहरत के अंदर जिन इस्थानों का वर्णन है, हस्तनापुर जो उनकी राजधानी थी, वो इस छेतर के पस्चिम
15:54के बीच में ये वार्नावरत, जिसका की माहबाहरत के उद्योग परव के अंदर वर्नन मिलता है, वो वार्नावरत ये इस्थान है, और यहां से पेंटिड ग्रेविर मिल रहा है, तो पुरातात्विक अवशेज भी हैं, जब जोग्रफी एक बात को प्रूव करती है, और �
16:24लाखादी के प्रमाण तो नहीं मिलते हैं, लेकिन ASI ने 2019 में जो एक्सकेवेशन बर्नावा का किया है, उनको अतिसिग्र है, उनको फब्लिश करना चाहिए, पब्लिक में लेके आना चाहिए, ताकि पूरे देश को और विश्व को पता चल सके कि ये वही इस्थान है, जह
16:54नेत्रविहीन धृत्राष्ट्र हस्तिनापूर के महराजा थे, उनका बेटा दुर्योधन उनके बाद हस्तिनापूर का राजपाट चाहता था, लेकिन उसके इस रास्ते का सबसे बड़ा रोडा थे पांडव, जो दुर्योधन के चचेरे भाई थे, पांडव, जनता के ब
17:24और उसके मामा शकुनी ने पांडवूं की हत्या की योजना बनाई
17:27वार्णावरत जो आज का बागपत है
17:35वहां दुर योधन और मामा शकुनी के शडियंत्र के तहट
17:38एक महल बनवाया गया जो लाख का था
17:41लाख एक प्रकार के कीट से प्राप्त होने वाली प्राकृतिक राल है
17:48जो बेहज वलनशील होती है
17:50लाख कीट कुछी पेड़ों पर पनपता है जो भारत, बर्मा और थाइलिंड में पाए जाते हैं
17:56एक समय लाख का उत्पादन सिर्फ भारत और बर्मा में ही होता था
18:11जब मुहर लगाए जाती है तो वहाँ इस्तमाल किया जाता है
18:14लाख के महल में पांडवों को जला कर भार देने की योजना थी
18:21लेकिन पांडवों को इसकी भनक विदोर के माधियम से हो चुकी थी
18:26कहा जाता है कि महाबली भीम ने तभी एक सुरंग खोदनी शुरू कर दी थी
18:31जो लाक्षा ग्रे के अंदर से शुरू होती थी
18:34एक दिन प्यूजना के अनुसार लाख के महल में उत्सव हुआ
18:43जिसके बाद भीम ने लाक्षा ग्रे में आग लगा दे
18:47मा कुंती सहित सभी पांडव सुरंग के रास्ते सुरक्षित बाहर निकल गए
18:54दुर्योधन को लगा कि पांडव उसी लाक्षा ग्रे में चल कर भस्म हो गए
19:00लेकिन बाद में पता चला कि पांडव सुरक्षित बाहर निकल गए
19:04बागपत की तस्मीरें हमने आपको देखाई हमने परखा कि क्या वाकई ये वो लाक्षाग्रे हो सकता है
19:13पांडव लाक्षाग्रे से जान बचा कर एक सुरंग के रास्ते से निकल गए
19:19सुरंग का दूसरा सिरा कहा था पांडव सुरंग से निकले तो कहा गए
19:23इसको लेकर अलग-अलग मान्यताएं है बिहार के शिवहर में एक देकुली धाम है कहा जाता है कि पांडव जब जान बचाकर लाक्षागरे से निकले तो वो जिस स्थान से निकले वो यही शिवहर का देकुली धाम था पर क्या ये संभव है कि इतनी लंबी सुरंग खोदी �
19:53हुआ ही तेमीलेगा जाता है ये है बिहार के शिवहर जिले का देकुली धाम की पुजारियों का दावा है कि लाकषाग्रे से पांडवों के निकलने का स्थान यही था
20:13तो क्या उत्तर प्रदेश के बागपत में जिस लाक्षा ग्रे के अवशेश पाए जाते हैं उसका एक सिरा बिहार के देकुली धाम में है
20:24बागवत में जहां लाक्षाग्रे के अंदर सुरंग का मोहाना मिलता है
20:31वहां से देखुली धाम की दूरी करीब 1100 किलोमीटर है
20:35क्या ये संभव है कि 5000 साल पहले 1100 किलोमीटर लंबी सुरंग खोदी गई हो
20:43क्योंकि इस बात को लेकर दावे किये जाते हैं कि बिहार के शिवहर का देखुली धाम ही लाक्षाग्रे की सुरंग का निकास द्वार्ट
20:54लक्षाग्री से जुरा हुआ मंदिर है पांचो पंडब का जो है दिरुप्ति का लाका मकान था गड़ था इस जगह और जो है पाचो पंडब जो है इसी रास्ते से जो गए हुए पताल का रास्ता था था
21:09महाबहरत को लेकर बहुत सारे मित पूरे हिंदुस्थान के अंदर पूरे भहरत देश के अंदर है, क्योंकि महाबहरत तो रामायं दो ऐसे महाकाव्य
21:16हैं जिनके प्रती लोगों का बहुत बड़ा रुज़ान है जहां तक बिहार के स्योपूर का
21:21माइस्थान है उसके बारे में भी कुछ किवधन्तियां है वहां से कुछ प्राचीन पीरिड के कुछ
21:28evidence मिलते हैं इसी तरह से उत्राखंड के अंदर चकराता के पास भी ऐसा
21:33स्थानिये लोगों और दूर दराज से आते लोगों के बीच देकुली धाम को लेकर बड़ी मान्यता है वो इसे भगवान शिव से जोड़ते हैं साथी महाभारत काल से
21:50से इस्थान के जुड़ाओ का उलेख करना नहीं भूलते हैं कि दंती है कि महाभारत काल और रवान काल से देखते हुए पर सुराम के द्वारा यह निर्मिक सिवलिंग है और लोगों में काफी यहां मान्यता भी है कि लोग जो भी यहां सच्चे मन से आते हैं उनका बावा
22:20लोगों का ये भी मानना है कि पांडव फिर इसी स्थान पर लंबे समय तक छुप कर रहे हैं जिसके कारण दुर्योधन को पांडवों के जिन्दा होने का पता ही नहीं चल पाया
22:32आज के दौर में एक सुरंग को बनाने में सालों की मेहनत लगती है कई बड़ी-बड़ी मशीनों की जरूरत होती है आधुनिक तकनीक की जरूरत होती है बड़ी तादाद में मजदूर और इंजीनियर लगते हैं तब जाकर एक सुरंग तयार होती है हम महा भारत काल की यह
23:02किलोमीटर से ज्यादा लंबी सुरंग पर क्या यह मुमकिन है क्योंकि आज की तारीख में भी अगर हम देखें तो सबसे लंबी सुरंग 57 किलोमीटर लंबी है जो स्विजलिंड में है तो क्या हम ये माने कि उस दौर में इंजिनियरिंग बहतर थी या फिर ये केवल मानिता�
23:32कभी परिवहन विकास के लिए, कभी दुश्मनों से बचने के लिए, कभी जेल से भागने तक के लिए
23:38दुनिया में सुरंगे हमेशा से बनाई जाती रही है
23:41कुछ इंजिनेरिंग का चमतकार नजर आती है, कुछ मानविय जरूरत
23:45लेकिन दुनिया की सबसे लंबी सुरंग की बाद जब आती है, तो एक सुरंग बाकियों से आगे निकल जाती है
23:51दुनिया की सबसे लंबी सुरंग, स्विजिलन की गोथर्ड बेस सुरंग है
23:59ये एक रेलवे सुरंग है
24:02स्विस आल्प्स में 57.1 किलोमीटर की लंबाई के साथ दुनिया की सबसे गहरी और सबसे लंबी रेलवे सुरंग 2016 में बन कर तयार हुई थी
24:13इसे बनाने में 17 साल से अधिक का समय लगा था
24:17तो क्या ये संभव है कि आज से हजारों साल पहले उत्तर प्रदेश के बागपद से शुरू होकर एक सुरंग प्रयागराज से होते हुए बिहार के शिवहर में खुलती हो
24:29क्या इतनी लंबी सुरंग खोदी जा सकती है और अगर खोदी गई तो इसको खोदने में कितना समय लगा होगा कैसे खोदी गई होगी इतनी लंबी सुरंग
24:40लोगों की मानिताओं की बातें करते हुए हमने दुनिया की उन सुरंगों का भी रुप किया जो बिना किसी मशीन के किवल हाथों की मदद से खुदी गए
24:54चीन में मौझूद बारसों मीटर लंबी गोलियांग सुरंग को 13 ग्रामीनों ने मिलकर खोदा
25:011972 में काम शुरू हुआ, 77 में खत्म हुआ, यानि काम पूरा हुने में 5 साल का वक्त लगा
25:07जापान में मौझूद 3.8 किलो मीटर लंबी कावा गुजी को आराकुरा सुरंग को 1690 में बनाना शुरू किया गया
25:16इसको पूरा होते होते 170 साल लगे, इसे बनाने में कुल मिलाकर एक लाख लोग लगे थे
25:23जापान की ही 877 मीटर लंबी ओल्ड नकायामा सुरंग 1933 से 1949 के बीच यानि 16 साल में तैयार हो पाई
25:33सुरंग अगर छोटे आकार की है तो वो हाथ से खोदी जाती है क्योंकि मिट्टी नरम होती है
25:41लेकिन एक निश्यत आकार और विशेशताओं वाली लंबी सुरंग बनाने के लिए एक अलग दिश्टिकोर बड़ी मशीनों की आवशक्ता होती है
25:49आज से हजारों साल पहले क्या एक लंबी सुरंग लाक्षा ग्रे से निकलने के लिए खोदी गई थी
25:57मुम्किन है इस सवाल के जवाब के लिए कुछ और शोध की आवशक्ता हो
26:03लेकिन मान्यताओं में ये एक ऐसी अकल्पनिय सुरंग की कहानी है
26:08जो सबके मन में श्रद्धा के रूप में भी दर्ज
26:17महर्शी वेद्व्यास ने महाभारत के बारे में स्वयम कहा है
26:22यन्यहास्ती न कुत्रचित यानि जिस विशय की चर्चा इस ग्रंत में नहीं की गई है
26:28उसकी चर्चा कहीं भी उपलब्ध नहीं है
26:31पूरे महाभारत में एक लाख से ज्यादा शलोक हैं जो युनानी महाकावियों इलियड और ओडिसी से परिणाम में कहीं अधिक बैठते हैं
27:01हजारों वर्ष के लंबे काल खंड ने भले महाभारत काल की निशानियों को अतीत की गर्द के नीचे छुपा दिया हो
27:09लेकिन जब भी खोजी नजरे उनके सुबूत तलाशती हैं तो हर वो स्थान और निशानिया सहज ही मिल जाती है
27:20जिनका उलेक्त महाभारत महाकावियों में किया गया है
27:24आज दिल्ली में अधिकान शिमारते मुगल काल की गवाही देती है
27:36लेकिन जमीन में दफन दिल्ली का इतिहास बताता है कि मुगलों से पहले राजवंशों
27:42और राजवंशों से पहले महाभारत का इतिहास दिल्ली का इतिहास रहा है
27:46सब्वेताओं के प्रमानभी तक हमें यहां मिले हैं
27:51जिसमें हम एक सबसे पहले है प्री मौरेकाल
27:55फिर आता है मौरेकाल जिसको हम तीसरी शताबदी इसाब पूरू से लेके आते हैं
28:01उसके बाद शूंग काल, फिर कुशान काल, गुप्त काल, उत्तर गुप्त काल
28:06उसके पश्चात राजपूत काल आता है और फिर सल्तनत काल और मुगल काल ये नो काल के हमें पास प्रमाण है और उपर के सर्फेस लेवल से कुछ बिटिश पीरेट के भी हमें पास कुछ प्रमाण यहाँ पर उपर उपर है
28:19महाभारत में उनलेक मिलता है कि राजा पांडू की मृत्यू के पश्चात जब पांडव हस्तिनापूर लोटे तो कौर्वों से उनका विवाद शुरू हो गया
28:35तब धृत्राश्च्र ने पांडवों को हस्तिनापूर से दूर खांडव वन्परस्थ का क्षेत्र दे दिया था
28:41गवान श्री कृष्ण दौनों के बैल विशर थे वो यूद्ध नहीं चाहते थे
28:50इसलिए दौनों के बीच में पांडवों के बीच में पहुँच करके हस्तिनापूर में
28:55उन्होंने संधी कराना चाहा कि आप लोग संधी कर लीजिए
29:00आप हस्तिनापूर में रहिए पांडवों को रहने के लिए पांच गाउं दे दीजिए
29:05दुर्योधन नहीं माना बोले एक इंच भी धर्ती का बोनी देंगे तो यही आहांकार यहां से उत्पन हुआ
29:13और अहांकार जब उत्पन हुआ तो भगवान श्री कृष्ट ने कहा हे धर्तराष्ट कम से कम इनको छोटी सी जिगए दे दीजे कोई छोटा सा स्टेट राज दे दीजे फिर भी बात नहीं बनी तो कहा इनको जंगल ही जाना पड़ेगा
29:33तो पांडव जंगल के लिए चल दिये और जंगल में आप जानते हैं इसका नाम था पहले खांडव प्रिस्ट जंगल इंद्र प्रिस्ट नहीं जो बहें कर पहाड़ियों से जंगलों से पेड़ों से घिरा हुआ था यह जगए तो उस जगए पर ये लोग अपने जंगल म
30:03इंद्र प्रिस्ट नाम से बना खंडव प्रिस्ट से क्या हुआ इंद्र प्रिस्ट
30:07महा भारत की लड़ाई हस्तिनापूर के सामराज्य के लिए लड़ी गई थी
30:17खोज करने पर पता चलता है कि हजारों वर्ष पहले गंगा तट पर वसा हस्तिनापूर मेरट के पास एक सम्रिध राज्य हुआ करता था जिसकी सीमाएं दिल्ली और हर्याना तक फैली हुई थी
30:29हजारों साल बीतने के बाद गंगा ने अपनी दिशावद ली और अब वो मौजूदा हस्तिनापूर से करीब आठ किलोवीटर दूर ही
30:39भीश्म पितामः को गंगा पुत्र भी इसी संदर्भ में कहा जाता था और यहीं कुरुवंशियों का वैभवशाली महल हुआ करता था
30:47शासर की अधिकार को लेकर हर्याना के कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध लड़ा गया
30:53ये युद्ध अठारा दिनों तक चला था जिसमें अठारा हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए
30:57और वैदिक सभिता लगफ़ पूरी तरह नश्ट हो गई ये जानकारी भी दी जाती है
31:02युद्ध हुआ और युद्ध छेत्र अठारा दिन तक एक दिन नहीं अठारा दिन अठारा दिन तक युद्ध चला जिसमें कि काफी एक्छोनी सेनाय मारी गई हैं धान जन तन मन और येश कीरती बिकास का हानी हुए
31:21युद्ध में विजय पाने के बाद पांडवों ने हस्तनापूर को ही अपनी राजधानी चुना और शासन किया लेकिन गंगा जी ने आई बाड के कारण जल्द ही एक शेत्र ढूबने लगा तो पांडवों ने उत्तर प्रदेश के कौशामभी को अपनी राजधानी बनाया
31:51यही वो जगे है जहां कभी पांडवों का महल हुआ करता था इसी जगे को अब उल्टा खेडा कहा जाता है दावा है कि गंगा जी की बाड में जब हस्तनापूर डूबा तो वो महल भी डूब गया और उसकी जगे मिट्टी के टीले ने लेम जो यह टिल्ला है यहां पर प
32:21जब सब कुछ पांडवराज कताम हो गया तो गंगा परल आई जब गंगा का दायरा बेस किलोमेटर के दायरे में गंगा जी हमारी यहां बहती थी तेल लेके बगल से लगी वी तो उनकी परल आई और वो सारे अस्तनापूर को पाहए के लिए
32:37बागपत जहां लाक्षा ग्रेह के सुबूत मिलते हैं वहीं सिनौली गांग में जब खुदाई हुई तो पूरे का पूरा महाभारत का इतिहास ही आँखों के सामने आ खड़ा हुआ
32:55माना गया कि ये अवशेश हजारों साल पुराने है और किसी प्राचीन सब्विता की ओर इशारा करता हुआ
33:21लेकर इनका संबन्द माभारत के पात्रों से भी हो सकता है इस तरफ किसी का ध्यान नहीं गया
33:27उप महादीव में पहली बार ऐसा हुआ कि इस तरह का बर्यल सिस्टम प्रकाश में आया जिसमें न सिर्फ कौफीन है और कौफीन के उपर डेकुरेशन है बलकि उसके साथ-साथ और बिलॉंगिंग्स जैसे चैरियेट है जिसको हम हिंदी में रथ कह सकते हैं तो रथ भी र
33:57उने चांधी के आपूशन मिला तलवारी मिली कटार मिली और मिला एक रथ रथ की पूरी आकरिती सलामत थी पहियों का पूरा धाचा था और तो और वो जुआ भी सलामत था जिसमें घोड़े जोते जाते थे यह अद्भुत खोज है क्योंकि भारतियों महाद्वीप में अ
34:27एक बर्ष के अग्याधास का समय काटा
34:29जब मुकश्मीर के ही उधंपुर में क्रिमची गाउं है जहां कहा जाता है कि पांडव जब अखनूर से कीचक का वद करके आए
34:56तो शेश अग्याधवास काल यहीं इसी गाउं में व्यतीत किया
35:00बिहार के राजगीर में वो स्थान आज भी मौझूद है जिसके बारे में ये कहा जाता है कि यहां भदवान श्रीकृष्ण के रत के पहियों के निशान है
35:23और यहां वो जगे भी है जहां के बारे में मान्यता है कि भीम ने जरासंद का बद किया था
35:27देख के तो लगता है जैसे कि शायद कोई रत यहां से गुजरा हो और उसके लिए शोध करना पड़ेगा पर क्या यहां पर पूरा खुदाई हुई एक्सकवेशन के बाद मिट्टी हटा कर ऐसा दिखा
35:37हर्याना की कुरुक्षेत्र का बरणन महाभारत में इस रूप में मिलता है कि यहीं संपूर्ण युद्ध लड़ा गया था और यहीं भागवान श्री कृष्णी ने गीता का उपदेश दिया था
36:07महाभारत दरसल चंद्रवंशी और सूर्यवंशी राजाओं के बंते बिगड़ते संबंधों की गाथा है
36:32जिसके इर्दगेट पूरी भारतिय वैदिक सभ्यता सिम्टी हुई है इतिहास कारू ने इसे महा काव्य से आगे बढ़ने नहीं दिया जबकि अब जमीन से निकलते सुबूत इस बात की गवाही दे रहे हैं कि महा भारत कालपनिक काव्य नहीं बलकि भारत वर्ष के इतिह
37:02जिसके इतिहास के इतिहास के महा भारत वी together
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