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'नवंबर में भारत ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की', 'मन की बात' में बोले PM मोदी

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00:00नवंबर का महिना बहुत सी प्रेणाय ले कराया। कुछ दिन पहले ही 26 नवंबर को सम्विधान दिवस पर सेंटरल हॉल में विशेश कारकम का आयोजन हुआ।
00:16मंदे मात्रम के 150 वर्स होने पर पुरे देश में होने वाले कारकमों की शांदार शुरुवात हुई।
00:2225 नवंबर को योध्या में राम मंदी पर धर्म ध्वजा का आरोहन हुआ।
00:28इसी दिन कुरुक्षेत्र के जोती सर में पांच जन्यस मारक का लोकारपन हुआ।
00:34साथियों, कुछ दिन पहले मैंने हैजराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीफ इंजिन MRO फैसिलिटी का उधाटन किया है।
00:44एरकाप्स की मैंटेनंस, रिपेर एंड ओवर हॉल के सेक्टर में भारत ने ये बहुत बड़ा कदम उठाया है।
00:54पिछले हपते, मुंबए में एक कारकम के दोरान, आएनेस माहे को भारत की नाउसेना में सामिल किया गया।
01:03पिछले ही हपते, भारत के स्पेस एकोसिस्टिम को स्कायरूट के इंफिनिटी केंपस ने नई उडान दी है।
01:13ये भारत की नई सोच, इनोवेशन और यूथ पावर का प्रतिविम बना है।
01:20साथ क्यों? क्रिशिक शेत्र में भी देश ने बड़ी उपलब्दी हासिल की। भारत ने 357 मिलियन टन के खाद्यान उतपादन के साथ एक एतिहास्यक रिकार्ड बनाया है।
01:33357 मिलियन टन, 10 साल पहले की तुलना में भारत का खाद्यान, उत्पादन, 100 मिलियन टन और बढ़ गया है, खेलों की दुनिया में भी भारत का पर्चम लहराया है, कुछ दिन पहले ही भारत को कॉमन वेल खेलों की मेजबनी का भी अलान हुआ, ये उपलब्धियां देश की है
02:03ऐसी उपलब्धियों को, लोगों के सामुहिक प्रयासों को, जन सामाने के सामने लाने का एक भेतरीन मंच है, साथियों, अगर मन में लगन हो, सामुहिक शक्ती पर, टीम की तरह काम करने पर विश्वास हो, गिर कर फिर से उठखड़े होने का साहस हो, तो कठीन से कठीन का
02:33उस दौर की कलपना करिये, जब सेटेलाइट नहीं थी, जीपियस सिस्टम नहीं था, नेविगेशन की कोई सुविधाई नहीं होती थी, तब भी हमारे नाविक बड़े बड़े जहार लेकर समंदर में निकल जाते थे, और ताइस थानों पर पहुंचते थे, अब समंदर स
03:03संचार की वैसी विवस्ताएं हैं, फिर हम कैसे आगे भढ़ेंगे, साथियों, कुछ दिन पहले सोशल मिडिया पर एक वीडियो ने मेरा ध्यान कीचा, ये वीडियो इस रो की एक अनोखी ड्रोन प्रतियोगी ताका था, इस वीडियो में हमारे देश की उवा, और खासकर ह
03:33कुछ पल संतुलन में रहते थे, फिर अचानक जमिन पर घिर पड़ते थे, जानते हैं क्यों, क्योंकि यहां जो ड्रोन उड़ रहे थे, उनमें GPS का सपोर्ट बिल्कुल नहीं था, मंगल गरह पर GPS संभव नहीं, इसलिए ड्रोन को कोई बाहरी संकेत या गाइडेंस नहीं म
04:03इसलिए ड्रोन को जमीन के पैटर्न पहचानने थे, उचाइम आपनी थी, बाधाएं समझनी थी, और खुद ही सुरक्षित उतरने का रास्ता ढूनना था, इसलिए ड्रोन भी एक के बाद एक गिरे जा रहे थे, साथ्यों इस प्रतियोगीता में पूर्णे के युवाओं क
04:33कई बार के प्रयास के बाद इस टीम का ड्रोन मंगल ग्रह की परिस्तिती में कुछ देर उड़ने में काम्याब रहा, साथ्यों ये वीडियो देखते हुए मेरे मन में एक और द्रश्य उभराया, वो दिन जब चंदरयान टू संपर्ग से भार हो गया था, उत दिन पुरा �
05:03कानी, उसी दिन उन्हें ने चंदरयान 3 की सफलता की कानी लिखनी शुदू कर दी, यही कारण है कि जब चंदरयान 3 ने सफल लेंडिंग की, तो वो सिर्फ एक मिशन की सफलता नहीं थी, वो तो असफलता से निकल कर बनाए गए विस्वास की सफलता थी, इस वीडियो में �
05:33निल्कों के समर्पन को देखता हूं तो मन उच्छा से भर जाता है युवाओं की यही लगन दिख्सित भारत की बहुत बड़ी शक्ति है
05:42मेरे पैरे देश्वासियों आप सभी शहत की मिठास से जरूर परिचित होंगे
05:50लेकिन अक्सर हमें यह नहीं पता चलता इसके पीशे कितने लोगों की मेहनत हैं कितनी परंपराएं हैं और प्रकृति के साथ कितना सुन्दर तालमेल है
06:03साथ क्यों जमु कश्मीर के पहड़ी इलाकों में वन तुलसी यानि सुलाई सुलाई के फुलों से यहां की मदुमख्यां बेहत अनोखा शहद बनाती हैं
06:17यह सफेद रंका शहद होता है जिसे रामबन सुलाई हनी कहा जाता है
06:23कुछ वर्सों पहले ही रामबन सुलाई हनी को जियाई टैग मिला है इसके बाद इस सहद की पहचान पूरे देश में बन रही है
06:33साथियों दक्षिय कंड़ा जिले के पुत्तूर में वहाँ के वनस्पतियां सहद उत्पादन के लिए उत्कुरुष्ट मानी आती है
06:42यहां गरामजन्य नाम की किसान संस्ता इस प्राकुरतिक उफार को नई दिशा दे रही है गरामजन्य ने यहां एक आधुनी प्रोसेसिंग यूनिट बनाया
06:57लैब, बॉटलिंग, स्टोरेज और डिजिटल ट्रेकिंग जैसे सुविधाय जोड़ी गई
07:03अब यही शहद ब्रांडेड उत्पाद बनकर गावों से शहरों तक पहुँच रहा है इस प्रयास का लाप धाई हजार से दिक किसानों को मिला है
07:14साथियों, करनाटका के ही तुमकुर जिल्म है
07:18सिवगंगा काली जिया नाम की संस्था का प्रयास भी भहत सरहानी है
07:24इनके द्वारा यहां हर सदश्य को शुरुवात में दो भी बॉक्सित दिये जाते हैं
07:31ऐसा करके इस संस्था ने अनेकों किसानों को अपने अभियान से जोड दिया है
07:36अब इस संस्था से जोड़े किसान मिलकर शहद निकालते हैं
07:42बहतरिन पैकेजिंग करते हैं और स्थानिय बाजार तक पहुँचाते हैं
07:48इससे उन्हें लाखों की कमाई भी हो रही है
07:50ऐसा ही एक उधारन नागालेंड के क्लिफ हनी हंटिंग का है
07:56नागालेंड के चोकलांगन गाउं में
08:00खियामनी यंगन जनजाती सदियों से शहद निकालने का काम करती आई है
08:07यहां मदुमक्षियों पैड़ों पर नहीं बलकि उची चट्टानों पर अपने घर बनाती है
08:13इसलिए शहद निकालने का काम भी बहुत जोखिम बरा होता है
08:18इसलिए यहां के लोग मदुमक्षियों से पहले सौमिता से बात करते हैं
08:24उनसे अनुमती लेते हैं
08:26उन्हें बताते हैं कि आज वे शहद लेने आये हैं
08:31इसके बाद शहद निकालते हैं
08:33साथियों आज भारत हनी प्रोडिक्शन में नए रिकॉर्ड बना रहा है
08:3911 साल पहले देश में हनी का उत्पादन 76,000 मेटिक टन था
08:46अब ये बढ़कर डेड़ लाग मेटिक टन से भी जादा हो गया है
08:51बीते कुछ वर्षों में शहद का एक्सपोर्ट भी तीन गुना से जादा बढ़ गया है
08:57हनी मिशन कारकम के तहट खादी ग्रामोद्योग ने भी
09:02सवा दो लाग से जादा बी बॉक्सिस लोगों में बाटे हैं
09:07इससे हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं
09:11यानि देश के अलग-अलग कौनों में शहद की मिठास भी बढ़ रही है
09:16और ये मिठास किसानों की आई भी बढ़ा रही है
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