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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बाबरी मस्जिद, तलाक और अन्य मामलों के फैसलों पर न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के दबाव में निर्णय ले रहा है और 1991 के उपासना स्थल अधिनियम के बावजूद कई कार्रवाइयाँ हुईं।
मदनी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
वीडियो में देखें पूरा विवाद और देशभर की प्रतिक्रियाएँ।

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Transcript
00:00जिनोंने अदालतों के किरदार पर सवाल या निशान लगा दिया है उसवत तक ही सुप्रिम कोर्ट कहलाने का मुस्देख है जब तक आईन की पाबंदी करें अगर ऐसा ना करें तो वो इखलाकी तोर पर भी सुप्रिम कहलाने का हखदार नहीं है
00:18हर हुकमरा का अवलीन फर्ज अपनी रियाया को इनसाफ फराहम कराना है मुल्क में अमन उमान का क्याम और जराइम से पाक मौाशरे की तश्कील इनसाफ के बगएर हो नहीं सकती हो ही नहीं सकती
00:36लेकिन अफसोस के साथ ये कहना पड़ता है कि गुदिश्टा कुछ अरसे से बिल्खुस बाबरी मस्जिद तलाब के सलासा जैसे बहुत से मसालों पर फैसले के बाद ये तास्र आम हो रहा है
00:53कि अदालते हुकूमतों के दबाओं में काम करें अकलियतों के आईनी हुकूख और दस्तूर के बाद बुनियादी उसूलों की तश्रीक की ऐसी मिसाले सामने आई हैं जिनों ने अदालतों के किरदार पर सवालिया निशान लगा दिया है
01:11मुझूदा वक्त में अबादतगाह एक्ट को नदर अन्दास करके नदर अन्दास करते हुए कि inanewaपी और मुथरा के मुकद्मा को काबल समात करार देने का फैसला
01:25काबिल समात करार देने का फैसला भी उसकी एक वाज़ मिसाल है
01:30याद रखिये सुप्रिम कोट उस वगत तक ही सुप्रिम कोट कहलाने का मुस्तेख है जब तक आईन की पाबंदी करें
01:41कानून के हुकुक का ख्याल लखे
01:46अगर ऐसा न करे तो वो इखलाकी तोर पर भी सुप्रिम कहलाने का हखदार नहीं है
01:53आईन ने हमें अपने मजभ पर चल ले और उसकी तबलीग की अजासत दी है
01:58लेकिन कन्वर्जल लौ में तर्मीम के गरिये इस बनियादी हक को खत्म किया जा रहा है
02:05इस चानून को इस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है
02:08कि मजभ की तबलीग का अमल खौफ और सजा का मस्तहिक बन जाए
02:13दूसरी तरफ धरवापसी के नाम पर
02:18किसी खास धर्म में शामिल करने वालों को खुली चूट हासल है
02:24उन पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता
02:27ना कानूनी कार्रवाई होती है
02:30यूँ कानून का मकसद गेर जानिबदारी नहीं रहता
02:34बलके एक खास मजहभी सिम्थ की तरफ समाच को देके ला जाना है
02:39ये पूरा ढाचा दरसल दोहरे रवीय का मजहर है
02:44के एक तरफ मुसल्मानों और दीगर अकलियतों के मजहभी हक दावत को जर्म बना दिया जाए
02:51तो दूसरी तरफ मुसलिम नौजवानों को दबाओ
02:56खौफ और रियासी ताईद याफता सरगर्मियों के दरिए
03:01अक्सरियत के मजहभ में शामिल होने पर मजबूर किया जाए
03:05इसी तरह हमारे मुलक में खालिस दीनी इस्तला हलाल के तसवर को मुनस्थम तोर पर बदनाम किया जा रहा है
03:19हला के हलाल का मतलब सिर्फ जबीहा नहीं
03:22बलके एक मुसल्मान की पूरी जिन्दगी का पाकिज़ा तरज अमल है
03:27हलाल में जाएज कमाई, मुलाजमत, तिजारत में अमानत
03:33और माल के दुरुस्त इस्तेमाल जैसे बुनियादी उसूल शामिल है
03:38ये वो इखलाकी निजाम है
03:40जो इनसान को जुल्म, धोके, रिश्वत और नाजाएज कमाई से बचाता है
03:49हलाल दर असल अमानत, इनसाफ और पाकीज़गी की उस रिवायत का नाम है
03:56जो एक मुसल्मान की जिन्दगी की बुनियाद है
03:59इसी बुनियाद को मश्कूग बनाने की कोशिश की जा रही है
04:03ताके मुसल्मानों की मजभी आजादी, माशी हुकूख
04:08और तर्ज जिन्दगी की बुनियादी अख़दार को कमजोर किया जा सके
04:29झाल
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