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#ImaanVerse #HazratNuhAS #QaumENuh
Allah ne Hazrat Nuh عليه السلام ki qaum ko kyun gharq kar diya?
#ImaanVerse #HazratNuhAS #QaumENuh #IslamicStories #QuranStories #Noah

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Transcript
00:00A community where God has the most important part of the world,
00:04where there was a river, a river, a river, a river, a river, a king, a king, a king, a king, a king.
00:14But if you think that, not 10 years, not 50 years,
00:20it's a person, a psalm, a king, a king, a king, a king, a king.
00:25I am going to give up to Allah.
00:27Only Allah will worship.
00:29If not, it will be a reward.
00:31And the answer will be a reward.
00:33And the answer will be a reward.
00:35And the punishment will be a reward.
00:37Let's go here.
00:39We don't know God.
00:41One day, the sun will open.
00:43The sun will open.
00:45The sun will open.
00:47The sun will open.
00:49The sun will open.
00:51And the sun will open.
00:53The sun will open.
00:55The sun will open.
00:57The sun will be an example.
01:01The sun will open.
01:03At this point,
01:05these peoples came from events.
01:07These peoples whoโデلos,
01:09the sun once upon jungeуют teus,
01:11before umpires to die,
01:13there were people who Innovation soon belיז aye.
01:15The sun avoir a land the requirements of these people.
01:17And these peoples' presence today's people
01:20Additional attention.
01:22But then there was a new fiftrk that was created, the shirk of the beast was used.
01:28There was a lot of things that had happened.
01:31But the most important thing was, it was the most important thing.
01:36The first thing is that those who remember the people who remember the same people were.
01:42They thought that they would make a picture of their own.
01:47Just the picture of the Self and the Self-paste, and the Self-paste show off the shirk of the truth.
01:54May our misfortune Тихимов be able to give our lives.
02:02I've been living in a lifetime.
02:04They are saying that
02:07We'll let the world be able to live according to our own bodies.
02:09We'll let the world be able to live by our Totally.
02:12ये पत्थर बन चुके थे,
02:15मगर उनके दिल पत्थर से भी सक्त हो गए.
02:23इसी कौम के हवाले से,
02:25कुछ रिवायतों में एक और अजीब हस्ती का जिक्र मिलता है.
02:29ओज बिन अनूक.
02:33इसका जिक्र कुरान में नहीं,
02:34सिर्फ कुछ कदीम रिवायतों में मिलता है.
02:36कहा जाता है कि ये बहुत लंबे कद का,
02:40बेहत ताकतवर,
02:41इतना कि कभी-कभी पहाडों को कदम से हिला दे.
02:45लोगों में इसके किस्से मशुगूर थे,
02:47और ये कौम की तकब्बूर की मिसाल बन गया था.
02:50ये रिवायत असल में एक सबक थी,
02:53कि जब कौम तकब्बूर में आती है,
02:55तो उनमें ओज बिन अनुख जैसी सोच पैदा होती है.
02:58इसी अंधेरे में अल्लाह ने अपनी रोशनी भेजी,
03:02हजरत नुख अलेहिस्सलाम.
03:04कुरान कहता है,
03:05और हमने नुख को उनकी कौम की तरफ भेजा,
03:09और उनका रहना कौम के दर्मियान 950 साल का था.
03:13वो कहते,
03:14मैं तुम्हारे लिए अल्लाह का साफ और खुला खुला डराने वाला हूँ,
03:19जिसका पैगाम तुम तक पूरी तरह वाज़ तोर पर पहुँच चुका है.
03:22मगर लोग उंगलिया कानों में डालते,
03:26चादरे लपेट लेते और सक्ती से कहते,
03:29हम तुम्हारी बात नहीं सुनेंगे.
03:31जब हजरत नुह अलैहिस सलाम बोलते,
03:34कुछ चेहरों पर नर्मी आ जाती.
03:37मगर फिर सरदार आकर उनका हाथ पकड़ कर कहते,
03:40छोड़ इसको, ये तो सिर्फ एक आदमी है, गरीब, कमजोर,
03:44अगर अगर अल्ला को कोई पैगाम भेजना होता,
03:46तो किसी अमीर के जरीए भेजता.
03:48सुचो एक दो साल नहीं,
03:50नौ सौ पचास साल की दावर.
03:52दिन में भी, रात में भी,
03:55चुपकर भी,
03:57खुले आम भी,
03:58नर्मी से भी,
04:00सक्ती से भी.
04:02हजरत नौ अलहिससलाम कहते,
04:04तौबा करो,
04:06अल्ला तुम पर बारशें बरसाएगा,
04:07माल देगा,
04:08अलाद देगा,
04:09बागात उगा देगा,
04:10और तुमारी ताकत और बढ़ जाएगी.
04:13मगर जबाब,
04:13मज़ा,
04:15तंस,
04:16और दुश्मनी.
04:18आखिर वो वक्त आ गया,
04:20जब इल्म ने यकीन बना दिया,
04:22कि ये कौम अब कभी नहीं बदलेगी.
04:25तब हजरत नौ अलहिससलाम ने वो दूआ की,
04:28जो इंसान को आज भी हिला देती है.
04:31ऐ मेरे रब,
04:32जमीन पर किसी काफिर को जिदा मत छोड़,
04:36वो तेरे बदों को गुमरह करेंगे,
04:39और फाजिर काफिर आउलाद पैदा करेंगे.
04:44फिर अल्ला का हुक मुतर गया.
04:49हमारी निगरानी में कश्टी बनाओ,
04:51और जालिमों के बारे में मुझसे बात मत करना.
04:54मगर उन्हें क्या पता?
05:09हर कील, हर ताखा,
05:11उन्हीं की तबाही का पहला सुर्था.
05:13कुछ रिवायतों में आता है,
05:15कि जब हजरत नूँ अल्यस्सलाम कश्टी बना रहे थे,
05:18तो ओज बिन अनूप कभी-कभी उनके पास आ जाता,
05:21और अपने लंबे कद की वज़ह से वो ऐसे कामों में मदद कर देता,
05:26जो आम लोग नहीं कर सकते थे.
05:28मगर याद रहे, ये बाते सिर्फ रिवायतों में हैं.
05:31कुरान में इसका कोई जिक्र नहीं.
05:33रिवायतों में ये भी मिलता है,
05:35कि कश्टी तीन मंजिलों पर मुश्टमिल थी.
05:38पहली मंजिल जानवर,
05:41दूसरी मंजिल इंसान,
05:43तीसरी मंजिल परिंदे,
05:45हलका सामान,
05:46निगरानी का हिस्सा.
05:47कुरान में एक एहम निशानी आती है,
05:49जब तंदूर उबलने लगे,
05:51तो हर जानवर की नरो मादा जोड़ी को कश्टी में चढ़ा लो.
05:56यानि जानवर नुह अलैहिससलाम को ढूंड कर नहीं लाने थे,
06:00अल्ला के हुक्म से जौरिया खुद चल कर आई.
06:03आखिर एक दिन वो निशानी नजर आ गई,
06:06जिसका इंतजार था.
06:07आस्मान सियाह बादलों से भर जाता है,
06:11गर्म हवा अचानक थंडी तेज बनने लगती है.
06:15कौम के सरदार और बुजुर्द हस्ते हुए कहते हैं,
06:18देखो, नुह के तनूर से भी पानी निकलेगा क्या?
06:23कुरान कहता है,
06:25जब तंदूर उबनने लगा,
06:26एक पुराना चुलहा,
06:29जिसमें रोटी पक्ती थी,
06:31उसमें से अचानक पानी उबलना शुरू हो गया.
06:35अगले ही लमहे सरदारों की हसी थम जाती है,
06:38हजरत नूह अलैहिस्सलाम समझ गए,
06:41अजाब आ गया है,
06:42उन्होंने मौमिनों को लेकर कश्टी में सवार हो गए.
06:45फिर अल्ला ने फरमाया,
06:48आस्मान के दर्वाजे खोल दो,
06:52जमीन के चश्में फूट पढ़ने दो,
06:55पानी उपर से बरसा,
06:57पानी नीचे से उबला,
07:00और दोनों पानी मिल गए,
07:02उस तकदीर पर जो लिखी जा चुकी थी.
07:05नूह अल्लाहिस्सलाम अपनी कौम की तरफ आखरी दफा देखते हैं,
07:10उनकी बीवी दूर अपने घर के दर्वाजे पर खड़ी थी.
07:13नूह अल्लाहिस्सलाम उकारते हैं,
07:15आओ, अल्लाह की पना हमें आजाओ.
07:19मगर उसने मूँ फेर लिया,
07:21वो उन कमजोर सरदारों के साथ गुम हो गई.
07:25नूह अल्ले सलाम के तीन बेटे,
07:27साम, हाम और याफित उनके साथ खड़े हैं.
07:30उनकी बेटिया भी अपने शोहरों के साथ कश्टी में जगर ले चुकी हैं.
07:36औरते चीकती.
07:40लोग भागते, मगर पानी हर तरफ से आ रहा था.
07:44कोई चिल्लाया.
07:51जमीन भट रही थी.
07:53उबलते पानी की नदियां उठ रही थी.
07:55ताकतवर मर्दों की टांगे काप रही थी.
07:58लोग गश्टी की तरफ भागते.
08:05मगर दर्वाजे अल्लाह के हुक्म से बंद हो चुके थे.
08:11पानी पहाड जैसी लहरों में बदल गया.
08:16इन्ही लहरों के बीच, हजरत नुह अलेहिस सलाम ने अपने बेटे को देखा.
08:25उसने कहा.
08:30नुह अलेहिस सलाम बोले.
08:37और फिर एक लहर उनके दर्मियान आपू.
08:42और बेटा डूबने वालों में हो गया.
08:49सिर्फ तूफान गरज रहा था.
08:51आस्मान का रंग सिया, हर तरफ चीखती हवा, जिसे सुनकर लोग डर कर रो देते.
08:58तूफानी लहरे कश्टी की दीवारों पर जोर से टकराती, और हर तकर पर कश्टी पूरी तरह काप उठती.
09:05अंदर से हजरत नुह अलेहिस सलाम दूआ में जुके हुए.
09:08बाहर से चीखों का शोर, दिनराथ एक हो जाते.
09:14बिजली की चमक के सिवा कोई रोश्णी नहीं.
09:17पानी इतना बढ़ जाता है कि पहार सिर्फ चोटियों तक रह जाते हैं, सिर्फ कश्टी तैर रही होती है.
09:23तूफान गरचता रहा, दिनराथ एक हो गए, कश्टी पहारों जितनी लहरों में तैरती रही.
09:31और आखिर अल्लाह ने कहा, ए जमीन, अपना पानी निगल ले, ए आस्मान, थमजा.
09:38पानी उतर गया, जर्खेज जमीन दिखाई देने लगी, और कश्टी जुडी नाम के पहार पर खहर गई.
09:45नुह अल्लेह सलाम जमीन पर सजदा में गिर जाते हैं.
09:49उनके गिर्द, साम, हाम, याफित, उनकी बेटियां, उनके शोहर और कुछ मुमिन लोग बस यही लोग बचे थे.
09:58यही से एक नए दौर का आगाज होता है.
10:00कौमें नू सोचती थी, हम ताकतवर हैं, माल है, बच जाएंगे.
10:10मगर जब अल्लाह का हुकम आया, ना माल काम आया, ना बुथ.
10:14आज हमारे बुथ, करियर, लोग क्या कहेंगे, सोशल मीडिया, बेहयाई.
10:20उस वक्त कश्टी बच गई.
10:22आज हमारी कश्टी, तोहीद, नमाज, तौबा, कुरान, सुनन, कमेंट में लिखो, तुम्हें इस वाकिया से क्या सबक मिला है, और चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलना.
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