00:00रोज सुभा लेबर चौक पर खड़े होकर काम मिलने का इंतिसार करने वाले दिहाडी मजदूरों के लिए दर्भंगा के चंदरशेखर मंडल किसी मसीहा से कम नहीं है।
00:16उन्होंने इन मजदूरों के जीवन की कठिनाईयों को थूड़ा कम करने का प्रयास किया और डिजिटल लेबर चौक नाम का एप बना डाला। इस अप के जरीए दिहाडी मजदूर घर पर बैठे बैठे ऑनलाइन अपनी योगिता के अनुसार काम धून सकते हैं।
00:32दिश्टल लेबर चौक एक एप्लिकेशन है बट इसका मकसद है कि भारत वर्स में जितने भी फिजिकल लेबर चौक हैं जहां पे रुजाना लोग जाके खड़े होते हैं उम्मीद के साथ कि आज काम मिलेगा। उसको ये रिप्लेस करने के लिए निकला है।
00:47आज कोई भी मजदूर हमारे अप्लिकेशन पे आके उसे डाउनलोड कर सकता है और जितने भी भारत वर्स की जौब है उसको एक सिंगल स्क्रीन में देख सकता है।
01:17तो रोजाना जब मैं आता था आफिस तो मैं देखता था करीबन जो है वहाँ पे 100-200 आदमी रोजाना कड़े हो रहे हैं।
01:47और इस पहलू के साथ मैंने इसकी सुरुवात करी मैंने सोचना इस पे चालू किया।
01:53चंदरशेखर के एप से आज लगभग 2 लाग से ज़्यादा वरकर जुड़े हैं।
01:57चंदरशेखर अपने एप और अपनी सफलता का श्रय अपने पिता को देते हैं।
02:05मेरे से करीवन जो हैं, दो लाग से ज़्यादा वरकर जुड़े हुए हैं, दस हजार से ज़्यादा कॉंटरेक्टर जुड़े हुए हैं।
02:11जुड़े हुए हैं और करीवन 500 से ज़्यादा कंपनी हैं।
02:14आज मेरे पास जो है मेरे प्लैटफॉर्म पे 20-25,000 लोगों की नौप्रिया हमेशा उपलव्द रहती है।
02:20हजारों लोग जो है रोजाना मेरे अप्लिकेशन के तुरू जो है लोग कंपनी से कनेक्टर से कनेक्ट कर रहे हैं।
02:28और मेरा मकसद है कि मैं उन सारे आठ करोर लोग जो कंस्ट्रक्शन चेत में काउंट डूण रहे हैं।
02:33वहीं पिता गौरी शंकर को अपने बेटे के काम पर गर्व है।
02:58हमरा लर्का बहुत हिम्मत किया। इसको आगे पिछे उपछ नहीं देखा।
03:03ठीक जो है सो आगे बढ़ने के लिए अपना काम शुलू कर दी।
03:08कितने खुशी हो रही है अभी।
03:10अभी तो हमको जो है सो इससे जादा कोई खुशीय नहीं है।
03:13हमारा लर्का माल लिजिये इतना बड़ा कंपनी खुल लिया।
03:18इनको अभी जो है सो माने 20 अस्तर पर इसको बात्चित चल रहा है।
03:23इंडिये नहीं है।
03:25अब तो बहुत ये तरार हो गया है।
03:29हम लोगों को बहुत खुशी है कि हमारे गउं का हमारे परिवार का आदमी आगे बढ़ रहा है।
03:35हम लोग गौसिर बात जिते हैं कि भगवान और आगे बढ़ावे।
03:40वहीं चंदशेखर के परिजनों के अनुसार इस कंपनी की शुरुवात 40,000 रुपए से की गई थी।
03:47लेकिन आज सरकारी अनुदान और फंडिंग मिलाकर 3-4 करोड किसकी वैली हो गई है।
03:53इससे देश के 28 राजियों के मजदूर जुड़े हैं जिसमें बिहार और उतरप्रदेश के सबसे ज्यादा हैं।
04:00ETV भारत के लिए पटना से ब्रिजम पांडे और दर्भंगा से वरुन कुमार की रिपोर्ट।
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