00:00अगर भाईयों, आज जब हम 556 में प्रकास पर्व के उसर पर यहां पर एकत्र हुए हैं, हम सब को मिल करके इस बारे में संकल्प लेना ही होगा।
00:14गुरुनानक देवजी ने जाधिपाधी के भेट को समाप्त किया था।
00:21गुरुनानक देवजी ने मिल बाट करके समाज के संगठन को मजबूती प्रदान करने की पेणा दी थी।
00:29ऐसे कौन से कारण हैं कि हम जब देखते हैं पंजाब में तराई के छेत्र में अपने वहाँ पर भी हमारे को सिक बंदो धर्मांतरन करते वे दिखाई दे रहे हैं।
00:44हमने ये तो सुना था बच्चपन में कि पंजाब में हर परिवार का एक ब्यक्ती जो सबसे बड़ा पुत्र होता था वो सिक पंथ के लिए समर्पित होकर के कारे करता था वही सिक बंता था।
00:58लेकिन मैंने सिकों के धर्मांतरन की बात को सुना नहीं था लेकिन आज देख करके दर्द होता है।
01:05हमें सक्ति से इस प्रकार की दुष्परवर्टी को रोकना होगा।
01:11दूसरा अगर कहीं कोई खामी है उसके प्रिमार्जन के लिए अपने अपको त्यार करना पड़ेगा।
01:18याद रखना जब खालसा पंथ की अस्तापना गुर्गोविंद सिंग्जी महराज कर रहे थे।
01:26उन्होंने उस समय देखा होगा देश के लग लग कोने से उन लोगों को अपने साथ जोड़ करके पंचे प्यारे के रूप में उन्हें सम्मानित किया जिने कभी किसी न किसी प्रकार से लोग पाहर करने का प्रियास करते थे।
01:47विदेशी आक्रांता या कोई विधर्मी तभी हमारे यहां सेंद लगाता है जब हम स्वयम उस प्रकार की इस्तिति को प्रस्तुत करने या उस प्रकार की आउसर प्रदान करते हैं।
02:00हमें कोई भी ऐसा आउसर नहीं देना होगा।
02:03और मैं खास तोर पर लखनों के अपने जितने भी सिक्व बंदु हैं और तरब्रदेश के सेस अन्य लोगों से भी कहूंगा वे जाएं लखींपुर खीरी में, पीली भीत में, रामपुर में, सांजहापुर में, उदम सिंग नगर में जाएं, पेखें थोड़ा, अगर कह
02:33जो उनका निर्देश है, उसको हमें अगर प्रभावी दंग से आगे बढ़ाना है, तो गुरु प्रंप्रा के अनुसार अपने संस्ता और संगठन को भी उतना ही ससक्त बनाना होगा, आज के सौसर पर
Comments