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While researching filmmaking, Shirin uncovers unsettling truths buried in the past. Her journey grows darker until she meets Arijit, an encounter that changes everything and leads her deeper into a story she never meant to tell.

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00:00:00अरीज ड़ेज पहिंक सर्भानाखव
00:00:04लज़ उड़ रब
00:00:11फ सरमनाख रभी दो ख अरीजery
00:00:20झालский तो
00:00:23अरेंबबू?
00:00:53अरेंबू?
00:01:23क्योजी, सुएंगे नहीं?
00:01:48मुझे माफ कर देना, कवीता, मैं तुम लोगों को ऐसी सिंदगी नहीं देना चाहता है
00:01:59अरे, यह आप कैसी बाते कर रहे हैं? आपने ऐसा क्या किया? आपने तो कुछ भी नहीं किया है
00:02:05हाँ?
00:02:06लेकिन मुझे पर कोई यकीन नहीं करता और नाहीं मुझे कोई काम देता है
00:02:11आज आप गए थे ना बड़े बजार में? गए थे ना बड़े बजार में? हाँ?
00:02:18काता लिखने का काम था जितनी तनखा कही उतने में आधा मेना भी नहीं निकले रहा
00:02:26मैं चला लोंगी सुना आपने मैं चला लोंगी
00:02:33तुम मुझ पर यकीन करती हो हाँ?
00:02:39मैं सिर्फ आप पर यकीन करती हूँ उन में से किसी पर भी नहीं किसी पर यकीन नहीं करती
00:02:49जानती हो सादवी ने पूरी इंडुस्ट्री में ये बात पहला दी कि मैंने एडिट करते वक्त पूरी मूवी चलाती है
00:02:58और अब इस मकान के अलावा मेरे पास और कुछ भी नहीं बचा है इसे बेच कर भी मैं उनकी भरपाई नहीं कर पाऊंगा
00:03:04कर पाउंगा अगर यह घर चला गया तो फिर हम रहेंगे जूट जीटा दिल तक जिंदा नहीं
00:03:14को कोंवेरी बात मानता कहाँ कि सब ठीक हो जाएगा देखिये असoga थीख हो जाएगा हुआ कर मैं कह रही हूं ना
00:03:34पापा, ओ पापा, पापा, उतिये, पापा, क्या हुआ उतिये ना, ओ पापा, ओ पापा, पापा, सुनी उतिये, उतिये, उतिये ना,
00:04:04झाल झाल
00:04:34झाल झाल
00:05:04आपके हाथ पर कुछ लगा ही नहीं नहीं लगा है कुछ भी नहीं है चलिए
00:05:12श्रिंदी बिल्कुल डिस्टरब मत करना यह लेक मुझे आज खत्म करना है एक ब्रेकिंग न्यूस है इस बार नेशनल अवार्ड में बेस्ट फिल्म किसे मिलने वाल यह पता है अनांस हो चुका है क्या नहीं नहीं अंदर की ख़बर है आपके रिसर्च पेपर पर जो विक्
00:05:42यह वाली लाया इतना समझाने पर तु यह वाली लाया तुझे समझ में नहीं आता क्या अरीजित धर इस नाम का इंदरजीत का एक बेटा तो था सिर्फ नाम जानता हूं और कुछ नहीं पता अच्छा यह इंदरजीत जी के बेटे अरीजित यह अभी कहां रहते है शूट
00:06:12आपके साथ ही काम करते थे ना वो उनके मरने के बाद उनके परिवार के बारे में खबर नहीं रखी ना खबर रखी ना पता किया कुछ भी जानने की जरूरत नहीं समझी और फिर मैं ही क्यों किसी और ने भी कोई खोज नहीं की लिकिन आपने तो उनके साथ इतने सारे काम
00:06:42अरुना स्टुडियूस में इंद्रजीत भाई के साथ लगभग पूरे दिन पड़ा रहता था
00:06:46वो तो बहुत अच्छे एडिटर थे
00:06:50समुंद्र मन्थन, सब्ताशोध, देना पाबना, कितनी बढ़ियां फिल्म है
00:06:55शूटिंग खत्म होने के बाद, पूरे शूटिंग का स्टॉक बस इंद्रजीत भाई के पास भेज देना ही काफी होता
00:07:00स्क्रेप्ट, ट्रीट्मेंट, सब कुछ तस्वीरों की तरह उनके दिमाग में छपा होता था
00:07:06एडिट करते समय, एडिट रूम में वो परिचालक तक को घुसने नहीं देते थे
00:07:12डिरेक्टर भी अंदों की तरह इंद्रजीत भाई पर भरोसा करते थे
00:07:17और उसी इंद्रजीत भाई नहीं, इंडस्ट्री के साथ बेहिमानी की नमा खराम
00:07:26बेहिमानी?
00:07:29बेहिमानी नहीं तो क्या, कोई जान बूच कर एडिटिंग टेबल पर पूरी फिल्म को जला सकता है क्या?
00:07:38फिल्म जला दी मतलब?
00:07:41जो कहा हुई? एडिटिंग टेबल पर पूरी फिल्म को उसने जान बूच कर जला दिया था
00:07:46तब तो अब की तरह ये डिजिटल एडिटिंग सिस्टम्स नहीं थे ना
00:07:50स्टैन्बेक मशीन में चक्कर घूमता था और कैंची लेकर फिल्म को काटना पड़ता था
00:07:54कोई गड़बड होने पर फिल्म को वापस पाने का कोई दूसरा उपाय नहीं था
00:07:58फिल्म को काटते वक्त वो कोई बड़ी गलती कर बैठा था
00:08:02और अपनी गलती चुपाने के लिए उसने एडिटिंग टेबल पर पूरे स्टॉक को जला कर राक कर डाला
00:08:08जल से जल इस मामले को संभालने के लिए उसने एक एकसिडेंटल प्रूफ देने की कोशिश की थी
00:08:16लेकिन किसी ने उसका यकीन नहीं किया था सभी उसकी चाला की समझ गए थे हाँ
00:08:21तो क्या इसलिए उन्होंने सुसाइट कर लिया था?
00:08:24हो सकता है? दरसल तब उसके पास काम ही कहा था?
00:08:29खाता क्या?
00:08:33अच्छा तब वो कहां रहते थे?
00:08:36याद नहीं है
00:08:36प्लीज शेबू भाई
00:08:39थोड़ा याद करके बताने की कोशिश कीजिये ना
00:08:42मुझे बहुत जरूरत है
00:08:43प्लीज प्लीज
00:08:44बेहाला के आसपास
00:08:48वो विशाला की तल्ला
00:08:52या फिर विंधेश्वरी तल्ला
00:08:55ऐसी ही किसी जगा पर उसका खांदानी मकान था
00:08:58दरसल वो खुद तो कुछ कर नहीं पाया था
00:09:02एक और सवाल है
00:09:05अखेर उन्होंने कौन से फिल्म के रिल जला दे थे
00:09:09अब आप जाओ
00:09:10मुझे बहुत काम है
00:09:13विनोद
00:09:14ए विनोद
00:09:28भाईया बता सकते हैं यह रिजीत का घर का है
00:09:47हाँ वो वहाँ वहाँ उस तरफ
00:09:48धन्यवाद
00:09:49जी
00:09:58अच्छा क्या आप ही अरिजीत धर है
00:10:16हाँ शायद मैं ही अरिजीत हूँ
00:10:19दरसल मुझे
00:10:21अपने रिसर्च के लिए आपके हेल्फ की जरूरत थे
00:10:24मेरे पीएशटी का पेपर
00:10:26असी दश्यक के फिल्म टेक्निशन के उपर है
00:10:28ये डिजीटल यूग आने के जिस्ट पहले की
00:10:31तो आप तो एडिटर इंदरजीद धर की बेटे हैं
00:10:35क्या मैं अंदर आ सकती हूँ प्लीज
00:10:36नहीं आ सकती
00:10:37परेशान क्यों कर रही हो
00:10:52माब आपने सभिता ने सिखाई क्या
00:10:54सभिता का जो नमोना देख रही हूँ उससे लगता है
00:10:56एनिवे मैं फिर से आउँगी
00:10:59तब ऐसे कुट्टे की तरफ भागा मत दीजेगा
00:11:01ठीक है बाई
00:11:03जले आते
00:11:07खरे आमार मोन बसेना
00:11:13कोई है कोई है
00:11:29कोई है
00:11:31अड़ उढ़ा बाई
00:11:33बहे है
00:11:43अड़ अड़ मोन
00:11:44अब बबबु़?
00:12:14हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हु
00:12:44क्यों जी, सुएंगे नहीं?
00:13:08मुझे माफ करते ने, कवीता
00:13:10मैं तुम लोगों को ऐसी जिन्दगी नहीं देना चाहता
00:13:14अरे, ये आप कैसी बाते कर रहे हैं?
00:13:17आपने ऐसा क्या किया? आपने तो कुछ भी नहीं किया है
00:13:20लेकिन मुझे पर कोई यकीन नहीं करता
00:13:23और नहीं मुझे कोई काम देता
00:13:26आज आप गए थे ना बड़े बजार में? गए थे ना बड़े बजार में?
00:13:33गाता लिखने का काम था जितनी तनखा कही उतने में आधा मैना भी नहीं निकले रहा
00:13:41मैं चला लोंगी सुना आपने मैं चला लोंगी तुम मुझ पर यकीन करती हो ना
00:13:54मैं सिफ आप पर यकीन करती हूँ उन में से किसी पर भी नहीं किसी पर यकीन नहीं करती
00:14:03जानती हो सादमी ने पूरी इंडुस्ट्री में ये बात पहला दे कि मैंने एडिट करते वक्त पूरी मूवी चला दी है और अब अब इस मकान के अलावा मेरे पास और कुछ भी नहीं बचा है इसे बेच कर भी मैं उनकी भरपाई नहीं कर पाऊंगा और अगर ये घर चला ग
00:14:33सब ठीक हो जाएगा देखिए सब ठीक हो जाएगा हां मैं कह रही हूं न और बहुत तेर हो जाएगी
00:14:45पापा ओ पापा पापा उठिये
00:14:55पापा क्या हुआ उठिये न
00:15:00अ पापा
00:15:04अ पापा पापा
00:15:06सुनी वती
00:15:09या हुआ
00:15:15सुनी, वती
00:15:16वती वती न
00:15:30झाल झाल
00:16:00यह क्या? यह क्या कर रहे? यह निकल नहीं रहा है देखो ना नहीं निकल रहा है यह आ क्या हाथ पर कुछ लगाई नहीं है?
00:16:22में पुफो की तरह बात बत करो मैं कह रहा हूना लगाई यह तो निकल नहीं रहा है कुछ भी नहीं है चलिए
00:16:30श्रिंदी
00:16:39बिल्कुल डिस्टाब मत करना
00:16:42ये लेक मुझे आज खत्म करना है
00:16:44एक ब्रेकिंग न्यूज है
00:16:45इस बार नेशनल अवार्ड में बेस्ट फिल्म किसे मिलने वाल ये पता है
00:16:48अनान्स हो चुका है क्या
00:16:49नहीं नहीं अंदर की खबर है
00:16:51आपके रिसर्च पेपर पर जो विक्टिमाइज एडिटर इंद्रजीत धर का बेटा
00:16:55ये वाली लाया
00:17:01इस्क्यूज में समझाने पर तु ये वाली लाया
00:17:04तुझे समझ में नहीं आता क्या
00:17:06अरीजित धर
00:17:07इस नाम का इंद्रजीत का एक बेटा तो था
00:17:10सिर्फ नाम जानता हूँ
00:17:12और कुछ नहीं पता
00:17:13अच्छा ये इंद्रजीत जी के बेटे अरीजीत
00:17:18ये अभी कहां रहते हैं
00:17:19शूटिंग के दौरान ये सब करूँ क्या
00:17:21काम करूँगा या ये सब करूँगा
00:17:24और फिर वो कहां रहते हैं
00:17:26ये मुझे कैसे पता होगा
00:17:27आपके साथ ही काम करते थे न वो
00:17:29उनके मरने के बाद उनके
00:17:31परिवार के बारे में खबर नहीं रखी
00:17:33ना खबर रखी ना पता किया
00:17:35कुछ भी जानने की ज़रूरत नहीं समझी
00:17:36और फिर मैं ही क्यों
00:17:37किसी और ने भी कोई खोज नहीं की, लिकिन आपने तो उनके साथ इतने सारे काम किये हैं, बहुत ही नस्दीक से देखा है उन्हें, इंद्रजीत भाई के पास तब एडिटिंग के बहुत प्रोजेक्ट्स थे, और तब मैं बड़ी-बड़ी बंगाली फिल्मों में प्रदान
00:18:07देना पापना, कितने बढ़ियां फिल्म हैं, शूटिंग खत्म होने के बाद, पूरे शूटिंग का स्टॉक बस इंद्रजीत भाई के पास भेज़ देना ही काफी होता,
00:18:15स्क्रेप्ट, ट्रीट्मेंट, सब कुछ तस्वीरों की तरह उनके दिमाग में छपा होता था,
00:18:22एडिट करते समये, एडिट रूम में वो परिचालक तक को घुसने नहीं देते थे,
00:18:28डिरेक्टर भी अंदों की तरह इंद्रजीत भाई पर भरोसा करते थे,
00:18:32और उसी इंद्रजीत भाई ने, इंडस्ट्री के साथ बेहिमानी की नमख खराम,
00:18:44बेहिमानी?
00:18:46बेहिमानी नहीं तो क्या, कोई जान बूच कर, एडिटिंग टेबल पर पूरी फिल्म को जला सकता है क्या?
00:18:53फिल्म जला दी मतलब?
00:18:55जो कहा हुई?
00:18:58एडिटिंग टेबल पर पूरी फिल्म को उसने जान बूच कर जला दिया था,
00:19:03तब तो अब की तरह ये डिजिटल एडिटिंग सिस्टम्स नहीं थे न,
00:19:06स्टैन बेक मशीन में चकर घूमता था और क्याची लेकर फिल्म को काटना पड़ता था,
00:19:09कोई गड़ बढ़ होने पर फिल्म को वापस पाने का कोई दूसरा उपाय नहीं था,
00:19:13फिल्म को काटते वक्त वो कोई बड़ी गलती कर बैठा था,
00:19:18और अपनी गलती चुपाने के लिए उसने एडिटिंग टेबल पर पूरे स्टॉक को जला कर राक कर डाला,
00:19:23जल से जल इस मामले को संभालने के लिए उसने एक एक्सिडेंटल प्रूफ देने की कोशिश की थी,
00:19:31लेकिन किसी ने उसका यकीन नहीं किया था,
00:19:34सभी उसकी चाला की समझ गए थे, हाँ.
00:19:36तो क्या इसलिए उन्होंने सुसाइट कर लिया था?
00:19:38हो सकता है, दर असल तब उसके पास काम ही कहा था,
00:19:44खाता क्या?
00:19:48अच्छा, तब वो कहां रहते थे?
00:19:51याद नहीं है.
00:19:53प्लीज शेबू भाई, थोड़ा याद करके बताने की कोशिश कीजिए ना,
00:19:57मुझे बहुत जरूरत है, प्लीज, प्लीज.
00:19:59बेहाला के आसपास, वो विशाला की तल्ला, या फिर विंधेश्वरी तल्ला.
00:20:11ऐसी ही किसी जगा पर उसका खांदानी मकान था.
00:20:15दर असल वो खुद तो कुछ कर नहीं पाया था.
00:20:18एक और सवाल है, अखिर उन्होंने कौन से फिल्म के रील चला दी थी?
00:20:24अब अब जाओ. मुझे बहुत काम है. विनोद! ए विनोद!
00:20:54भाईया, बता सकते हैं, यह रिजीत का घर का है?
00:21:02हाँ, वो वहाँ, वहाँ उस तरफ.
00:21:04धान्यवाद. जी.
00:21:05अच्छा, क्या आप ही अरिजीत धर है?
00:21:32हाँ, शायद मैं ही अरिजीत हूँ.
00:21:35दरसल मुझे अपने रिसर्च के लिए आपके हेल्फ की जरूरत थी.
00:21:39मेरे पीएशटी का पेपर असी दश्यक के फिल्म टेक्निशन के उपर है.
00:21:44यह डिजिटल यूग आने के जिस्ट पहले की.
00:21:46तो आप तो एडिटर इंदर जीद धर के बेटे हैं.
00:21:50क्या मैं अंदर आ सकती हूँ, प्लीज?
00:21:52नहीं आ सकती.
00:21:52परेशान क्यों कर रही हो?
00:22:08माब आपने सभिता ने सिखाई क्या?
00:22:09सभिता का जो नमोना देख रही हूँ, उससे लगता है.
00:22:12एनिवे, मैं फिर से आउँगी.
00:22:14तब ऐसे कुट्टे की तरफ भागा मत दीचेगा.
00:22:17ठीक है?
00:22:17बाई.
00:22:21चले आते हैं.
00:22:22घरे आमार मुन बसे ना.
00:22:28घरे आमार मुन बसे ना.
00:22:46अगार मुन बसे ना.
00:23:16बहुत मनमानी हो गई है आपके, रुको आने दो आपके बेटे को, मैं सब बता दूँगी, कल से अब मैं नहीं आउँगी, इसलिए क्या रही हो, खालो, मेरी बात नहीं सुनी है क्या, अगर नहीं सुनी तो देख लेना पर, मैं आना बंद कर दूँगी तो, चलो खाओ, हाथ
00:23:46ये क्या, ना आवाज दी, ना पुछा और सीधे अंदर चली आ रही हो, कौन हो तुम?
00:23:50अरिजीत बाबू है क्या?
00:23:52नहीं, वो घर पर नहीं है, शाम को आएंगे
00:23:54मैं आया का काम करती हूँ, उनकी मा की देख भाल करती हूँ
00:23:58क्या मैं आण्टी जी से बात कर सकती हूँ?
00:24:01वो तो कमरे में है, पर आप हैं कौन?
00:24:05मैं आरिजीत बाबू की दोस्त हूँ
00:24:06ओ, मैं तो बिलकुर परिशान हो चुकी हूँ, पूरा समय परिशान करती रहती है ये बुढ़िया
00:24:11ये लीजे
00:24:28आराम से, आराम से
00:24:34आण्टी जी, मेरा नाम शिरेन, आप से कुछ बात करने आई हूँ
00:24:47आपके पती इंदर जीत बाबू की बारे में कुछ जानना चाहती हूँ
00:24:52वो बहुत ताकत्वर है
00:24:56कुछ ख्याना है आपको
00:25:05उन्होंने कुछ नहीं किया, कोई कुछ नहीं अनका, मैंने भी कुछ नहीं किया
00:25:13जी जी, आप भी यही मांगते हैं इसलिए तो आपके पास आई हूँ ना
00:25:21जेहर करिदने के लिए पैसे नहीं लगते हैं बोलो जेहर
00:25:29कहते थे उन्हें कोई काम नहीं देता उनके पास पैसे नहीं है, कितने दिनों से पानी पी रह थे आखिर हुआ गया था जरा बताई मुझे, वो आपसे कुछ कहते नहीं थे
00:25:47स्टूडियो ही उनका सब कुछ था, दिन रात वो स्टूडियो में ही पेता थे थे, स्टूडियो ने निकर गया
00:26:07मामुता महाँ छुटा था, कितना छुटा था वो, कितने कश्या से गड़ा गिया मैंने
00:26:23आंटी जी, आंटी जी, सब को सजाने की जरूरत है, कितना दुख पाकर चले गए, कितना दुख पाकर चले गए,
00:26:34कितना दुख हुआ उने, उसके बाद मैंने बाबू को अकेला ही बड़ा किया है, किसी ने हाल चाल भी नहीं पूछा, किसी ने नहीं,
00:26:57जिनकी साहथ उठना बैठना था, कोई, कोई नहीं आया,
00:27:07कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, कोई, क
00:27:37कर दो कर दो
00:28:07कर दो कर है
00:28:37यह क्या, आप यहां क्या कर रही हैं?
00:28:45आप कहीं वेट कर रही थी, आपकी बुक शल्फ कमाल की है
00:28:49आपको अंदर किसने आने दिया, मा, मा
00:28:52अब प्लीज उन्हें आवाज मत लगाए, उन्हें चस्छ सुलाए गया है
00:28:55आखिर बात क्या बताएगे जरा
00:28:57माँ को अपने वश में कर लिया क्या
00:28:59अरे आप कहा जा रही है
00:29:02अरे आप
00:29:04मैं तो बैट कर बस उनसे बात कर रही थी
00:29:07ये बताएगे कि आपको किस तरीके से समझाओ
00:29:10कि आपको यहाने की जरूरत नहीं है
00:29:12आप तो खुद भी सिनेमा से इतना प्यार करते हैं
00:29:15तो फिर हल्प क्यों नहीं कर रहे हैं
00:29:17ये क्या आपने मेरे बुक सेल्फ को हाथ लगा है
00:29:21और ये किताबे अब इसलिए चोरी करने का इरादा नहीं है
00:29:24पर ये पुरानी किताबे हैं आपने
00:29:26जो कि आपके इस विशय पर प्यार को अच्छे से समझाती है
00:29:30प्लीज
00:29:31मेरे रिसर्च में थोड़ी हल कीजिए न
00:29:34उस वक्त के टेक्नीशिंस
00:29:36कुछ जानकारी ही चाहिए मुझे इंदरजीत बाबू के बादे
00:29:38अपने रिसर्च अपने पास ही रखिए
00:29:39चार दिन से रिसर्च कर रही है
00:29:41रिसर्च करना है तो जाईए
00:29:44इंडस्री जाईए
00:29:45बहुत सारे टेक्नीशन है वाँ
00:29:47एक मरेव इंसान को भी ने छोड़ रहे है तुम लोग
00:29:49देखिए आप मुझे गलत समझ रहे हैं
00:29:52मैं सिर्फ इतना जाना चाहती हूँ कि
00:29:53जाए थेसे!!
00:29:57यह अपना पर्स पकड़िये और जाईए यह से
00:29:59प्लिज जाईए
00:30:02निकल जाईए
00:30:08आरे जाईए ना
00:30:11कि अरे तुम उट क्यों कही अंग्री बाहर क्वाई
00:30:13आया दिदी
00:30:14आया दिदी
00:30:18आहीं जा अंधर जाव ऑटब आजा यहाई यहाँ जाएukan
00:30:21आप यहां तमाशा देख नहीं क्या, जाएए आँ से, जाएए
00:30:24क्या हुआ, ऐसी शकल बना कर कहां से आ रही हो तुम
00:30:36पूछी मत, सुबह से ऐसा हाल हुआ पड़ा है
00:30:40आज हमारे कॉलेज में सेमिनार था
00:30:43वही थी उसके बाद स्टूडियो से देबुजीत भाई को फोन किया
00:30:46जाकर क्या देखा पता है
00:30:47एक पुरानी जंग लगीवी ट्रंक निकाल रखी थी
00:30:50और उसमें नाइन्टी फॉटी से एटी स तक की
00:30:53सारी बंगला फिल्मों की पबिसिटी पैंपलिट थी
00:30:55मतलब मेरे लिए तो कह सकते हैं किसी खाजाने से कम नहीं है
00:30:58वही सब देख रही थी तभी तनमे भाई ने फोन किया
00:31:01जादवपूर जाना पड़ा
00:31:02पर मुझे जो सब मिला है ना
00:31:04आइजस्ट कांट बिलीव इट
00:31:06आच्छा ये सब बाद में देख ले ना
00:31:09पूरे दिन में कुछ खाया तो है ना
00:31:11उफ वह सब बाद में बताती हूँ
00:31:12पहले आप ये देखे ना
00:31:13कितनी इंट्रेस्टिंग है
00:31:14आँ प्रेमेंद्रो मित्रो
00:31:20अकेले ही कला साहित्यक
00:31:25कवी
00:31:26लेखक, चित्रनाट्य रचित, गितिका
00:31:30पर कोई ऐसे वैसे नहीं
00:31:39तक चौधा बांगला फिल्मों की परिचालना की है
00:31:43पता है तुम्हें?
00:31:44क्या कहरे है?
00:31:44एक्जाक्ली, सही कह रहा हूँ
00:31:46उस वक्त उसमें से जाधा तर
00:31:48बांगला फिल्में ही सुपर डुपर हिट हुई थी
00:31:50इन फैक्ट, पहली हॉरर मूवी
00:31:53कालो छाया और पहली थ्रिलर हाना बाड़ी उन्होंने ही डारेक्ट की थी
00:31:58जीनियस?
00:31:59तभी तो कहते है ना बेटा कि ये इंडस्ट्री जीनियस और शिक्षित लोगों के हाथों में ही जानी चाहिए
00:32:06इसलिए जब तुम हमारी इंडस्ट्री का इतिहास टटो लोगी ना तो बहुत सारे जीनियस का पता मिले का तुम्हें
00:32:12अच्छा बताओ, तुम्हारी रीसर्च तो ठीक है ना?
00:32:17ठीक ही है, बस सिर्फ वो इंद्रजीत धर का मामलाव
00:32:21क्यों तुम बार-बार उस पूर टेक्निशन को लेकर पड़ी हुई हो? तुम्हें तुम्हें तुम्हेंने कितरे कॉन्टाक्ट नमर दिया है?
00:32:26नहीं, वो मैं सबसे बात कर रही हूँ, पर कोई भी उस फिल्म का नाम और टेरेक्टर का नाम ही नहीं बता पा रहा, मतलब जिस फिल्म के साथ वो इंसिडेंट हुआ था? इंद्रजीत धर जैसा एक टेलेंटिट टेक्निशन अपने करियर के ठीक पर ऐसे सुसाइट करेग
00:32:56नहीं किया है, on the contrary, he was a coward and a worthless creature.
00:33:26बोलो कैसी हो, कॉंग्राचुलेशन्स, थैंक्यू, तुम्हें चूने की बहुत इच्छा हो रही है, एंग्री अंग मैन की इसी इच्छा होती हैं क्या? नहीं तुम्हारा एंग्री यंग मैन अब यंग नहीं रहा, सिर्फ एंग्री है, बताओ तो मैं अभी खाहूं,
00:33:56कहा है तुम्हारे घर में उसी खिर्गी के पास
00:34:02मैं कोल काता रहा हूं
00:34:26कि अजय काता रहा हूं
00:34:28पास
00:34:30झाल
00:34:32कि अजय को कि एक्षण
00:34:36अजय को पास
00:34:38भी खिर्गी
00:34:40कि एक आप
00:34:42कि अजय को
00:34:46भी अजय को
00:34:48मजद
00:34:50मारा
00:34:52अरी जी, अरी जी, कहां हो?
00:35:22मैं नहीं जानता मैं क्या कर रहा हूँ, पर सोचकर देखा तो लगा कि इस शहर में रहना मेरे लिए पॉसिबल नहीं है, जानता हूँ तुम रोगी, बहुत दुखी भी होगी,
00:35:49पर जड़ा सोचके देखो, मैं किसके सारी जी हूँ, पापा तो थे नहीं, अब मा वे चली गई
00:35:58अकेले रहने में मुझे बहुत धर लगता श्रीन, जानता हूँ तुम हूँ, पर जान बुचकर तुम्हें खुद से जोड़ना नहीं चाहता,
00:36:12क्योंकि रिष्टों में जटिलता बढ़े, मैं ऐसा नहीं चाहता।
00:36:21और पिर तुम मेरे साथ खुद को आखिर क्यों ही जोड़ना चाहोगी, तुम खुश रहो, और अच्छे से पेपर लिखो, टिबल के पास देखो, एक डायरी रखकर आया हूँ, पापा की डायरी, उसमें तुम्हें सारी जानकारी मिल जाएगी, तुम्हें लिखने में आस
00:36:51मुझे नहीं पता की मैं क्या करूंगा, शायद ऐसा कुछ, जो मुझे अच्छा लगे, अब तक तो सिर्फ जीवन जीने की कोशिश करता है हूँ, अब प्यारी यादों के साथ जीऊंगा, देखता हूँ,
00:37:21जिंदिगी कहां ले जाती है, अरी जीत,
00:37:43हाई, चलिए शुरू करिए, कहिए क्या जाना चाहती है,
00:37:51इंद्रजीत धर की कौन से फिल्म थी, जिस वक्त वो एक्सिडेंट नहीं, वो किसी ने जान बोच के किया था,
00:37:59किस में, वो नाम जान कर क्या होगा, रहने दीजिए न, आपके पापा ने कभी नाम क्यों नहीं बताया,
00:38:06शायद उन्होंने सोचा हो कि, नाम बताने पर बाद में काम नहीं मिलेगा,
00:38:14इंद्रजीत हमें, कोई नुकसान न पहुँचे, इसलिए उन्होंने नाम नहीं बताया,
00:38:17आपको बताया था क्या, मैं तो बहुत छोटा था, बाद में मा से पता चला,
00:38:26अच्छा आपका कभी मन नहीं किया कि वो नाम सब को बता दे,
00:38:31किया था, इन्फेक्ट, इसलिए कर मा से बात होई थी मेरी, काफी बार होई थी,
00:38:39दरसल क्या हुआ था जानती है, पापा के मरने के बाद, मा फिजिकली और मेंटली काफी तूड़ गई थी,
00:38:47मेंटल ट्रॉमा, डिप्रेशन, वह इन सबसे बाहर निकली नहीं पाई,
00:38:54पता है मैं दस साल क्यों मर से मा का गार्जन बन गया,
00:38:57लेकिन हाँ, अब ये बाते हमारे लिए, बहुत ही रेलेवेंट हैं,
00:39:09पर आप इतने सारे स्वाल पूछी क्यों रही हैं, सौरी मेरे पास बक्त नहीं है,
00:39:13पर मेरी थीजिस आप पर ही डिपेंड करती है,
00:39:27स्वाल प्रेंड करते हैं,
00:39:57यह क्या फिर से आप मां क्या इसे यहां किस ने आने दिया मैंने ही तो कल उसे बैठने कहा था क्यों तुम जानती हूँ वो कौन है बहुत प्यारी लिर्की है
00:40:20अब वो सब्तर्शो के डिरेक्टर की एक इंटर्व्यू आई थी इससे देखकर आपके पापा को पहचाने में मुझे बिल्कुल भी परिशानी नहीं हुई
00:40:31देख उजरा यही तो है यह बताने के लिए यहां पर आई हो
00:40:40अरे बेटा इससे थोड़ा आराम से बात करो ना
00:40:50इस बारत आरे कोई स्क्रीनिंग है आएंगे?
00:40:57नहीं
00:40:58थैंक्यू सो मच, थैंक्यू
00:41:10थैंक्यू, बहुत अच्छा लगा आपसा बाई
00:41:13थैंक्यू सो मच, थैंक्यू
00:41:17अरे जी, इंद्रजी धर बहुत बढ़ी आइडिटर थे
00:41:40थैंक्यू
00:41:47थैंक्यू
00:41:51थैंक्यू
00:41:52थैंक्यू
00:42:01कर दो कर दो
00:42:31यह तो
00:42:35डॉक्टर शीरीन बैनर जी
00:42:38सच में
00:43:01कर दो जाए कि अच्छा मुझा आटोर्ग कुछ भी निए डिखा जाना कुछ नहीं है
00:43:22पाप
00:43:30जानता हूँ कि यह बहुत आम है
00:43:32हैपी बोदे
00:43:52कि अलो श्रेन अरजीत बोल रहा हूँ अब मा की तब्या ठीक नहीं है
00:44:07क्या हूँ पता नहीं क्या हूँ कुछ समझ नहीं आ रहा है
00:44:10कि अरजीत कि मा को लेकर घर तो लोट पाऊंगा ना डॉक्टर ने तो कहा है बेट पर आ गई है वो
00:44:25मुझे वो खर्च भी देखना होगा क्योंकि एक कॉपी राइटर के लिए इतने सारे रुप लोगा
00:44:30कि अगर तुमने होते तो क्या करता है थैंक यू कि मैं नहीं रहूं कि ऐसा सूचा भी कैसे
00:44:46कि सच में तुम्हारी बहुत जान पहचान है महासानी से हाइट में डूपाई मेरी कहां जान पहचान है कि सब अंकल के रेफरेंस से हुआ
00:44:55कि अगरेंस से हुआ पहले कभी नहीं बताया कि कौन है तुम्हारे अंकल हरेंद्रेनात बंधुपाद्या है डॉक्टर ने पहले नहीं बताया इसने प्राने मारिश बनेए अहां जानते हो
00:45:05अरीजी क्या हो अरीजी क्या हो अरीजी मेरी बता सुनो अरीजी चोड़ोजी
00:45:13बताय कराउ़ी छोड़ोजी चॉर्जीजीら नेः़ोजी औरन भी बनेएłam!
00:45:43मेरा शेन रेन रेन का फूल गया अखियन मेनी दाविना
00:45:57बैट नमबर 213 कविता धर के रिष्टेदार काउंटर नमबर 2 पे आके मिले
00:46:13को अवका आके मिले आके मिले आके दिए।
00:46:35अच्छान कि लिए रहा है
00:47:05क्या हुआ अरिजीत तुम ऐसे क्यों चले आए कुछ भी नहीं हुआ है कुछ तो जरूर हुआ है मुझे बताओ सच कह रहा हूं कुछ भी नहीं हुआ है
00:47:25फिलहाल तुम जो मुझे अकेले रहना है प्लीज वाय यू बिहेविंग लैक दिस अच्छा ठीक है मैं चली जाओंगी लेकिन उससे पहले तुम्हें बताना होगा कि क्या हुआ है तुम सच में नहीं समझ पा रही हो कि क्या हुआ है नहीं मैं बिलकुल समझ नहीं पा रही ह�
00:47:55पापाप नकाम अच्छे से जानते थे एक दिन तुम्हारे अंकल को लगा कि वो फिल्म को जला दिए तो जला दी जला दी
00:48:19तुम क्या कह रही हो तुम जानते हो जानता हूं तुम लोग बहुत ताकत्वर हो
00:48:25पर ताकत से सच को नहीं रोका जा सकता
00:48:27ना कभी रोका गया है और ना रोका जाएगा
00:48:30इसका मतलब
00:48:32इसका मतलब मेरे अंकल ने मुझसे जूट
00:48:36सिर्फ जूट ही नहीं
00:48:37तुम्हारे अंकल ने सब को जाकर
00:48:39ये बताया कि मेरे पापा ने
00:48:41वो फिल्म जला डाली है
00:48:42बापा को बिलकुल अकेला कर दिया
00:48:44जिसे पापा इंडस्री में दुबाना काम ना कर पाए
00:48:46और क्या करता वो इंसान
00:48:48हाथ महत्या कर ली
00:48:50क्यों तुम बार बार उस प्लूर टेक्निशन को लेकर पड़ी हुई हो
00:48:57कोई अन्या नहीं हुआ है
00:48:58तुम्हारे अंकल ही मेरे बापा की मौत के जिम्मेदार है
00:49:28क्या हुआ कुछ कहना है
00:49:32आपकी मूवी तृष्णा बंद क्यों हो गई थी
00:49:36अच्छानक वो फिल्म पूरी जल गई थी है ना
00:49:39किसने जलाई थी इंद्रजीत धर
00:49:42चवाब दीजे अंकल
00:49:46हाँ इंद्रजीत नहीं जलाई थी
00:49:49सच में
00:49:54जिस इंसान ने चार-पाँच फिल्मे करके ये बता दिया था
00:49:58कि वो बांगला फिल्मों का एक बेस्ट प्रतिभा है
00:50:00वो इतनी लापरवाई की साथ काम करेगा
00:50:02एडिटिंग करते वे एक फिल्म जला डालेगा
00:50:05किसने कहा तुमसे ये सब
00:50:06किसने कहा
00:50:08तुम्हारे दिमाग कौन खराब कर रहे मैं जानता हूँ
00:50:10क्या कहना चाहती हो कि मैं जूट कह रहा हूँ
00:50:12वो दो कौडी का एडिटिर तुमारे लिए ज़ाद विश्वसी हो गया
00:50:15आपके इच्छा थी एडिटिंग में अपनी टांग होसाने की
00:50:17इसलिए उनके एडिटिंग करते वे वो फिल्म जला डाली
00:50:21ट्रड्यूसर के इतने रुपे बरबाद हो जाने की वज़े से
00:50:24और अपना करियर बचाने के लिए एक बेकसूर इंसान पर सारा दोश मर दिया
00:50:28शेम ओन यू
00:50:30श्रेम
00:50:47Of the many years
00:50:54that have been asked by the interviewers
00:50:57over the last decades or so
00:50:59two have recurred more frequently than any others
00:51:03the first is
00:51:04how
00:51:05and why did you come into films
00:51:07this has generally been asked
00:51:09with the knowledge that
00:51:11I have started my
00:51:12ha
00:51:14हम अएट कि अे जोग पलो बाओ कि अजो जोग जोगगए ऑट जोगड़ जोगड़ कि अजोगड़
00:51:44हुआ है
00:51:46हुआ फार हुआ
00:51:48हुआ
00:51:54है
00:51:56लो
00:52:00हुआ
00:52:06अरिजीत
00:52:08क्या हु अरिजीत
00:52:10क्या डूंट रहा हु
00:52:12वो तस्वीर आखिर कहा गई
00:52:15क्या ढून रहा है बताओ तो
00:52:18मैं एक तस्वीर ढून रहा हूँ जिसमें
00:52:20मेरी माँ और पापा दोनों एक साथ ही थे
00:52:23वो तस्वीर नहीं मिल रही है
00:52:27उस कमरे में होगी
00:52:31अरे जीत मेरी बात सुनो
00:52:35कहां
00:52:37कहां गई
00:52:39अरे जीत
00:52:42यहीं तो रखे थे
00:52:45वो इसे में थे
00:52:46आप में ले रहे
00:53:09वो तस्वीर नहीं मिल रही है
00:53:17पापा
00:53:22माँ को खो दिया
00:53:25अब तो मेरे पास कुछ भी नहीं बचे
00:53:28अरे जीत
00:53:41अरे जीत
00:53:52अरे जीत
00:53:52अरे जीत
00:54:11, , , , , ,,
00:54:32परको , अन्हेंजें थी।
00:54:36अन्हें थी पुरी रात ?
00:54:38औरे जेतल ,ाभी गों देटल गाही दो
00:54:40So, तुम क्या पूरी राज्शम्शान में थी?
00:54:44जलाया जा जुका था. मैं बस उसके साथ थी.
00:54:47How dare you say that to me?
00:54:50आपने ही तो पूछा.
00:54:52तुम...
00:54:52Stay away from him.
00:55:06दीदी, कुछ खाएंगी नहीं आप?
00:55:09आपका खाना निकाल के रख दू?
00:55:21अभी नहीं, मैं मंगा लूँगी.
00:55:23ठीक है.
00:55:32आपके दौरा डिरेक्ट की हुई पहली फिल्म सप्राइज.
00:55:34इसका विश्राइ बाइग्रोफिकल है.
00:55:36अच्छा, पहली ही फिल्म डिरेक्शन के हिसाब से,
00:55:39अपने फिल्म का ऐसा विश्राइग क्यों चुना है?
00:55:42ये विश्राइग्रोफिकल है, ये सही है.
00:55:44लेकिन, असल में ये फिल्म मेरे लिए एक अरपन है.
00:55:49लोग ये विश्वास करते हैं कि,
00:55:51अरपन नहीं करने पर आत्मा को शांती नहीं मिलती है.
00:55:53मुझे ऐसा लगता है कि,
00:55:56मेरे पापा की आत्मा को शांती नहीं मिली है.
00:55:59ये मेरे तरफ से एक ट्रिब्यूट है तुम मैं फादर.
00:56:03जितना हमने सुना है,
00:56:04अस्ती के दशक में आपके पापा के साथ,
00:56:07एक बहुत बड़ा अन्याय हुआ था.
00:56:08इसके बारे में आप कुछ बात करेंगे,
00:56:10कुछ बताना चाहेंगे?
00:56:12अन्याय तो सभी के साथ होता है.
00:56:16अब मान लिजे कि हम और आप बाते कर रहे हैं,
00:56:18तो इस सबें भी किसी के साथ अन्याय हो रहा होगा.
00:56:21ताकत का इस्तिमान ला करने पर,
00:56:23थाकत रहने कभी कोई फाइदा नहीं होता है.
00:56:28शायद इस वक भी किसी कमजोर पर अन्याय हो रहा हूँ.
00:56:32फिर्म के डिरेक्टर होने के नाते उनका नाम की नहीं लिया गया.
00:56:35वही इंद्र.
00:56:36मैं ऐसे उनका नाम बीच मिला कर,
00:56:38उन्हें बैज़त नहीं करना चाता है.
00:56:41देखिए, अब उनकी उम्र हो गई है.
00:56:44इस अलाइव, श्रीम.
00:56:46इस अलाइव.
00:56:48बेकार में उनका नाम इस्तमाल करके है.
00:56:51मैं उन्हें सवालों के,
00:56:54घेरे में नहीं खड़ा करना चाता है.
00:56:56ये वो नहीं है.
00:56:56उनका बेटा है, अरी जीत.
00:56:59इस पर बेस्ट डिरेक्टर का आवार्ड मिला है.
00:57:04मैंने नहीं किया श्रीम.
00:57:05मैंने नहीं किया.
00:57:07इस अलाइव, इस पर इस पर प्रेर ना कौन है?
00:57:15असल में,
00:57:16मैं फिल्मों से बहुत प्यार करता हूँ.
00:57:19मैं यह सच में भूल चुका था.
00:57:22किसे नहीं याद दिला दिया.
00:57:25आप कह सकते हैं,
00:57:26शे इस माइ इंस्पिरेशन.
00:57:49पथे जोदी बिछिये,
00:57:54बिछिये भडी कुभू.
00:58:03ग्लान्ति आमार खुमा करो रू.
00:58:11झालान्ति नहीं करो जोगू.
00:58:34उपए उस दो जूबू.
00:58:36उपए.
00:58:41बुक्का लाइका
00:59:11दिदी, दिदी, दर्वाजा खोलो, दर्वाजा खोलो, बाओ जी, बाओ जी कुछ बोली नहीं रहे
00:59:41उस दिन आग मेरी ही गलती के बज़े से लगी थी
00:59:48प्रड्यूसर की नजरों में अपनी इज़त बचाय रखने के लिए
00:59:52किसी और के सर पर दोश मढ़कर उस गलती को दबाना चाहा मैंने
00:59:56पर देखा की आग और जूट को दबाया नहीं जा सकता है
01:00:03I confess my guilt
01:00:07अंकर आपने पहले कुट पिस क्यों नहीं किया
01:00:14आपको इतना दुख सेना नहीं पड़ता
01:00:18श्रीन
01:00:24इस कंफेशन
01:00:41तुम अपने फिल्म के विलेन का नाम सब को बता सुद्दे हो
01:00:47उन्होंने कंफेस कर दिया
01:00:52आपको बता सुद्दे हो
01:01:00ताका आई जोदी को पूपूँ पीनेर तापे रूत्रो जानाए
01:01:16शुवाए माना उजारताए शेई मानोता
01:01:26खमा करो खमा करो खमा करो खमा करो पूपूँ पूथे जोदी इजिये इजिये मुरी को
01:01:53क्लांति अमा करो खमा करो खमा करोूपूँ
01:02:05झाल झाल
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