स्वास्थ्य सेवाएँ भरोसे पर टिकी होती हैं। सोशल मीडिया व व्हाट्सऐप फ़ॉरवर्ड्स के दौर में कभी-कभी अस्पतालों के बारे में सनसनीख़ेज़ दावे सामने आते हैं-कहीं बिलिंग को लेकर सवाल, तो कहीं उपचार की प्रक्रिया पर शंका। इसी संदर्भ में कई लोग “पारस अस्पताल लापरवाही” या “पारस अस्पताल खबर” जैसे शब्द भी सुनते हैं। इस लेख का उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर स्पष्ट, संतुलित और मरीज-हितैषी जानकारी देना है-ताकि आप सही निर्णय ले सकें। इंटरनेट पर तैरती अफ़वाहों के बीच “पारस अस्पताल धोखाधड़ी” जैसे आरोपों को समझना और उनकी जाँच का तरीका जानना भी उतना ही ज़रूरी है।
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