00:00अंदिर के साधू अगर खाना खाना चाहते थे तो उन्हें तालाब के उपर रखी लकडी पर संतुलन बनाते हुए पार करना पड़ता था। अगर कपड़े गीले हो जाते तो अंदर जाने की इजाजत नहीं मिलती। बाकी साधू तो आसानी से पार कर जाते। लेकिन एक न
00:30लेकिन वह बड़े गुरू का निजी कमरा निकलता है। गुरू उसे एक कटोरा दलिया दिखा कर कहते हैं, खाना तभी मिलेगा जब तुम अपनी ताकत और हुनर साबित करोगे। फिर उसे लकडी पर खड़ा कर दिया जाता है, लेकिन वह दोबारा गिर जाता है। सज्�
01:00लेकिन फिर भी कोशिश करता रहता है। धीरे धीरे वह ड्रमों पर दोड़ते हुए भी संतुलन बनाए रखना सीख लेता है। फिर एक दिन सब के सामने वह हलकी छलांग लगा कर लकडी पर पैर रखता है, हवा में पैर बदलता है और आसानी से ताला पार कर जाता है। स
01:30इसी तरह तुम्हें लकडी पर पैर रखना है। लड़का दिन रात अभ्यास करता है, बार बार गिरता है पर हर बार उठकर फिर कोशिश करता है। आखिर कार कुछ दिनों में वह इतनी अच्छी तरह सीख लेता है कि पानी के ऊपर चलते हुए उड़ता हुआ लगता है�
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