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Delhi Artificial Rain: दिल्ली की हवा एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। सांस लेना मुश्किल हो गया है और इसी बीच सरकार ने प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए एक नया प्रयोग किया क्लाउड सीडिंग, यानी कृत्रिम बारिश का प्रयास। उम्मीद थी कि आसमान से गिरती बूंदें जहरीले कणों को धोकर हवा को साफ कर देंगी। लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं रहा। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो ठीक से बारिश हुई और न ही प्रदूषण में कोई राहत मिली। अब विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं क्या यह प्रयोग सिर्फ दिखावा था या फिर जनता के पैसे की बर्बादी?

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00:00दिल्ली की हवा एक बार फिर खतरनाक इस्तर पर पहुँच चुकी है।
00:03चांस लेना मुश्किल हो गया है और इसी बीच सरकार ने प्रदूशन से राहत दिलाने के लिए एक नया प्रियोग किया
00:08Cloud Seeding यानी कृत्रिम बारिश का प्रियास।
00:11उमीद थी कि आस्मान से गिरती बूंदे जहरीले कड़ों को धोकर हवा को साफ कर देगी।
00:16लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं रहा।
00:18करोणों रुपए खर्च होने के बावजूद ना तो ठीक से बारिश हुई और ना ही प्रदूशन में कोई राहत मिले।
00:23अब विशेशक के सवाल उठा रहे हैं कि क्या ये प्रयोग सिर्फ दिखावा था या फिर जनता के पैसे की बरबादी।
00:29दिल्ली की हवा हर साल और जहरीली होती जा रही है।
00:32सांस लेना मुश्किल हो गया है, आँखों में जलन और आसमान में फैले दुन्ध, अब आम बात बन गई है।
00:37इस प्रदूशन से राहत पाने के लिए सरकार ने क्लाउट सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश का प्रयोग किया।
00:43उमीद थी कि इससे हवा साफ होगी लेकिन नतीजा उमीद के विपरीद रहा।
00:47दिल्ली सरकार ने आयाइटी कानपूर के साथ मिलकर पांच ट्रायल की योजना बनाई है, जिन पर करीब 3.2 करोड रुपे खर्च होने हैं।
00:55अब तक 3 ट्रायल किये जा चुके हैं लेकिन बारिश बहुत कम हुई और प्रदूशन में कोई खास बदलाव नहीं आया।
01:25दिखावटी हैं, असली जरूरत है वहनों, फैक्टरियों और निर्मार कारेों से निकलने वाले दुएं को रोपने की।
01:31दिल्ली को आप चाहिए इस्थानी समधान क्योंकि कृत्रिम बारिश से नहीं बलकि सक्त नीतियों और जिम्मेदार कदमों से ही हवा साफ हो सकती है।
01:39जिल्श न्य।
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