00:00गंगा तट पे अर्ग बनावन सूरज देव के गार सुनावन
00:21भोर भैल अंजोर भैल भपती के भाव मन में खिल ओहो छठी में आवली अंगना सजगैल पूरा जहान रे
00:41सोहर गावे सुहागिन नारी सुख सम्रद्धी के वरदान दे ओहो छठी में आव
00:51अर्ग देव अर्ध्य सूर्य भोर में गुंज नहोय हर घाट तोर में
01:13कसार ठे कुआर पन धरे भपती बाहे मन के सागर में ओहो छठी में आ
01:25कांच के घटवा जल से भरे दीप जले चारों और धरे
01:47माई के चहरा हसल बाजे जै छठी माई सब मुख सजे ओहो छठी मैं गी आ
01:59नदिया बोले पवन सुनाए सुरज देवासल पावे नमन करी हर जनमन माही मैं आच छठी सुख देता ही
02:15ओहो छठी मैं गी आ
02:19नारी तपस्या मातु समान छठी माई के अवरत गान
02:37सूर्य किरन में जिल मिल जोती भकती जगावे अमर प्रान
02:47ओहो छठी मैं आखे पूजा निराला भोर भई लोगे भान उजाला
02:59धर्टी कावे गगन मुसकावे शठी माई सुख शांती वरसावे
03:09जए में आजे हूँ
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