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  • 4 weeks ago
🙏 ॐ नमो नारायणाय 🙏

इस वीडियो में प्रस्तुत है पावन “श्री हरि स्तोत्रम्”,
जो भगवान विष्णु / श्री हरि / नारायण की महिमा, करुणा और संरक्षण शक्ति का स्तवन है।
श्री हरि स्तोत्रम् का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, भक्ति भाव जागृत होता है और जीवन में धर्म, विवेक व संतुलन आता है।

यह स्तोत्र विशेष रूप से
🌸 प्रातःकाल पाठ
🌸 विष्णु पूजा
🌸 एकादशी व्रत
🌸 ध्यान और साधना
के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

📿 स्तोत्र के लाभ:
• मन की चंचलता शांत होती है
• नकारात्मक विचार दूर होते हैं
• श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है
• भक्ति और श्रद्धा बढ़ती है

इस पावन स्तोत्र को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए

This video presents the sacred "Shri Hari Stotram,"
which is a hymn praising the glory, compassion, and protective power of Lord Vishnu / Shri Hari / Narayana.
Reciting the Shri Hari Stotram brings peace of mind. Devotional feelings are awakened, and religion, wisdom, and balance come into life.

This hymn is considered especially auspicious for:
🌸 Morning recitation
🌸 Vishnu worship
🌸 Ekadashi fast
🌸 Meditation and spiritual practice

📿 Benefits of chanting this hymn:
• The restlessness of the mind is calmed.
• Negative thoughts are dispelled.
• The grace of Lord Hari is obtained.
• Devotion and faith increase.

🙏 Like | Share | Subscribe अवश्य करें।
जय श्री हरि | जय नारायण 🌸

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Music
Transcript
00:00जग चल पालं चलत कंध मालं
00:29शरचंद्रभालं महादयत्यकालं
00:35नाभो नीलकायं धुरावारमायं सुपत्मासहायं भजेहं भजेहं
00:46सदाम भोधिवासं गलत उष्पहासं जगत्सन्निवासं शतागित्यभासं
00:57कदाचक्रशस्त्रम लसत्पीतवस्त्रम हसत्चारुवक्त्रम भजेहं भजेहं
01:08रमाकंठ हारं श्रुति व्रात सारं जलात विहारं धराभार हारं
01:18चीतानंद रूपं मनुप्यस्वरूपं थृतानेक रूपं भजेहं भजेहं
01:29जराजन महीनं परानन्द पीनं समाधान लीनं सदैवान वीनं
01:40जगत जन्म हे तुम सुरानी कके तुम त्रिलो कैकसे तुम भजेहं भजेहं
01:51कृताम नायगानं खगाधिशयानं विमुक्तेर निदानं हराराति मानं
02:02स्वभक्तानो खूलं जगत प्रुक्षमूलं नेरस्तार्त शूलं भजेहं भजेहं
02:13समस्तामरेशं विरेपाभकेशं जग्विंबलेशं रुदाकाश देशं
02:24सदा दिव्यदेहं विमुक्ता खिलेहं सुवई कुंठगेहं भजेहं भजेहं
02:35सुराली बलिष्ठं त्रिलो की वरिष्ठं गुरू नांगरिष्ठं स्वरू कैकनिष्ठं
02:46सदा युद्ध धीरं महां वीरवीरं महां भोधितीरं भजेहं भजेहं
02:57रमावामभागं तलानक्रनागं खृताधीनयागं गतारागरागं
03:08मुनींद्रै सुगीतं सुरै संपरीतं गुनाद हैरतीतं भजेहं भजेहं
03:19दम्यस्तू निच्यं साधाय चित्तं पठे दश्टकं कंधहारं मुरारे सविष्णूर्वेशोकं धुरूवं याति लोकं सराजन्मशोकं पुनर्विंद तेनों
03:41इतिश्वी परम्हस स्वालि प्रहानंद विर्खीतं श्रीहरिस्तोत्रं संपूरणं
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