00:00कर दो
00:30अधिश्मती को नया राजा मिल चुका था पर ताज सिर्फ राजाओं का नहीं
00:39दुश्मनों की नफरत का भी वारिस होता है और हर ताज की छाया में एक पुराना बदला जलता है
00:48प्रूप दज गडिए अरण बदला बदला बदला का भी वार ताज ब सने उन्सव कर दिए वार बदला बदला बदला का जन्सरीट बदला बदला है
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01:59यक्रह यक्र साह
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02:06प्रहश हना
02:06फिसी रफिह starts
02:08ये रफ़ दो
02:09जिस दिन अमरेंद्र का खून धर्ती में बहा, उसी दिन एक और सामराज्य ने कसम खाई थी
02:25कसम कि महिश्मती की गद्धी तब तक चैन नहीं पाएगी
02:30जब तक उनका वारिस लौट कर इतिहास नहीं पलट देता
02:36मेरे पिता ने इस धर्ती को खून से सींचा
02:40अब मैं उससे इंसाफ से बचाऊंगा
02:44महिश्मती सिर्फ मेरा हक नहीं
02:48मेरी कसम है
02:50मेरा नाम मेरे पिता का बोज भी है
02:54और मेरी मां का आशीरवाद भी
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