00:00आपने कई उन्चे हाईवे और रेलवे पूल देखे होंगे लेकिन क्या आपने कभी
00:29सोचा है कि बहुती नदी पूल बनाते समय खांभों की नीम कैसे रखी जाती है यहाँ जमिन पर पुदाई करके आसानी से किया जा सकता है लेकिन नदी की तेज और गहरी धाराओं में यही काम बहुत खतरनाक होता है
00:47यहाँ समझा जा सकता है कि मजदूरों की समझ खत्म हो जाती है क्योंकि जरासा भी गलती सब कुछ बहा सकती है
01:01इस सबसे मुस्किल इंजिनियरिंग काम का राज कनफरडेम टेकनोलोजी है यहाँ एक टेमपरारी वाटर टाइट स्ट्रॉक्चर है जो नदी के बीच में एक सुखा एरिया बनाता है
01:21सबसे पहले एक सर्वे नदी में पूल की नीम रखने से पहले इंजिनियर गहराई मिटी की मजबूती और बहाव की स्पीड को मापते हैं फिर पूल का डिजाइन बनाया जाता है
01:41स्टील की दिवर कानफरेडम के लिए 10 से 20 मिटर 90 स्टील सीट को हाइडरोलिक हथोड का इस्तमाल करके नदी के तल में गाड़ा जाता है
02:02फिर इन्हें एक दुसरे से जोड कर एक गोल या चोड कर दिवर बनाई जाती है जो पानी को अंदर आने से रोकती है
02:15फिर कानफरेडम से पानी निकलने के लिए एक बड़े पॉंप का इस्तमाल किया जाता है
02:25जब कानफरेडम के अंदर का एरिया पूरी तरह सुख जाता है तो वो वरकर उसमें उतरते हैं और जमा हुई रेत मीटी और पत्थर हटाते हैं
02:40जहां मीटी कंजर होती है वहां पाइल फाउंडेशन या लोहे के लंबे पाइप 20 से 25 मिटर गहरे गाड़ दिये जाते हैं
02:55फिर इसके उपर कंक्रीट का स्ट्रॉक्चर बनाया जाता है
03:00यह काम इतना खतरनाक होता है कि जरा सी भी गल्ती या भूकम सब कुछ बरबाद कर सकता है
03:12इसलिए पानी के लेवल पर लगातार नजर रखने के लिए सेंसर लगाए जाते हैं
03:22और वरकर हमेशा लाइप जैकेट और हेलमेट पहनते हैं
03:28अगर नदी गहर ही है तो कैशन टेक्निक का इस्तमाल किया जाता है
03:39यह बहुत बड़े वाटल टाइट बक्स होते हैं जिन्हें नदी के तल में उतरा जाता है
03:49अब पूल की नीब रखने का वीडियो देखिये जो इन दिनों सोसियल मीडिया पर घूम मचा रहा है
04:00हाहे
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