00:00आस्था और कला का संगम गया के फल्गू नदी के तट पर देखने को मिला और सूप पर अपनी श्रद्धा उकेरती ये हैं प्रियंका कुमारी जो इन सूपों पर मदुमनी पेंटिंग बना रही हैं इनकी पेंटिंग का शौग जो अब भक्ती का रूप ले चुका है
00:20शुर्यदेब और छट माता का चित्र बनाते वो कहती हैं कि ये चित्र बनाते हुए ऐसा लगता है जैसे खुद अर्ग दे रही हूँ
00:29घाट है जो भड जाएगा स्रधालאש से और चट में जितनी भी माताए हैं वो सब यहां पे उपस्तित रहेंगी
00:40मतलप चट घाट ही से इ मुपर बना के आप आस्था को मतलब ये कर रहेंगे
00:46जी हाँ मैं चट घाट पर ये बना करके जो आस्था है जो मेरी कला है उसको मैं दिखाना चाहती हूँ प्रदर्शित करना चाहती हूँ
00:56प्रियंका कोरे सूपों पर अपनी मदुबनी पेंटिंग से इनको जीवंद कर देती हैं
01:01गन्ना फल दिये केले के पत्ते मिट्टी का हाथी और उसके उपर छोटा घड़ा महिला का सुर्ज भगवान को अर्ग देते हुए चित्र इनकी आस्था को प्रकट करते हैं
01:13यह कला मिथला की परंपरागत शैली पर आधारित हैं जिनमें प्राकरतिक रंगों ज्यामीतिया आकरतियों और सांस्कृतिक परतीकों से देवी देपताओं प्रकरति और लोग जीवन की कहानियों को दर्शाया गया है
01:27प्रियंका सूप पर केबल इस कला को ही नहीं बनाती बलकि वो छात्रों को इस कला का प्रशिक्षन भी देती हैं
01:50अब तक 500 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित कर चुकी हैं उनका मानना है कि ये कला ना केबल आर्थिक स्वाशक्ति करण का माध्यम बनती हैं बलकि विहार की सांस्कृतिक विरासत को विश्युपटल पर फैला भी रही हैं
02:04इतीवी भाग के लिए गयासे सर्ताग एहमत की रिपोर्ट
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