00:00गुरु शेश्य समवाध है कि वो शेश्य था तो वो यहां पे ऐसे चोटी बनाये था लंबी पहले चलता था और ये बड़ा रहता था कि कंठस्त कर लो तो कि ता मुद्रन प्रिंटिंग इतना था नहीं तो जितने भी ग्रंथवन्त होते थे उनको याद रखना पड़ता थ
00:30पर कील गाड रखी है और उसमें उसने कील में ऐसे चोटी बान दी है तो गुरु आए गुरु बोले ये क्या कर रहे हो तो वो बोला कि नीद आती है जब नीद आती है तो ऐसे गिरेंगे जब तो चोटी खिचेगी दर्द होगा तो उठ जाएंगे इसलिए चोटी को यहा
01:00इसे नहीं करोगे, यह नहीं ठीक है, चोटी खोल दी, दस मिनिट बाद आए तो वहाँ पर सोया पड़ा है, तो गुरुजी ने उसे उठाया, बुले, क्या हुआ, बुलता है, आपसे कहा था ना, नींद अपना काम कर गई, बुले, नींद अपना काम जानती है, तू अपना
01:30अपना काम जानती है, तू अपना काम क्यों नहीं जानता, नींद माने दे, नींद माने दे
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