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Transcript
00:00जो सचमुच अपना होता है ना, इंसान उस पर इसी को थूकने नहीं देता है
00:04हम किदी परेटरन स्थल पर जाते हैं, कोई बहुत पुरानी इमारत हो सकती है, गुफा हो सकती है
00:10और वहाँ पर हम जाकर के कुरेद कर आ जाते हैं, पिंकी लव्ज मोनू
00:16राजय पहरेवन गयरा की बसे होती हैं, लोग बैन लेके सामने की पहले सीट फाड़ देंगे
00:20और फिर उस उंगली डाल डाल के उसको नोच रहें
00:22रेलवे में बैठे हुए हमाँ मुमफली के छिलके फैला दिये, ऐसी थोड़ी हर चीज धंदी हो गई है
00:27रेलवे सेशन पे महिलाए होंगी, वो ठीक पटरी के बीचे बठा करके बच्चों को शौच करा रही होंगी
00:33क्यों करा रही होंगी? क्योंकि जो शौचाला है उसमें जो पिछला आदमी गया था
00:36उसको इतनी तमीज नहीं थी कि पानी डाल के आ जाए
00:39यह आदमी गंदा है, इसका रिष्टा गरीबी से नहीं है, इसका रिष्टा संसकार से है
00:44हमारे जो लोकधार में एक संसकार है ना, उनमें गरिमा आत्मसमान की बहुत कमी है
00:48भारतियों की घर गंदे नहीं होते हैं, आप गौर करिएगा
00:51रसोईयां गंदी नहीं होती है, हमारे जब सारजोन एक स्थान है न वो गंदे होते हैं
00:56क्यों? क्योंकि गिरी से गिरी माननेता भी भारतियों में पाई जाती है
00:59कि मुझे अपना बस ठीक रखना है, बस बतालों में देखिए दीवालों पर लोगों ने क्या कर रखा है
01:05और जब हमें हर तरफ से गंदगी गंदी मिल रही है, हर कोई हक रख के बैठा है कि आएगा
01:11और हमारी जिंदगी पर थूक के चला जाएगा
01:13तो फिर हम भी सणकों पर थूकते हैं, हम अपनी नदियों गंदा करते हैं, हम हवाओं को गंदा करते हैं
01:18क्यों, क्योंकि निजिता जैसी तो कोई बात होते ही नहीं न, कुछ भी होता रहे हमें हमें बरदाश्ट हो जाता
01:23है
01:23जो सचमुच अपना होता है न, इंसान उस पर इसी को थूकने नहीं देता है
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