00:00राज़ाने राचे में दिपोटसब को लेकर बाजार पुरी तरह सज़धज कर तयार है।
00:30रगीन जालरे और साजावटे लाइटे खरिदने के लिए ग्राहकों की भीडु मन रही है।
01:00पर एक मिट्टी के दिए ही खरीदेंगे।
01:02हमारे पास 30.500 से स्टार्ट है, 5000 तक अब लेबल है, 400, 500, 600 का भी है।
01:10अपने बनाते हैं? अपने बनाते है, 22 साल से बना रहे हैं।
01:13कितना साल से? 22 साल से.
01:15क्या लगबर इसके क्या महस होता है घरो लाग?
01:17अरवटना ले आते हैं गहर में फूजा पाट करते हैं, घर को सजाते हैं।
01:21अपने बनाते हैं, अपने बनाते हैं, और दिपावली का टाइम है, और इस टाइम है रहे होना भी चाहिए, थोड़ा बोड़ा तो ऊपर ने चो होई है।
01:47अपने बनाते हैं, और दिपावली में जो यूज होता है, दिया, कलसा, मुर्ती, कपड़ा, चुन्री यही सब है।
02:12और क्या फाइदा होता है? बहुत फाइदा है।
02:15लगभग कुछ बताइए।
02:17यह में मुचनी होता हूँ लगता है, कपूर डालके।
02:20मच्छड वेगरा जो है।
02:21सब है खतम होता है।
02:22नहीं आता है मच्छड।
02:23कैसे के जी बेच रहे हैं।
02:25बेच रहे हैं।
02:27कहाँ था हैं आप।
02:29लोधमा।
02:30स्थानिय कुमारों और महिला समूध वरा बनाए गये दी और सजावटे समानों की बिक्री ने दिपोधसब की रोनक को और बढ़ा दिया है।
02:54दिपाबली से पहले ही राची की गलिया और बाजार रोशनी से जगमगाने लगे हैं।
02:58चंदनभटाचारिया, ETV भारत, राची।
Comments