00:00नमस्कार ETV भारत में आपका स्वागत है और आज हम बात करेंगे मिनी ब्राजील के उस प्रितम कुमार की जिसने 14 वरस की उमर में ही जर्मनी तक का सफरते कर लिया है
00:11महस तीन साल की उमर में पिता को खोया और फिर बिहार से शेहडोल आ गए और कच्छा एक से यहीं पढ़ाई की
00:19मतलब अपनी मा का भी साथ छोड़ा और पढ़ाई करते हुए उन्होंने महस 14 वरस की उमर में फुटबाल में एक बड़ा नाम कमाने की दिशा की ओर बढ़ रहे हैं
00:31आखिर प्रितम कुमार के इस खेल के पीछे कितना बड़ा संघर्स हैं आईए जानते हैं
00:36शहडोल के विचारपुरा गाउं इन दिनों देश ही नहीं बलकी विदेश में भी अपनी चाप छोड़ रहा है
00:49वैसे तो इन सभी खिलाणियों की अपनी एक अलग संघर्श की कहानी है
00:54इनहीं मैंसे एक है प्रितम कुमार जिन्होंने महेच छोटी सी उम्र में बिहार से मिनी ब्राजील तक का सफर तै किया है
01:02फिर जर्मनी के लिए सीधे छलांग लगा दी इनका संघर्श आपको इमोशनल कर देगा
01:08प्रितम कुमार शैडोल की रेलवे स्कूल में पढ़ते हैं
01:12वो बिहार के नालंदा जिले के एक गाउं के रहने वाले हैं
01:16जब वो महेच तीन साल के थे तो बिजली की चपेट में आने से उनके पिता का निधन हो गया था
01:22उनके घर की आर्थिक इस्तिती ठीक नहीं थी
01:25उनकी मा प्राइवेट अस्पताल में छोटा मोटा काम करती थी
01:29जिससे घर का गुजारा अच्छे से चल नहीं पाता था
01:32जिससे देखते हुए उनके चाचा पढ़ाई के लिए शैडोल लेकर आए
01:36उनके चाचा शैडोल में रेलवे में ही गुरूप डीवे नोगरी करते हैं
01:41मेरा नाम पेतम कुमा है और मैं फुडवाल केलता हूँ और मैं अभी जर्मानी गिया था
01:47तो वहाँ क्या किया हुआ?
01:49वहाँ हम लोगों एक हफ्ते के लिए ट्रेनिंग दिया लिया जिसमें बहुत अच्छा लगा
01:54यह बताएए आपके चीजें कैसी रही है मतलब फुडवाल का करियर कैसे रहा कहां से सुरुवात हुआ फुडवाल
02:01अच्छा जी नौकरी करते हैं
02:30will get back to the
02:56प्रीतम कुमार फुटबाल में गोल कीपिंग करते हैं और इसके लिए वो हार्ड वर्क भी करते हैं
03:01बतोर गोल कीपर उन्होंने मेह 14 साल की उम्रे में तीन नैशनल खेल लिये हैं
03:07जिन में से दो ओपन हैं और एक स्कूल गेम्स में
03:10साल 24 में महराष्ट के कोलहापुर में वो नैशनल खेल कर लोटे हैं
03:16हमारे यहां से क्लास 10 की सुहानी कोल और क्लास 9 से प्रितम कुमार
03:21यह दोनों बच्चे बहुत अच्छे हैं खेलने में
03:24और फुटबाल में हमारे स्कूल को इन्होंने कई आवाट्स भी दिलाए हैं
03:40प्रितम कुमार हमारे स्कूल के कोच मुहमद रहीं खाना है
04:09अपने जर्मनी के अनुभव के बारे में प्रितम कुमार बताते हैं
04:25वहां पहुँचते ही फुटबाल का क्रेज हमने देखा वो गजब था
04:29हमें वहां अलग से ट्रेनिंग कराई जाती थी
04:32गोल कीपर होने के चलते उन्हें अलग से ट्रेनिंग दी जा रही थी
04:36प्रितम कुमार कहते हैं उनका सपना सिर्फ नेशनल खेलना नहीं है बलकि फुटवाल की इस खेल में भारती टीम को रिप्रेजेंट करना भी है
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