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  • 3 months ago
कोडरमा में गोबर क्राफ्ट के जरिए कई वस्तुएं बन रही हैं. परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता, एक साथ तीनों उद्देश्य की पूर्ति हो रही है.

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00:00कोडर्मा के सत्गावा पर्खंड के पहलवान आश्रम में दिपावली को लेकर पारमपरीक, पर्यावर्निय और आतनिर्भर भारत की तिर्वेनी एक साथ बहर रही है।
00:12यहाँ गोबर क्राप के जरिये दिये और गनेश लच्मी की मुर्तियां तयार की जा रही है, जो न केवल इको फ्रेंडली है, बलकि महिला ससिक्ति करन की भी मजबूत मिसाल बन रही है।
00:26उत्पात तयार कर यहाँ ग्रामिन महिलाएं आर्थिक रूप से ससक्त होकर न सिर्फ आतनिर्भर बन रही हैं, बलकि अपने जीवन अस्तर में भी बदलाव ला रही है।
00:40तब उससे मनलब की हम लोग समील के महिला लोग बना रहे हैं और गोवान से मनलब स्वास्ति हैं और दिया है, उसका बाद मूर्थी है, लचमी भी है, और गनेश्ति है, यह सब-सब प्यारी हो रही है।
00:56बैठे रहते थे हैं, कोई चीज का जटकारी नहीं था, आश्राम में टेटिंग ही हैं 15 दिन, और हम सब गोवर का सब चीज बनाने के लिए हैं, सीखे हैं यहां पर ही, और में आटनेटर ड्यूपी करते हैं, सब चीज बनाते हैं, सुग, लव, दीपक, छटपुजा का सम�
01:26कोई चीज कर सक करते हैं, अपना पेशा के लिए बपनेoit, गुजरात के भुजज से परसिछन प्राप्त कर लोटे राख्टिये जार्खन सेवा संस्थान के कौशा दियर बिजय कुमार, नीतु कुमारी और इसानड्र महतो ने गाउ की महिलाओं को
01:52गोबर से दिया मुर्ती बनाने की तक्निक सिखाई गोबर लकडी के बुरादे से बनी इन वस्तूओं को धूप में सुखा कर इन्हें आकर्सक रंगों से सजाया जाता है जो देखने में काफी आकर्सक लगता है
02:08हम लोग जाकर के वहां परसिच्छन प्रात किये परसिच्छन प्रात करने के बाद वहां से जब से हम लोटे हैं उसके बाद से हम खुद यहां लोगों को परसिचित करते हैं और परसिचित करके ग्रामिन महलाओं को रोजगार के लिए हम प्रियास कर रहे हैं कि ग्रामिन महल
02:38ुपार्जन कर सकते हैं
02:45राष्टिय जार्खन सेवा संस्थान के सचियू
02:48मनोज दांगी ने बताया कि धन 13 को लेकर पूरी तैयारी है
02:53उन्हों ने बताया कि गोबर से बन ये उत्पाद
02:56रेडियेशन से बचाओं में मददगार होते हैं
03:00और सकरात्म पुर्जय का संचार करते हैं
03:04अच्छा दिमांड है इसका और जैसे-जैसे लोग जान रहे हैं
03:07यह नया सुरुवात है तो जैसे-जैसे लोग जान रहे हैं
03:10वैसे-वैसे इसका मांग बढ़ रहा है जरूरत के हिसाब से और जानकारी को शेद्ध
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