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In a rainy village, Suresh pushes his samosa cart through muddy streets!
Watch this fun and inspiring 2D cartoon moral story as Suresh’s hard work and kindness, with a magical sack from an old man, turn his luck around.

But what happens when greed and theft enter the tale?
This Hindi cartoon story teaches kids and adults (11+ years) that honesty and kindness always win!

🔥 What’s the secret of the magical sack? Find out now!
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😹
Fun
Transcript
00:00He has a very small world with a big animal from Ramanath.
00:06This is a small family.
00:09There was one small girl who was named Savitri.
00:14Her family was 엄청 strong and dependent on Ramanath.
00:20Her son was quite good and hungry.
00:26and he was a chakrasanian secretary by the government of Kharika dao
00:32and he was hired by his fellow
00:37and he was hired by the people of Kharika
00:41and then he was hired by the Pharika
00:50and later he was hired by the chickens
00:55Our people will really just have to answer questions.
01:03Of course Haha tongue doesn't mainly wanna have to answer questions
01:10It is as unexpected as we have learned now
01:23हाँ मालिक आप तो यहां के जमीदार हैं और किसानों को अपनी मुठी में रखते हैं
01:31इनको कैसे इस्त destined करना है यह यह आप भली भाती जानते हो
01:36मालेक यहां क्या अगल-भगल के और भी गाहों पर आप ही का राज्य है
01:40He has a known for you and your own business.
01:41He has no idea without one of these things.
01:45So, I am here a king.
01:46I have this kind of king.
01:47He has this kind of king to make money on the side.
01:52He has this kind of king to make money on the side.
01:57After all, he is what is what he has on the side of the side?
01:59The king of the king of these things is a good country.
02:04He has a king of the king.
02:09ुखी और परेशान होता है
02:39लेकिन मैं अपनी जमीन ठेके पर देने पहले कुछ शर्त रखता हूँ, ठीक है?
02:46ठीक है मालिक, मैं आपकी शर्त मानने के लिए तैयार हूँ, बताईए आपकी क्या शर्त है?
02:53शर्त ये है कि तुम्हें मेरी जमीन पर काम करना होगा, और एक साल के बाद उस जमीन पर जो भी फसल उगेगी, उसका आधा हिस्सा तुम्हारा होगा और आधा हिस्सा मेरा होगा.
03:05जी ठीक है मालिक, मुझे आपकी शर्त मन्जूर है.
03:08जमीदार से जमीन की कागजी कारवाई करने के बाद, रामनाथ अपने घर चला जाता है, और अगले दिन खेती करने के लिए उस खेत में पहुँच जाता है.
03:19चलो, अब जमीनदार साहब से जमीन तो ले ली है, अब इसमें खेती करना शुरू कर देता हूँ.
03:26उमीद है इस जमीन पर अच्छी फसल होगी. मुझे इस जमीन पर बहुत मेहनत करनी होगी. तब ही मेरे लिए कुछ बच पाएगा.
03:34रामनाथ उस खेत पर दिन रात मेहनत करके फसल उगाता है. कुछ महीनों बाद गेहूं की फसल उपकर तयार हो जाती है. और रामनाथ गेहूं की फसल की कटाई शुरू कर देता है.
03:48रामनाथ की उगाए हुए फसलों की खबर जमीदार धरमवीर सिंग के कानों तक पहुँशती है.
03:55क्या मालिक, आपको पता नहीं है क्या, आज मदन अपनी फसल की कटाई कर रहा है. इस साल तो रामनाथ ने बहुत अच्छी गेहूं की फसल उगाई है. रामनाथ ने जो गेहूं की फसल उगाई है, वो तो एक दम से लहलहा रही थी. रामनाथ ने उसकी कटाई करना शुर�
04:25गेहुं की फसल बहुत अच्छी हुई है। अगर आधीजमींदार सहब भी ले जाएंगे,
04:30तो फिर भी मेरे पास कुछ तो बची जाएगा।
04:33अरे रामनात, तुमने तो फसल तयार कर दिया,
04:36और इस बार की फसल तो बहुत अच्छी लग रही है देखने में।
04:39Yes, maalik, this time I have a good fortune.
04:43I have a good fortune on this day.
04:45I have a good fortune on this day.
04:49I have a lot of fun to get out.
04:53I have a good fortune on this day.
04:56So now I have started my fortune.
04:58Oh, Ramanath, this is my job of my job.
05:03You have not been able to get out.
05:05So, this is why I have a good fortune on this.
05:09तुम्हारी मेहनत हो या ना हो, फसल तो अच्छी होनी ही थी
05:13मालिक, खेत बले ही उपजाओ हो
05:16अगर उसमें मेहनत नहीं होगी, तो फसल कैसे होगेगी
05:20मैंने बहुत मेहनत की है इस खेत में
05:23जादा मत बोल रामनात, मेहनत तो किराय के मजदूर भी करते है
05:27असली कमाई का हगदार तो वही है जिसकी जमीन है
05:31शर्त के मताबिक जल्दी से मेरे फसल का अधाइस्सा निकाल
05:35चल जल्दी कर, मुझे बहुत सारे काम है, मुझे वापस भी जाना है
05:39ये कहकर जमीदार रामनात से सारे गेहूं की अच्छी फसल लेकर चला जाता है
05:45और खराब फसल रामनात के पास छोड़ देता है
05:48जिसे देख कर रामनात मायूस हो जाता है
05:52हे इश्वर, इतनी जीत और महनत करने के बाद बस इतनी सी फसल मेरे हाथ आई है
05:57हम गरीबों को लोग ऐसे ही लूगते हैं
06:00इतनी महनत करने के बाद भी हमारे हाथ में कुछ नहीं आता है
06:04हे इश्वर, कब मेरी अपनी जमीन होगी
06:07रामनात इसी तरह अपनी जिंदगी काट रहा था
06:11कुछ महीनों बाद रामनात की बेटी सावित्री
06:14जो शहर पढ़ने के लिए गई थी वापस गाउं आ जाती है
06:18वापस गाउं आने पर जब उसने गाउं का नजारा देखा
06:22तो उसे बहुत दुख हुआ
06:24पिता जी हमारे गाउं का ऐसा हाल क्यूं है
06:27गाउं के सभी लोग दुखी और परिशान नजर आ रही है
06:31आखिर बात क्या है
06:33सावित्री बेटा
06:34इस गाउं में गरीब किसान की यही किस्मत है
06:37जमीनदार धरमवीर सिंग जैसे लोग
06:40हमारी गरीबी का फाइदा उठाते हैं
06:43मेहनत हम करते हैं
06:45और उसका फाइदा जमीनदार धरमवीर सिंग जैसे लोग खा जाते हैं
06:49हमारे पास ना अपनी जमीन है और ना अधिकार
06:52हम गरीब किसान बस मेहनत करते हैं और भूखे रहते हैं
06:56किसानों की ऐसी दैनिये स्थिती को सुन कर
07:00सावित्री बहुत दुखी हो जाती है
07:02पिताजी आप चिंता मत कीजिये अब मैं आ गई हूँ
07:06और यह अन्याय अब और नहीं चलेगा
07:09आज से मैं आपके साथ खेतों में काम करूंगी
07:12और उस लालची जमीनदार को उसी की शर्तों में बांज दूंगी
07:16अगले ही दिन सावित्री जमीदार धरमवीर सिंग के यहां पहुच जाती है
07:21अरे सावित्री तुम यहां कहो क्या बात है
07:25मुझे ठेके पर कुछ जमीन चाहिए
07:28तुम तो एक लड़की हो अब तुम खेती करोगी
07:31अरे तुम अभी बच्ची हो, तुमारे अंदर इतना दम नहीं है
07:35तुम पढ़ी लिखी लड़की हो, खेती नहीं कर पाओगी
07:39नहीं मालिक, ऐसा मत बोलिये
07:42भले ही मैं पढ़ी लिखी हूँ, मगर हूँ तो एक किसान की बेटी ही न
07:46खेती करना मुझे अच्छी तरह से आता है
07:49अच्छा चलो ठीक है, तुमारी बात मैं माल लेता हूँ
07:54वैसे भी काम का क्या रह गया है, पढ़ लिखकर तो सभी ऐसे ही बेरोजगार घूम रहे हैं
08:00आपका बहुत बहुत धन्यवाद मालिक
08:02अरे धन्यवाद, बाद में दे देना, पहले मेरे नियम और शर्ते को सुन लो
08:07आपकी क्या शर्त है मालिक, बताईए
08:10जमिदार धरमवीर सेंग, ये तो बच्ची है
08:14इस बार कुछ ऐसी शर्त बता देता हूँ, जिससे इसकी सारी फसल मेरी हो जाएगी
08:20वैसे भी इसके पिता रामनात हर साल गेहू ही लगता है, तो ये भी गेहू ही लगाएगी
08:26अच्छा सावित्री सुनो, तुम जो भी फसल लगाओगी, उसका आधा हिस्सा मैं रखोंगा और आधा हिस्सा तुम रखोगी
08:35लेकिन उपर का हिस्सा मैं रखूंगा और नीचे का हिस्सा तुम रखोगी
08:40अगर तुम्हें मेरी ये शर्त मन्जूर है तो बोलो
08:44ठीक है मालिक, मुझे आपकी शर्त मन्जूर है, ऐसा ही होगा
08:49अगले दिन से सावित्री अपने पिता के साथ खेतों पर काम करना शुरू कर देती है
08:54सावित्री ने इस बार धान की बजाए आलू की फसल लगाई और कुछ महीने बाद फसल तयार हो गई
09:01आलू की फसल इस बार बहुत अच्छी हुई थी
09:04अब सावित्री और उसके पिता दोनों खेट से आलू की फसल निकालने लग जाते हैं
09:10फसल की खबर मिलते ही जमिदार धरमवीर सिंग सावित्री के पास आता है
09:16अरे सावित्री शर्ट तो याद है ना तुम्हें?
09:20मालिक मुझे सब कुछ याद है आधा आपका और आधा मेरा और आपने कहा था कि उपर का हिस्सा आपका होगा और नीचे वाला का हिस्सा मेरा होगा
09:31देखिए मालिक इसने तो चालाकी कर दी ये धान की फसल नहीं है ये तो आलू की फसल है मालिक
09:39अरे ये क्या सावित्री? इस बार तुमने आलू लगाया है
09:43ये तो आप ही की शर्थ थी मालिक और आपने ही शर्थ बताई थी
09:48और अब आप ही शर्थ मानने को तयार नहीं है
09:51अरे लेकिन मैं इस घास फूस को लेकर क्या करूँगा?
09:54जबकि सारे आलू तो तुम ले रही हो
09:57मालिक में कुछ नहीं जानती आप अपना उपर का हिस्सा ले जाईए
10:02इस तरह अपनी चालाकी दिखाते हुए सावित्री ने बेईमान जमीदार को मू तोर जवाब दिया
10:09और सभी आलू लेकर घर आ गई और घास फूस जमीदार के हिस्से छोड़ाई
10:14पूरे गाउं में आज तक किसी ने भी आपसे चालाकी दिखाने की हिम्मत नहीं की
10:20और ये रामनात की बेटी सावित्री इतनी आसानी से आपको बेवकूफ बना गई
10:27अरे ये रामनात की बेटी मुझे क्या बेवकूफ बनाएगी
10:31आने दो इसे अगली बार उसे ऐसा सबक सिखाऊंगा कि मुझसे उलजने की कोशिश नहीं करेगी
10:38कुछ दिनों के बाद सावित्री दोबारा जमीदार के घर जाती है
10:42कैसे है मालिक
10:44अरे सावित्री फिर से तुम कहो क्या चाहिए तुम्हे
10:48आपकी जमीन ठेके पर चाहिए थी
10:51ठीक है मैं तुम्हें अपनी जमीन ठेके पर दे दूँगा
10:55पर मेरी इस बार की शर्थ भी कान खोल कर सुनो लड़की
10:59मालिक मुझे आपकी शर्थ मन्जूर है
11:14मालिक इस बार फसल के उपर का भाग मेरा ही होगा
11:18इस तरह सावित्री जमीन दार से बात करने के बाद घर आ जाती है
11:22इस बार भी सावित्री दोबारा खेती करने की तैयारी में जुट जाती है
11:27
11:55अरे ये क्या?
11:57इस सावित्री ने तो इस बार गेहूं की फसल लगा दी है
12:00ये लड़की तो जितना मैं सोच रहा था उससे कहीं होशियार निकली
12:05प्रणाम मालिक कैसे है?
12:07आप ठीक तो है ना?
12:09देखिए मालिक, इस बार मैंने गेहूं की फसल लगाई है
12:11और आपकी शर्त के अनुसार फसल के उपर का हिस्सा मेरा होगा
12:16और नीचे का हिस्सा आपका होगा
12:18इस तरह अपनी चतुराई से सावित्री ने दोबारा जमीनदार धरम वीर सिंग को मूर्ख बना दिया
12:24और जमीनदार एक बार फिर से धोखा खाकर गुसे से तिल मिला गया
12:29अरे मालिक, उस पिद्दी सी लड़की का दिमाग तो देखिए
12:33आप जैसे इतने बड़े चालबाज जमीदार को उसने फिर से मूर्ख बना दिया
12:39तुम सही कह रहे हो जुमरू
12:41सावित्री ने गेहूं की फसल की कटाई की और सारी फसल अपने घर ले आई
12:58और उस फसल का कुछ हिस्सा सावित्री ने गाउं के जरूरतमंद लोगों में बाट दिया
13:03सावित्री और रामनाथ दोनों बहुत ही खुश थे
13:07Okay, so you can see me again for the first time.
13:35देखो लड़की, तुम मुझसे ज्यादा होशियार बनने की कोशिश मत करना। मैं भी जमीदार धरमवीर सिंग हूँ।
13:44मुझे होशियारी नहीं आती है मालिक, मैं तो एक गरीब किसान की बेटी हूँ। होशियार तो आप लोग हैं, जो गाओं के गरीब किसानों की मजबूरी का फाइदा उठा रहे हैं।
14:14मालिक, इस बार आपकी क्या शर्त है?
14:16हाँ, शर्त तो है, तु खुद को बड़ा खोशियार समझती है न लरकी? इस बार फसल का उपर का और नीचे का हिस्सा मेरा होगा, और बीच का हिस्सा तेरा होगा। अब बोल, क्या तुम्हें मेरी ये शर्त मन्जूर है?
14:31बिल्कुल मन्जूर है मालिक, जैसा आप कहें। अच्छा ठीक है मालिक, तो अब मैं चलती हूँ, मुझे फसल उगाने की तयारी भी करनी है।
14:41लाल्ची जमीनदार की बात मान कर सावित्री अपने घर चली जाती है, और वह फिर से फसल उगाने की तयारी में लग जाती है, और इस बार वो गन्ने की फसल लगाती है।
15:05ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा, तुम बस ऐसे ही महनत करती रहो।
15:09कुछ महीनों बाद लाल्ची जमीनदार और उसका नौकर दोनों सावित्री के पास आते हैं।
15:15मालिक, इस बार तो सावित्री का दिमाग ही चक्राने वाला है।
15:19इस बार तो आपने शर्थ ही ऐसी रखी है, उपर का हिस्सा आपका और नीचे का भी हिस्सा आपका।
15:27तुमने बिल्कुल सही कहा जुम्रू, इस बार मैंने अपने दिमाग का सौ प्रतिशत उपियोग करके ब्रह्मास्त्र छोड़ा है।
15:34मैं भी अब देखता हूँ, वो किसान की बेटी सावित्री कैसे बच्चती है।
15:39इस तरह दोनों बाते करते हुए खेत के पास पहुँच जाते हैं, और जैसे ही वो खेत के पास पहुचते हैं, तो देखते हैं कि इस बार सावित्री ने गन्ने की खेती की है।
16:09I have no idea.
16:17अरे मालिक, आप आईए, आईए, कैसे हैं आप दोनों, आपस में क्या खुसुर-खुसूर कर रहे हैं?
16:24अरे वाह, एक तो चोरी, उपर से सीना जोरी, तुमने मुझे इस बार भी बेवकूफ बना दिया ना?
16:30नहीं मालिक, जरा मुझे भी तो बताएं कि मैंने आपको क्या बेवकूफ बनाया है?
16:36मालिक, आप तो गाओं वालों को बेवकूफ बनाते हो, देखिये मालिक, इस बार मैंने एक दन्ने की फसल लगाई है, और आपकी शर्त के मुताबिक इस फसल का उपर का और नीचे का हिस्सा आपका होगा, और बिच का हिस्सा मेरा होगा.
16:51अरे ओ किसान की बच्ची, मालिक को जादा होशियारी दिखाने की कोशिश मत करो, बेईमानी और मक्कारी में ये सबके बाप हैं बाप, ये खेत भी हमारा है और इसमें लगी फसल भी हमारी है.
17:06अरे ओ जुमरू, बस कर, ज्यादा चिलाने की जरूरत नहीं, शायद ये हमारी ही करनी का फल है. हमने गाओं के भोले भाले किसानों को बहुत थगा है, और आज पहली बार किसी ने हमें थगा है. इस लड़की ने हमारी आखे खोल दी है. अब मैं समझ चुका हूँ कि बे�
17:36बराबर का हग दूँगा. जितनी भी किसानों की जमीन मेरे पास गिरवी है, मैं उनको सारे कागज वापस कर दूँगा. और कभी भी उनकी गरीबी और लाचारी का फायदा नहीं उठाऊंगा.
17:47माले, आपने तो ये बहुत अच्छी बात कही है. एक किसान दिन रात महनत करता है अपने परिवार के लिए. मगर ना ही कभी वो अच्छे कपड़े पहनता है और ना ही कभी वो अच्छा खाना खापाता है. अपने परिवार का पेट भरने के लिए वो दिन रात अपना पे
18:17you can find the land in the world
18:19and you can find the land
18:21and you have time
18:23and you can find the path
18:25or you can find the path
18:27you can find the path
18:47ooooooooooooooo
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