00:00दोस्तों, आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं
00:02नाइनी दिस सेवंटी आट में रिलीज हुई एक बेहतरीन और यादगार फिल्म जवाला की कहानी
00:07ये फिल्म खास है क्योंकि इसमें महान अभिनेतरी मदवाला की आखिरी
00:12और मर्नो परांथ फिल्मी जलक देखने को मिलती है
00:15उनके साथ इस फिल्म में सुनील दत, सोहराब मोदी और परान जैसे दमदार कलाकारों ने अभिने किया
00:21फिल्म का निर्देशन और निर्मान एम वी
00:24रमन ने किया था और संगीत दिया था मशहूर जोरी शंकर जैकेशन ने
00:29यह कहानी है सत्ता की लड़ाई, बदले की आग और सबसे बड़ी तरास्दी पिता और पुर के बीच अंजाने में छिरी जंग की
00:36कहानी की शुरुआत, राज्य का पतन कहानी शुरू होती है सीमा देश से
00:41जहां राज करते हैं न्यायप्रिय महराजा अनुप सिन, वे अपने लोगों से बहुत प्यार करते हैं
00:47और हमेशा नायधर्म के रास्ते पर चलते हैं
00:51लेकिन हर अच्छे राजा का एक दुश्मन होता है
00:54अनुप सिन्ह का सबसे बड़ा शत्रू है रामपूर का राजा
00:57रामपूर का राजा अनुप सिन्ह की शक्ती और बढ़ते प्रभाव से परिशान रहता है
01:03एक दिन वाचानक अनुप सिन्ह के राज्य पर हमला कर देता है
01:06युद भैंकर होता है
01:08तलवारों की खनक और तोपों की गरगड़ाहच से पूरा राज्य हिल जाता है
01:13इस भीशन युद में महराजा अनुप सिन्ह हार जाते है
01:16उनका राज्य छिन जाता है
01:18उनकी सेना पराजित हो जाती है और उनने अपनी जान बचा कर भागना पड़ता है
01:23लेकिन सबसे बड़ा दूख ये होता है कि युद्ध के दौरान वे अपने नन्हे बेटे अजीद से बिछर जाते हैं
01:29जंगल का बेटा जब अनुप सिन्ही युद्ध में व्यस्त थे तब उनके वफदार साथी बच्चे अजीद को लेकर जंगल मिल में भाग गए थे
01:40यहां अजीद की परवरिश इनसानों की बजाए जंगल के जानवरों के बीच होती है
01:44वह शिकारी पक्षियों, चीते और शेरों की दहार सुनते हुए बड़ा होता है
01:49समय गुजरता है और छोटा अजीद अब एक बलिष्ट, बहादूर और निर्जवान बन जाता है
01:55उसी यह नहीं पता कि वह किसी राजा का बेटा है
01:58उसके लिए जंगल ही उसका घर है और जानवर उसके दोस्त
02:02अनुप सिनी का सफर, राजय वापस पाने की जंग दूसरी और अपने राजय से बेगर हुए अनुप सिना गहरे दुख में डूबे रहते हैं
02:10लेकिन उनकी हिमत तूटी नहीं है
02:13जंगल में उनकी मुलाकात होती है वानराज से जो उनका दोस्त और सहयोगी बन जाता है
02:18वानराज की मदद से अनुप सिनी एक एक कर आसपास के राजाओं से सहायता मांगते हैं
02:23ताकि वे अपना खोया हुआ राजी वापस पा सके
02:26लेकिन समय बदल चुका है
02:28लोग उनकी मदद करने से डरते हैं क्योंकि रामपूर का राजा अब बेहद ताकतवर बन चुका है
02:33किसमत का खेल
02:35अजीत और जवाला की मुलाकात एक दिन किसमत एक अनुखा मोड लेती है
02:39रामपूर का राजा अपनी बेटियों के साथ जंगल से गुजर रहा होता है
02:43अचानक उन पर डकैतों का हमला हो जाता है
02:45यही वहपल है जब अजीत की बहादूरी सामने आती है
02:48वह अपनी ताकत और वीरता से अकेले ही डकैतों को हरा देता है
02:51और राजा और उसकी बेटियों की जान बचा लेता है
02:54रामपूर का राजा अजीत से बहुत प्रभावित होता है
02:56और उसे अपने राजे में बुलाकर सिना का कप्तान बना देता है
02:59यही पर अजीत की मुलाकात होती है राजा की सुन्दर बेटी जवाला से
03:03ज्वाला और अजीत धीरे धीरे एक दूसरे के करीब आते हैं और प्यार में पढ़ जाते हैं
03:09रामपूर का अत्याचार लेकिन रामपूर राज़ की असली तस्वीर बहुत भयान का है
03:14असल में सत्या संभालर की हिराजा के बेटे कुमार और उसके दुष्टमंत्री विक्रम ने ये दोनों जनता पर अत्याचार करकवी समर्द्ध और खुशालने वाला सी मादेश अभखमरी और गरीबी का शिकार हो गया है
03:24लोग अपमाने तक जीवन जीने को मजबूर है यह सब देकर महराजा अनुपसिंगा दिल तरब उठता है
03:30अनुपसिंगा बना डेकैथ अनुपसिंगा अब ये अन्याए और नहीं सहपाते
03:35इसलिए वे एक बड़ा फैसला लेते हैं वे अपने साथियों के साथ मिलकर डकैथ बन जाते हैं
03:41लेकिं धियान रहे वे किसी आम इनसान को नहीं लूटते
03:44वे केवल रामपुर के राजा और उसके परिवार की संपत्ती और खजाने को निशाना बनाते हैं
03:49ये उनकी लड़ाई थी अन्याए और अत्याचार के खिलाफ
03:53जन्ता के लिए अनुप सिंग अब खलनायक नहीं बलकि जन्नायक बन जाते हैं
03:59लोग उन्हें अपना मसीहा मानने लगते हैं
04:02बाप पेटे की अन्जानी टककर यहां से कहानी एक भावक और रुमांचक मोड लेती है
04:07अजीत जिसे ये नहीं पता कि अनुप सिंगह उसका असली पिता है
04:11रामपुर के राजा और उसकी बेडी जवाला का वफादार हो चुका है
04:14जब अनुप सिंहर डकैट बनकर खजाने लूटते हैं तो अजीत इसे अपराद समझता है
04:19वह अपरण करता है कि चाहे कुछ भी हो जाए वह इस डकैट को पकड़ कर सजा देगा
04:24उसे ये नहीं पता कि वह अपने ही खून अपने पिता के खिलाफ तलवार उठाने जा रहा है
04:30क्लाइमेक्स
04:31पिता पुतर का आमना सामना अब शुरू होती है असली जग पिता और पुतर की लड़ाई
04:36एक और है न्याइप्रिया लेकिन मजबूर अनुप सिंग यह जो अपने लोगों के लिए डकैट बना
04:42दूसरी और है अजीत जो वीर और इमानदार है लेकिन सच से अंजान दोनों की भिडंध होती है
04:49तलवारें टकराती हैं दोनों अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं
04:53यह जंग केवल शक्ति की नहीं बलकि किस्मत की भी है
04:56क्या अजीत को कभी सत्स पता चलेगा कि विजिस डकैट से लड़ रहा है वही उसका पिता है
05:01क्या अनुप सिंग अपने बेटे को गले लगा पाएंगे
05:04क्या सीमा देश को उसके अत्याचारियों से मुक्ती मिलेगी
05:07इन सवालों का जवाब फिल्म जवाला के भावुक और रोमांचक क्लाइमेक्स में छिपा है
05:13निशकर्ष जवाला सिर्फ एक साधारन एक्शन फिल्म नहीं है
05:19ये फिल्म दिखाती है कि किस तरह किसमत इनसान को पिता से बेटे
05:23और बेटे से पिता तक दूर कर सकती है
05:25ये फिल्म प्यार, करतवी और बलेदान की कहानी है
05:29और सबसे बड़ी बात इस फिल्म ने हम अधुबाला की आखिरी अदाकारी दी
05:33उनकी सुन्दरता और अभिने इस फिल्म को हमेशा के लिए अमर बना देते हैं
Comments