00:00Mahatma Ghandi की मृत्यू के बाद उनकी अस्तियों को देश की अलग अलग नड़ियों में विसर्जित किया गया था
00:09जबलपुर के तिलवारा घाट में भी Mahatma Ghandi की अस्तियों को विसर्जित किया गया था
00:16उस समय जबलपुर में लियोनोर्ट थियोलोजिकल कॉलेज ने
00:22Ghandi जी के अस्ति बिसर्जन के आयोजन को फिलमांकित किया था
00:30यह बात 1948 की है
00:32Ghandi जी की अस्तियां रिलगारी के माद्धे हम से जबलपुर पहुँची थी
00:37उस समय इस्छेत के मुख्यमंत्री रवी संकर शुक्ल जबलपुर के राजनेता द्वार का प्रशाद मिस्र
00:48जबलपुर से ही कॉंग्रेस के नेता सेट गोविंदास
00:56कवियत्त्री और सुतंतर संगराम सेनानी सुवद्रकुमारी चोहान
01:03जैसे व्यक्तित्व स्टेशन पहुँचे थे और उन्होंने गानी जी की अस्तियों को
01:12एक रत में रखा था
01:19इस रत को ऐसे तयार किया गया था कि
01:24जिसमें लंबी-लंबी रस्यां थी ताकि इस रत को हातों से खीच कर तिलवारा घाट तक ले जाया जा सके
01:35इस अस्तिव सर्जन के जुलूस में सबसे आगे जुजत्था चल रहा था
01:44वे गान्धी जी के ही भजन गाते हुए नजर आ रही है
01:49चबलपूर रेलवे स्टेशन से तिलवारा घाट की दूरी लगवग दस किलो मीटर है
01:59लेकिन गान्धी जी को अंतिम बिनाई देने के लिए
02:08बुजर्ग नौजवान और बच्चे एक साथ इस अंतिम आत्रा में सामिल हुए
02:19इस फिल्म में जो द्रश से दिखाए गए हैं उनकी तस्बीर आज पूरी तरह बदल गई है
02:28जबलपूर में काली चट्टाने अभी भी हैं लेकिन कच्ची सरक की जगए पक्की सरके हो गई है
02:37रत को पूरे समय हाथों से खीच कर ले जाया गया था
02:42लंबी रस्यों को सेना और पुलिस के जवान खीच रहे थे
02:48इस चुलूस में हिंदू, मुस्लिम, सिक, इसाई यहां तक की अंग्रेज भी नज़र आ रहे हैं
03:02सहरों के अलाबा गाउं से भी लोग गांधी जी को अंतिम बिनाई देने के लिए आये थे
03:11लोगों के हाथ में गठ्रियां हैं इसमें कुछ महलाएं भी नज़र आ रही हैं
03:18जो छोटे-छोटे बच्चों को लेकर यहां पहुँची थी गांधी जी जबलपूर तीन बार आये थे इनमें बे एक बार तो
03:31theological college के ही एक कारिक्रम में हिस्सा लेनी के लिए पहुँचे थे एक बार गांधी जी हरीजन अंदूलन के लिए भी आये थे और हरीजन सब्द भी उन्होंने जबलपूर में ही अंदूलन के लिए इस्तेमाल किया था
03:51गांधी जी के कई ऐसे राजनेतिक फैसले थे जिन में जबलपूर का एहम युगदान था
04:03सुवाश्चंद्रबोस और गांधी जी के मधवेत की वज़य भी जबलपूर ही था
04:10जिसमें तुर्पूरी कॉंग्रेस का अधिवेशन जिसमें गांधी जी के प्रत्यासी सीता भी पट्टर अमहिया की हार भी थी
04:21उसके बाद गांधी जी और सुवाश्चंद्रबोस के बीच में मतवेत हो गए
04:24इसलिए गांधी जी के जीवन में जबलपूर का भी विसेश महतु था
04:31तिलवारा घाट का यह पुल आज भी कुछ इसी तरह नजर आया आता है
04:36हलाकि अब इस पर आवा गमन नहीं होता
04:39उस जमाने में अंग्रेजों ने इस पुल को नर्मदा नदी के आरपार बनवाया था
04:48धीरे धीरे जब जट था तिलवारा घाट पहुँचा तो वहां पहले से भी लोग मौजूद थे
05:00हजारों की तादाद में लोगों ने गांधी जी की अस्तियों का दर्षन किया
05:09उन्हें पुस्पांजली अर्पित की
05:11अस्तियों को नर्मदा में विसरजन करने से पहले खुद रवी शंकरशुक्ल ने अपने कंधे पर अस्तियों के बक्से को उठा कर
05:23घाट के पार्स तक पहुँचाया इसके बाद मंतरोच चार हुआ
05:30और उसके बाद सेना के जबानों ने गौड आफ आना दिया
05:40इस दोरान आस्मान में उड़ता हुआ एक फाइटर जेट भी नज़र आ रहा है
05:48उस जमाने में भी जबलपुर सेना के लिए एक महत्वकून इस्थल था
05:56कुल मिला कर आम आदमियों ने सेना के जबानों ने पुलिस ने ग्रामेनों ने सेहरियों ने सभी ने मिलकर
06:13महत्मा गांधी को अंतिम बिदाई दी थी
06:16इस फिल्म में अंत में तिल्वारा घाट का एक दृष्च दिखाया है
06:26जिसमें हजारों की तादाद में लोग अस्ति विसरजन के बाद इसनान करते हुए नज़र आ रहे हैं
06:35इससे अंदाजा लगाया ज़सकता है कि महत्मा को अंतिम बिदाई देने मालों में उनके हजारों दीवाने सामिल थे
06:44यह फिल्म भारत सरकार की आर्काइब में अभी भी सुरक्षित है
06:53विश्यजीत सिंग एटीबी भारत चबलपूर
06:59Dimashra Dandhi, who is the father of the nation, who came to Lennart Theological College and he delivered the lectures.
07:11Lennart Theological College always it stands with the nation. It is from the beginning before the
07:18independence until Lennart Theological College stands with the nation and works for the betterment of the society.
07:29I think that is the reason they could be able to produce it by their own setup.
07:43College is now more than 100 years.
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