H-1B Visa Fee: चीन (China) ने विदेशी टैलेंट को लुभाने के लिए नया K वीजा (K-Visa) शुरू किया है, जो H-1B जैसा है और 1 अक्टूबर से लागू होगा. इसका मकसद टैलेंटेड ग्रैजुएट्स को आसान रास्ते से चीन लाना है, जबकि अमेरिका इमिग्रेशन को महंगा और मुश्किल बना रहा है.
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00:00अमरीकी राष्टपती डोनाल ट्रंप ने विदेशियों को नौकरी से लगभग बाहर करने के लिए
00:09H-1B वीजा की इतनी फीज बढ़ा दी कि कम्पनियों को ये भरना मुस्किल हो गया
00:14और इसी लिए चीन को कहते हैं कि अमेरिका डाल डाल तो चीन पात पात
00:20चीन ने अब इसी H-1B वीजा की तोड़ निकालते हुए एक बड़ा एलान कर दिया है
00:26चीन ने तमाम टेकनोक्रेट और इंजीनियर से लेकर के टेकनोलोजी की जानकारों को अपने देश में बुलाने के लिए एक बड़ा ओफर दे दिया है
00:35चीन ने विदेशी टैलेंट को अपने देश में लुभाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए स्टेट काउंसिल की ओर से एलान करा दिया है कि एक अक्टूबर से नया के वीजा लागू होगा जो अमेरिका के H-1B वीजा का जवाब होगा
00:49चीन का मकसद है कि एशिया और खासकर दक्षने एसिया से युआओं को आकर्षित करने के लिए साइन्स, टेकनलोजी, इंजिनियरिंग और मैथ यानि स्टेम छेत्रों में पढ़ाई या काम करने के लिए उनके देश के रास्ते खुले हुए हैं
01:04वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में विदेश्री प्रोफेशनल्स के लिए हालात मुस्किल जैसे ही हुए हैं, चीन ने इसका फायदा उठाते हुए डोनाल ट्रम्प की काट ढून ली है, क्योंकि राश्टपती डोनाल ट्रम्प ने H1B वीजा पर सालाना एक लाग डॉलर की �
01:34जाता है, ये कहावत भी सार्थक हो जाती है, चीन का ये वीजा कई मायने में आसान और लचीला बताया जा रहा है, सबसे वड़ी रहत विजबात की है कि अब विदेशी आवेदुकों को किसी लोकल स्पॉनसर या चीनी कंपनियों की जरुत नहीं होगी, यानि कोई भी यो
02:04अब आप जान लिए कि ये के वीजा मिलेगा कैसे, ये खास तोर पर वीजा यंग साइंटिस्ट और टेकनलोजी के ग्रेजुट्स के लिए तैयार रहेगा, स्टेम डिग्री यानि साइंस टेकनलोजी, इंजीनियर यानि मैथ में इंटरेस्ट रखने वाले युगाओं को �
02:34प्रोफेशनल्स अब मूव कर जाएंगे और अमेरिका से वो इस वीजा के माध्यम से तमाम काबिल लोगों को अपने देश में ला सकेगा और अपनी टेक और रसर्च इंडस्ट्री से जोड सकेगा, अमेरिका में जहाँ इमिग्रिशन प्रोसस सक्त और महंगा हो रहा है, �
03:04कि वो गोबल टेकनोलोजी रेस में कहीं से भी पीछे नहीं रहना चाहता, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कदम अमेरिका पर दबाव बढ़ाएगा और एशियाई टैलेंट को नए प्लेटफॉर्म यानि नए दरबाजी खोल करके देगा, जिससे चीन आगे बढ़ेगा �
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