00:00ुच्छतरपूर की इस नन्नी भजन गाईका के सुर्ज इत्रे बड़े हैं, गम भी उतना ही बड़ा है
00:24पिता की हत्या के बाद इसके दादा जी ने इसके दर्द को भुलाने के लिए भजन सिखाना शुरू कर दिया, आज इस बच्ची को 130 भजन याद है
00:54राधिका की मा, राधिका को संगीत के साथ साथ पढ़ाई भी कराना चाहती है और बड़ी होकर अधिकारी बनते देखना चाहती है
01:08राधिका जब 6 साल की थी तब दादा जी की पास आकर बैठती थी और भजन में उसकी रूची बढ़ने लगी
01:37दादा जी ने उसी संगीत की शिक्षा देना शुरू किया आज राधिका बुंदेल खन में धार्मिक आयोजनों में अपनी आवाज से अपनी पहच्चान बना रही है
01:46मुस्को जो है फर जो है यह नौर आत्री में हम लोग जाते हैं सो जो है भजन गाते हैं जैसे गड़े शतरती आती गड़े चत्रमी भजन गाती है
01:54यह चाही गुरू है और जाने माने संगीतकार है भजन संगीतकार है जो अपनी नातन को पिछले तीन सालों से लगातार भजन सिका रहे हैं आज उसकी गले बैसाइट सरस्तुत्री का बराजमान हो गया है और एक सो तीस भजन उसको मौकत याद है राज का की देमांड बढ
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