00:00रवी एक छोटे से गाउं का लड़का था, उसके पिता खेत में काम करते थे और दिन रात मेहनत करके परिवार का पेट पालते थे
00:07रवी को अक्सर अपने दोस्तों के नए कपड़े और जूते देखकर जलन होती
00:12एक दिन उसने पिता से जूते मांगे, पिता ने मुस्कुरा कर कहा
00:16बेटा, अभी पैसे नहीं है, लेकिन अगले महीने ले देगे
00:21अगले ही हफ़ते पिता खेत में काम करते हुए बुरी तरह घायल हो गए
00:25पैर में चोट थी, फिर भी अगले दिन वे नंगे पाम खेत में गए
00:29ताकि परिवार भूखा न सोय, रभी ने पहनी बार देखा
00:33कि उसके पिता का जूता फटा हुआ था, और उनका पैर खून से भरा था
00:37उसकी आँखों में आँसु आ गए, अगले महीने जब पैसा आया, पिता ने रभी के लिए जूते खरीदे
00:43रभी ने पुराने जूते उठा कर कहा, पापा, पहले आपके लिए नए जूते लेंगे, मेरे पास तो अभी भी पुराने हैं
00:50उस दिन रभी ने सीखा कि बड़ा बनने का मतलब सिर्फ कमाना नहीं, अपनों का दर्द समझना है
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