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00:00। रहो न भूल के कभी मदांद तुछ रित्त में, सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में, हनाथ कौन है यहां त्रिलो की नाथ साथ हैं, धयालु दीन बंधु के बड़े विसाल हाथ हैं।
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