00:00ुप रे सागर अथ्टु ध्यान से सुन ये राम तुम्हें बतलाता है किस भूते पर तुव अकड़ रहा अब रगवर तुमको दिखलाता है अपना पन बहुत दिखाया मैं कई बिंति दिवस मनाया मैं अनुनई तुझको स्विकार नहीं तुने माना मेरा आभार नहीं हम क
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