00:00नेपाल में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली समेत कई मंत्रियों ने स्तीफा दे दिया। फिलहाल नेपाल में प्रधानमंत्री नहीं है। ऐसे में सवाल ये है कि नेपाल की राजनीती में आगे क्या हो सकता है। नेपाल की कमान किस �
00:30विरोध प्रदर्शन में ही पूरी तरह सरिंडर करना पड़ा यहां तक की प्रदर्शनकारियों ने नेपाल के मंत्रियों पर हमला किया और मारपीड भी की इससे पहले सोमवार के विरोध प्रदर्शन में एक दर्जन से जादा नौजवान मारे गए थे काठमांडू के मेर �
01:00नेपाल के जाने माने चिंतक और लेखक सी के लाल कहते हैं
01:04यूकरेन में जलन्सकी का उभार देखें तो पॉपलिस्ट निता ऐसे ही आंदोलनों से आते हैं
01:10लेकिन उनके साथ दिक्कत ये हो जाती है कि कोई संगठन नहीं होता और नहीं कोई विचारधारा होती है
01:16कई बार भीड के आगे आने से जो नित्रित्व पैदा होता है उससे बहुत परिवर्तन की उम्मीद करना खत्रे से खाली नहीं होता
01:24काटमांडू के मेयर बालेन शाह से लोग सोशल मीडिया पर अपील कर रहे हैं कि इस्तीफा देकर नित्रित्व करें
01:31नेपाल में जब भी वैकलपिक राजनीती की बात होती है तो बालेन शाह का नाम अक्सर चर्चा में आता है आखिर बालेन शाह पर लोग इतना भरोसा क्यों कर रहे हैं
01:42सीकेलाल कहते हैं, बालेन शाह को लोग आकरशक व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं, वो गायक हैं, काम में तो उनका कोई खास प्रभाव दिख नहीं रहा है, सिर्फ ये है कि वो सक्ता के खिलाफ बोलते हैं, जैसे बालेन शाह ने कहा था कि सिंग दरबार में आग लगा
02:12अरविंद केजरिवाल के उभार से कर रहे हैं, लेकिन डेनमार्क में नेपाल के राजदूत रहे विजेकांत कर्ण इससे सहमत नहीं है, विजेकांत कर्ण का कहना है कि बालेन शाह की कोई राजनीतिक प्रिस्ट भूमी नहीं है, जबकि अरविंद केजरिवाल की एक सोशल
02:42बना लेता है क्या नेपाल में जेंजी आंदोलन अपनी राह बना पाएगा इस सवाल के जवाब में सीके लाल कहते हैं अभी तक जेंजी के गुस्से को कोई दिशा मिलने की संभावना नहीं दिख रही है ऐसे आंदोलन में एक डर भी होता है कुछ धूर्त लोग इसका इस्त
03:12क्याद कीजिए कि 2015 में मधेस आंदोलन में ऐसी ही क्रूरता भरी हत्याएं हुई थी लेकिन मधेस की बातें काटमांडू के मीडिया में नहीं आती है ओली में शासक होने का दंभ आ गया है और उन्हें लगता है कि कोई कुछ नहीं बिगार सकता है साल 2008 में नेपाल में रा�
03:42कल्प चाहते हैं सी के लाल इसके जवाब में कहते हैं देखिए सार्वजनिक स्मृतियां ज्यादा दिनों तक रहती नहीं है दूसरी बात है कि अभी तो नई पीड़ी है उसने राजशाही की कुरूरता देखी नहीं है इन्हें तो उसका अनुभव भी नहीं है तुलना त
04:12कुछ नहीं है सी के लाल आगे कहते हैं दूसरी तरफ जो सक्ता में है उन्हें लगता है कि बहुत त्याग करके आए हैं इसलिए कुछ भी करेंगे तो जन्ता उन्हें माफ कर देगी लेकिन मुझे लगता है कि दिक्कतें दोनों तरफ हैं
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