00:00शहजादा और फकीर एक एतिहासिक कहानी.
00:03बहुत पहले की बात है.
00:04एक बार की बात है कि हिंदुस्तान में एक महान बादशाह हुकूमत करता था.
00:09उसका एक ही बेटा था शहजादा सलीम.
00:12सलीम एक नवाबजादा था,
00:13लेकिन उसे अक्सर ताज और तामजाम से उब महसूस होती थी.
00:18वह अक्सर अपने महल से निकल कर शहर की गलियों में घूमता,
00:22लोगों की जिन्दगी का जाइजा लेता.
00:25एक दिन उसने एक फकीर को देखा,
00:28जो सड़क के किनारे बैठा था.
00:30उस फकीर के चहरे पर सुकून था,
00:33आँखों में रौशनी थी.
00:35शहजादा उसके पास गया और पूछा,
00:38तू इतना खुश क्यूं है?
00:40तेरे पास ना माल है ना कपड़े.
00:42फकीर मुस्कुरा कर बोला,
00:45शहजादे, सुकून दिल में होता है,
00:48महलों में नहीं.
00:59धीरे धीरे शहजादा समझने लगा,
01:02कि असली दौलत, ग्यान, नैतिकता और इंसानियत है.
01:08कई साल बाद, जब वह खुद बादशाह बना,
01:11तो उसने अपनी हुकूमत को इंसाफ,
01:14करुणा और शिक्षा की बुनियाद पर चलाया.
01:17उसने गरीबों के लिए मददगाहें बनवाईं.
01:20आस ओमेक इनियी आईं.
01:23शिक्षा व्यवस्था बेहतर की,
01:25और फकीरों को इज़द दी.
01:28लोग कहते हैं कि शहजादा सलीम,
01:30एक फकीर से मिलकर बदल गया,
01:32और उसी की वजह से हिंदुस्तान का एक रोशन दौर शुरू हुआ.
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